लगें वृक्ष असंख्य
करें प्रतिज्ञा।
करें चिंता इसकी
शिशु समान।
रहेगी न धरती
करोगे क्या?
न सोचे ये धरती
हो कुछ ऐसा।
बची रहे धरती
फैले संदेश।
नदियाँ रहैं भरी
पोसें धरा।
बचे अस्तित्व मेरा
खोजें उपाय।
पॉलिथीन मुक्त हो
अपनी धरा।
धरा से मिले प्राण
उसे लौटाएँ।
मनाएँ रोज सब
निखरे धरा।
बने जैविक खाद
उर्वर धरा।
रिसाइकिल करें
निज वस्तुएँ।
हंसेंगी धरा।
धूल धूसरित धरा
बुलाए हमें।
हरी भरी धरती
सँवारे सभी।
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कॉपीराइट@डॉ.भारती वर्मा बौड़ाई
