विश्वास करें ये काम करता है

                                     

प्रेरक कथा -विश्वास करें ये काम करता है

कल बच्चों का खेल देख रही थी | कुछ ईंटों जैसे ब्लॉक्स थे जो इस प्रकार रखे थे कि एक ईंट हटाते ही उसके आगे की सारी ईंटे एक -एक करके गिरने लगती थीं | जैसे लाल ईंट हटाई तो आगे कि सारी लाल ईंटे एक -एक कर गिरने लगती थीं यही हाल पीली नीली और सफ़ेद ईंटों का भी था | बच्चा बहुत सावधानी से खेल रहा था  क्योंकि एक भी गलत रंग की ईंट गिर गयी तो आगे ढेर सारी गलत ईंटों का गिरना रोका नहीं जा सकता था | थोड़ी देर तक देखने के बाद मुझे लगा ये खेल नहीं जिन्दगी है | कई बार -एक सही या गलत कदम थोड़े समय तक के लिए आगे के रास्ते बिलकुल तय कर देता है …. सारी ईंटे एक ही दिशा में गिरती जाती हैं हम चाह  कर भी रोक नहीं पाते | वो एक सही या गलत ईंट हमारी जिन्दगी की कुछ समय तक के लिए दिशा तय कर देती है | क्या ये सही ईंट गिराना हमारे हाथ में होता है ?कई लोग इसी डर से कि कहीं गलत ईंट ना गिर जाए खेल में प्रवेश ही नहीं करते | बहुत प्रतिभा और क्षमता होते हुए भी किनारे ही खड़े रह जाते हैं | ऐसे समय में बहुत जरूरत होती है किसी ऐसे व्यक्ति कि जो ईंट गिराने को तैयार खिलाड़ी से यह कह दे , ” विश्वास करें , ये काम करता है |” समाज में जितना महत्व सफल व्यक्तियों का है उससे कम महत्व उन व्यक्तियों का नहीं है जो सही ईंट गिराने की प्रेरणा  देते हैं|

बहुत छोटे स्तर पर ही सही पर एक दूसरे को प्रोत्साहन देने की, उनमें विश्वास जगाने की ये कड़ी रुकनी नहीं चाहिए | आज एक ऐसी ही प्रेरक कथा ले कर आयीं हैं नीलम गुप्ता जी …

विश्वास करें ये काम करता है


बहुत समय पहले ही बात है , इक व्यक्ति रेगिस्तान में रास्ता भटक गया |  उसके पास जितना पानी था था खत्म हो गया | प्यास के मारे उसका गला सूख रहा था पर दूर -दूर तक सिर्फ रेत ही रेत दिखाई दे रही थी | तभी दूर उसे एक झोपड़ी नज़र आई | पहले तो उसे लगा कि इस रेतीले इलाके में भला झोपड़ी कैसे होगी , हो न हो ये उसका मति भ्रम है | फिर भी उसके पास उस दिशा में आगे बढ़ने के अतिरिक्त कोई चारा नहीं था | जैसे -तैसे वो अपनी पूरी शक्ति लगा कर आगे बढ़ने लगा | हर कदम पर अगला कदम उठाना मुश्किल हो रहा था | फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी और झोपडी की दिशा में आगे बढ़ गया |

जैसे -जैसे वो पास जा रहा था , झोपडी और साफ़ दिखाई देने लगी थी | अब उसे विश्वास हो गया किवहां झोपडी अवश्य है | उम्मीद जगी कि शायद  वहां कोई रहता हो , जो उसे पीने को पानी दे सके व्उसकी प्यास बुझा सके|
अब वो बची खुची शक्त का इस्तेमाल कर झोपडी की और बढ़ने लगा | झोपड़ी के पास पहुँचने  पर उसने देखा कि झोपडी के बाहर एक हैंड पंप लगा है | ख़ुशी के कारण उसकी चीख निकल गयी | वो जल्दी से जाकर हैंड पंप चलाने लगा …..पर पानी की एक बूँद भी ना निकली | वो और जोर लगाता …. और जोर ,पर पानी था कि निकलने  का नाम ही नहीं ले रहा था | वो पसीने -पसीने हो गया , उसकी रही सही हिम्मत भी जाती रही |

थक हार कर उसने पंप चलाना बंद कर दिया |  उसके शरीर का बहुत सारा पानी पसीने के रूप में निकल चुका था | वो समझ गया कि अब उसका बिना पानी के इस रेगिस्तान से निकलना नामुमकिन है | उसकी आँखें भर आयीं | निराशा में उसने झोपडी केव अंदर कुछ देर विश्राम करने का मन बनाया | वो दुखी मन से जब झोपडी के अंदर गया तो उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं  रहा , क्योंकि  वहां किसी ने एक हुक से एक बोतल लटका रखी थी जिसमें पानी भरा हुआ था | बोतल में कॉर्क लगी हुई थी | व्यक्ति की जान में जान आई | इतना पानी पी कर कम से कम वो कुछ दूर जा सकता था | आगे शायद और पानी मिल जाए , ये उम्मीद तो थी ही |

उसने झटके से बोतल हुक से निकाल ली | वो पानी पीने ही वाला था कि उसे बोतल पर एक स्लिप दिखाई दी | जिसमें लिखा था ,” इस पानी को हैण्ड पम्प के ऊपरी छेद में डाल दें और जाते समय ये बोतल भर कर यहाँ ऐसे ही लटका दें |

नोट पढ़कर व्यक्ति घबरा गया | अगर उसने ये पानी भी छोड़ दिया तो उसकी मृत्यु निश्चित है | अगर उसने ये पानी पम्प में डाला और पम्प चल गया तो ना सिर्फ वो पेट भर पानी पी पायेगा बल्कि आगे के रास्ते के लिए भर भी पायेगा | व्यक्ति असमंजस में पड़ गया | क्या करें क्या ना करे | एक तरफ निश्चित मृत्यु दिखाई दे रही थी …. एक तरफ जीवन की सम्भावना थी |

बहुत देर तक अपने विचारों में जूझने के बाद उसने पानी पम्प में डालने का फैसला किया | पानी डालने के बाद उसने पम्प चलाया | पम्प से मोटी धार पानी की गिरने लगी | उसने ढेर सारा पानी पिया ,  आगे के सफ़र के लिए पानी अपने पास रखा , उस बोतल में पानी भरा और जब अन्दर बोतल को उसे हुक पर लटकाने आया तो उसे हुक के पास एक नोट दिखाई दिया | उसने गौर से देखा उस नोट में रेगिस्तान से बाहर निकलने का रास्ता दिया हुआ था | 

व्यक्ति ने बोतल की कॉर्क बंद करके उसेवैसे ही लटका दिया | वो झोपडी से बाहर निकलने जाने लगा , तभी ठिठका और बोतल उतार कर उस पर चिपके कागज़ के ऊपर उसने उस नोट के आगे लिखने शुरू किया , ” मेरा विश्वास करें ये काम करता है |” उसके नीचे उसने अपने दस्तखत कर दिए . और आगे के सफर पर चल पड़ा |

मित्रों बोतल पर नोट तो पहले ही लिखा था पर जिस घबराहट व् भय से वो गुज़रा था , उससे किसी को दुबारा ना गुज़ारना पड़े इसके लिए उसने आगे नोट लिखा था ताकी मदद का ये सिलसिला टूटे नहीं | कई बार एक छोटा सा विश्वास इंसान से असंभव कार्य करवा देता है | हम सब किसी के अन्दर ये विश्वास भर सकें … ताकि मानवता की ये कड़ी टूटे नहीं |

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