राधा की समझदारी

राधा की समझदारी

क्या आप जो काम शुरू करते हैं उसे बीच में ही छोड़ देते हैं या पूरा खत्म करते हैं ? अगर बीच मेविन ही छोड़ देते हैं तो राधा की तरह आप को भी ये आदत छोड़ कर समझदारी अपनानी होगी |

प्रेरक कथा -राधा की समझदारी 

राधा अपने कमरे में बैठी पल्लू से आँसू पोंछ रही थी | बाहर से आने वाले स्वर उसे साफ़ -साफ़ सुनाई दे रहे थे | उसकी सास और ननद मुहल्ले की औरतों से कह  रहीं थी की क्या बहु आई है कोई काम करने का सहूर नहीं है | इसकी माँ तो कह रही थी कि इसे सब काम आते हैं , पर देखो सुबह से कोई काम पूरा नहीं किया है | मुहल्ले की औरतें उफ़ कहते हुए उसकी सास के साथ सहानभूति जता रही थीं | उस पर वही  पूराना वाक्य , ” क्या जमाना आ गया है , आजकल की बहुए तो … |

                                     राधा के दिल में हुक सी उठ रही थी | उसकी इच्छा थी कि उसका नाम अच्छी बहुओं में शामिल हो | वो उच्च शिक्षित थी  तब भी सब कुछ तो सिखाया था माँ ने खाना पकाना , कपडे धोना , सीना -पिरोना | उसे भी लगता था कि शिक्षा का अर्थ ये नहीं है कि घर के कामों से परहेज किया जाए , बल्कि उन्हें और अच्छे तरीके से किया जाए | उसने तय कर रखा था वो सब काम करके ससुराल में सबको खुश रखेगी | पर आज पहले ही दिन सब गड़बड़ हो गयी |

पापा ये वाला लो

सुबह इसी उद्देश्य   से वो नहा -धो कर रसोई में पहुंची | सब्जी काट कट कर आटा  माढने के लिए परात में निकाला ही था कि सासू माँ की आवाज़ आ गयी | बहु पूजाघर साफ़ किया कि नहीं | उसने झट से हाथ धोये और परात को थाली से ढक कर रख दिया फिर पहुँच गयी पूजाघर सफाई करने |  सभी मूर्तियों को  उसने हटा कर मंदिर की सफाई की कागज़ बिछाया | मूर्तियाँ साफ़ करने जा ही रही थीं की पति का फरमान आ गया ,” राधा पहले कपडे धो लेना , मेरी ये शर्ट सूख जाए तो प्रेस कर देना , शाम को यही पहन कर क्लायंट से मिलने जाना है | राधा मंदिर से भागती -भागती कपडे धोने बैठ गयी | तभी देवर ने कहा ,” भाभी ये तो धुलते ही रहेंगे , पहले मेरी मैथ्स का सवाल सुलझा दो , मुझे स्कूल जाना है | राधा कपडे छोड़ गणित के सवाल सुलझा ही रही थी की बाहर ससुर जी की जोर -जोर से चिल्लाने की आवाज़ आ रही थी , ” ये क्या घर को अजायबघर बना कर रखा है , न अभी तक घर साफ़ हुआ है न कपडे , न खाना बना है नही कुछ और काम , माँ ने कुछ सिखा के नहीं भेजा |

राधा को ये बात बहुत चुभी पर सच्चाई ये थी कि उसने सुबह से कोई काम पूरा नहीं किया था | भले ही उसका उद्देश्य  सबको खुश करने का था पर काम तो कोई भी नहीं हुआ | जब उसके पति मीत को अपने पिता के गुस्से के बारे में पता चला तो वो राधा के पास आया और उसे प्यार से समझाने लगा , ” राधा तुमने हर काम शुरू किया पर उसे बीच में ही छोड़ दिया  , कोई भी काम पूरा न होने से एक दिन में ही पूरा घर बेतरतीब हो गया | भले ही तुम्हारा उद्देश्य सबको खुश करने का हो पर तुमने सबको नाराज़ ही किया | बेहतर होता कि तुम सुबह से जो काम हाथ में लेतीं उसे पूरा करके दूसरा काम शुरू करतीं | जैसे पहले मदिर साफ़ कर रसोई में जाती , वहां खाना बना कर छोटे भाई का गणित का सवाल हल करती फिर सफाई खत्म करके कपडे करती तो न सिर्फ सारे काम पूरे होते बल्कि घर की व्यव्ष्ठ भी सही तरीके से चलती |

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बात राधा को समझ में आ गयी कि हर काम को अधूरा छोड़ने के कारण ही सारी  अव्यवस्था फैली है | दूसरे दिन से राधा ने मीत के हिसाब से काम शुरू किया | अगर किसी ने बीच में किसी और काम के लिए पुकारा भी तो उसने आदर पूर्वक कहा कि पहले मैं ये काम कर लूँ फिर करती हूँ | पूरा काम बहुत व्यवस्थित तरीके से चला | शाम तक सभी लोग राधा की तारीफ़ करने लगे |

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दोस्तों राधा द्वारा बस एक दिन किसी काम को पूरा न करने के कारण घर में कितनी अव्यवस्था फ़ैल गयी | पर हम में से कई लोग जीवन में कई काम शुरू करते हैं पर उसे पूरा न कर के दूसरा काम शुरू कर देते हैं तो जिंदगी में कितनी अव्यवस्था  फ़ैल जाती होगी | ज्यादातर जो लोग सफल हुए हैं उन्होंने किसी काम को बीच में न छोड़ कर उसके काम करने के तरीकों में बदलाव किया है , तब तक किया है जब तक उन्हें सफलता नहीं मिल गयी | अगर आप भी अपने जीवन को व्यवस्थित करना चाहते हैं तो किसी काम को बीच में छोड़े | जीवन में सफलता के लिए राधा की तरह समझदारी अपनाने की जरूरत है |

नीलम गुप्ता

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