जिंदगी दो कदम आगे एक कदम पीछे



जिंदगी दो कदम आगे एक कदम पीछे





जिंदगी के छोटे छोटे
सूत्र कहीं ढूँढने नहीं पड़ते वो हमारे आस
पास ही
होते हैं पर हम उन्हें नज़रअंदाज कर देते हैं
ऐसे ही दो सूत्र मुझे तब मिले जब मैं मिताली के घर गयी | ये सूत्र था …

जिंदगी दो कदम आगे एक कदम पीछे 


मिताली
के दो बच्चे हैं एक क्लास फर्स्ट में और एक क्लास फिफ्थ में
| दोनों
बच्चे ड्राइंग कर रहे थे
| उसकी बेटी सान्या जो छोटी है अपनी आर्ट बुक में डॉट्स जोड़ कर कोई
चित्र बना रही थी
| और बेटा राघव ड्राइंग फ़ाइल में ब्रश से पेंटिंग कर रहा था | जहाँ
बेटी हर मोड़ पर उछल
  रही थी क्योंकि उसे पता नहीं था की क्या बनने वाला
है … 



उसे बस इतना पता था की उसे बनाना है कुछ भी , इसलए
बनाते हुए आनंद ले रही थी
| गा रही थी हँस  रही थी |





बेटा बड़ा
था उसे पता था कि उसे क्या बनाना है
| वो भी
आनंद ले रहा था
| लेकिन जब भी उसे अहसास होता कि कुछ मन का नहीं हो रहा है वो दो तीन कदम
पीछे लौटता दूर से देखता
, सोचता , “ अरे ये रंग तो ठीक नहीं है , इसकी जगह
ये लगा दे
, ये लकीर थोड़ी सीधी  कर दी जाए
,
यहाँ कुछ बदल दिया जाए | फिर जा
कर उसमें रंग भरने लगता 
बच्चे
रंग भरते रहे और मैं जीवन के महत्वपूर्ण सूत्र ले कर घर वापस आ गयी
|


जीवन एक  कैनवास जैसा ही तो है जिसमें हमें रंग भरने हैं
पर इस रंग भरने में इतना तनाव नहीं भर लेना चाहिए कि रंग भरने का मजा ही चला जाए
या बाहर से रंग भरते हुए हम अन्दर से इतने बेरंग होते जाए कि अपने से ही डर लगने
लगे
| चित्र बनाना है उस बच्ची की तरह हँसते हुए , गाते हुए
,हर कदम पर इस कौतुहल के साथ कि देखें आगे क्या बनने वाला
है
 पर
क्योंकि अब हम बड़े हो गए हैं तो दो कदम पीछे हट कर देख सकते हैं
, “ अरे ये
गलती हो गयी
, यहाँ का रंग तो छूट ही गया , यहाँ ये
रंग कर दें तो बेहतर होगा
|


पर क्या हम इस सुविधा का लाभ उठाते हैं ? 


शायद नहीं , आगे आगे और आगे
बढ़ने का दवाब में जल्दी
जल्दी रंग भरने में कई बार हम देख ही नहीं पाते कि एक रंग ने बाकी
रंगों को दबा दिया है
| जीवन भी एक रंग हो गया और सफ़र का आनंद भी नहीं मिला |पीछे हटने में कोई बुराई नहीं है पर मुश्किल ये है कि हम पीछे हट कर देखना
नहीं चाहते हैं
| जो बन गया , जैसा बन गया उसी पर रंग पोतते जाना है |







क्या जरूरी नहीं है हम दो कदम पीछे हट कर उसी समय जिंदगी को सुधार लें | भले ही आप का चित्र सबसे पहले न बन पाए पर यकीनन चित्र उसी का अच्छा बनेगा जो दो कदम आगे एक कदम पीछे में विश्वास रखता है | 
नीलम गुप्ता 


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