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भेंड -चाल

                       

भेंड -चाल

अरब में एक राज्य था | जहाँ का राजा व् मंत्री दोनों बहुत अच्छे थे व् प्रजा का बहुत ध्यान रखते थे | उनके राज्य में कोई कष्ट नहीं था | सब सुखी थे व् सब राजा व् वजीर की प्रशंसा किया करते थे |

कहते हैं न , कि कोई दुखी व्यक्ति किसी को खुश नहीं देखना चाहता है | उसे लगता है या तो वो खुश हो जाए या सब दुखी हो जाएँ | ऐसे ही एक जादूगरनी थी | जो दूसरे राज्य में रहती थी |  वो अपने जीवन से बहुत दुखी थी | एक बार उसने अपना राज्य छोड़ने का फैसला किया वो टहलते -टहलते  उस राज्य में पहुंची | वहां जा कर उसे बहुत दुःख हुआ क्योंकि वहां हर कोई खुश था | किसी को कोई तकलीफ ही नहीं थी | सब अपने राजा और वजीर के शुक्रगुजार थे और आनंद से जी रहे थे |

जादूगरनी ने सोचा कि अगर वो सुखी नहीं तो कोई और कैसे सुखी रह सकता है |  वो सोचने लगी की इस गाँव के लोगों को कैसे दुखी किया जाए | उसने बहुत तलाशा तो उसे एक कुआ मिला जहाँ से सारे गाँव के लोग पानी लेते थे | क्योंकि गाँव में बस वो ही एकलौता कुआ था | जादूगरनी ने अपने जादू उस के पानी पर कर दिया | जादू के अनुसार जो भी उस  कुए का पानी पीएगा वो पागल हो जाएगा |

सुबह जब लोग उठे और उन्होंने पानी पीना शुरू किया , तो वो पागल हो गए | उन्हें राज्य में सब कुछ गलत लगने लगा | वो राजा और वजीर की बुराई करने लगे | राजा और वजीर तब तक सो कर नहीं उठे थे | जब वो सो कर उठे तो उन्हें पता चला कि सब लोग असंतुष्ट है | राजा को पता चला कि लोग सुबह से कुए की जगत पर गए उन्होंने पानी पिया और उसके बाद से ही राजा को और उसकी नीतियों को कोसने लगे | राजा ने तुरंत उस कुए से पानी मंगवाया | उन्होंने एक गिलास पानी खुद पिया और एक गिलास पानी वजीर को दिया | राजा और वजीर भी पागल हो गए |

शाम तक गाँव में सब कुछ सामान्य हो गया | अब लोग राजा और वजीर को नहीं कोस रहे थे | वो उनकी प्रशंसा कर रहे थे | क्या राजा और वजीर ने सब को ठीक कर दिया था ? नहीं , राजा और वजीर भी पागल हो गए थे |

                     मित्रों ये कहानी हमने खलील जिब्रान की कहानियों से ली है | ये कहानी भेड़ -चाल ये बताती है कि हम सब भेड़ों की तरह एक ही दिशा में हांके जाने पर विश्वास करते हैं | भीड़ के साथ अगर गलत भी है तो वो हमें सही लगता है | और ये जानते हुए भी कि सच क्या है हम भीड़ को ही फ़ॉलो करते हैं |

क्योंकि हम समूह से अलग सोचना ही नहीं चाहते |  अपना दिमाग लगाना ही नहीं चाहते | 

राधा का एक्सीडेंट हुआ | तुरंत ढेर सारी  भीड़ लग गयी | पर किसी ने राधा को नहीं उठाया |  तभी भीड़ में से एक आदमी ने हिम्मत कर के राधा को हॉस्पिटल पहुचाया | आप सोच सकते हैं कि उन लोगों ने क्यों नहीं उठाया , वो भी तो उठा सकते थे | उठा सकते थे , पर उनमें से हर कोई ये सोच रहा था की दूसरे ने नहीं उठाया तो मैं क्यों उठाऊं |

कामलो सो लाडलो

सड़क पर पड़े पत्थर से ठोकर खा कर भी हम उसे इस लिए नहीं उठाते क्योंकि किसी और ने नहीं उठाया | और सड़क पर पड़ा वो पत्थर वैसे ही पड़ा हुआ और लोगों को ठोकर मारता रहता है |

इस दुनिया में बहुत से तानाशाह हुए हैं | जब वो खत्म हुए तो उस देश की जनता से पूंछा गया कि आपने उनके विरुद्ध आवाज़ क्यों नहीं उठाई | तो उन सब का उत्तर होता है ,  ” हमें पता था कि वो गलत कर रहे हैं | फिर भी हम इस लिए नहीं बोले क्योंकि कोई भी नहीं बोल रहा था |

ये भेंड चाल  बहुत ही खतरनाक है | आज जमाना सोशल मीडिया का है | फेसबुक व्हाट्स आइप के जरिये झूठी खबर को मिनटों में फैलाया जा सकता है | फेक वीडियो देख कर दंगे भी हो सकते हैं | ऐसे में जरूरी है कि पागल लोगों के साथ   खुद पागल न बने , अपने दिमाग का इस्तेमाल करें व् भेंड चाल में न फंसे |

अटूट बंधन परिवार

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डॉक्टर साहब




दूसरी गलती 

राधा की समझदारी

फर्क

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जिस तरह एक स्वस्थ रिश्ते की नींव आपसी विश्वास और समझदारी पर टिकी होती है, उसी तरह परिवार की आर्थिक सेहत के लिए भी सूचित और सतर्क फ़ैसले ज़रूरी हैं। डिजिटल युग में नए-नए वित्तीय विकल्प लगातार उभर रहे हैं, और जो लोग इनकी बारीकियों को समझना चाहते हैं, वे अक्सर bitcoin sázení जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी पढ़ते हैं। हालाँकि, यह कभी न भूलें कि सट्टेबाज़ी में हमेशा जोखिम शामिल होता है और इसे कभी भी आय या पैसा कमाने के भरोसेमंद साधन के रूप में नहीं देखना चाहिए — बेहतर यही है कि ऐसे विकल्पों में केवल उतना ही शामिल हों, जितना आप खोने का खर्च उठा सकते हैं, और ज़रूरत पड़ने पर किसी जानकार से सलाह ज़रूर लें।