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अग्नि – पथ

अग्नि - पथ



        
हम ऐसे समज में जीने के लिए अभिशप्त हैं जहाँ रिश्ते -नाते अपनत्व पीछे छूटते जा रहे हैं | इंसान में  जो चीज सबसे पहले खत्म हो  रही है वो है इंसानियत | इंसान बर्बर होता जा रहा है | आये दिन अखबारों के पन्ने ऐसी  ही दर्दनाक खबरों से से भरे रहते हैं …जहाँ मानवता शर्मसार हो |ऐसे में कवि ह्रदय का व्याकुल होना स्वाभाविक है | ये कविता एक ऐसी ही घटना से व्याकुल हो कर लिखी गयी है जिसमें फरक्का एक्सप्रेस में एक महिला से उसका बच्चा छीन कर बाहर फेंक दिया गया | माँ की व्यथा का अंदाजा लगाया जा सकता है | ये कविता गिरते मानव मूल्यों के प्रति जागरूक कर रही है ….

अग्नि – पथ



वक्त यह ,सोचें-विचारें
बढ़ रही क्यों दूरियाँ?
चल पड़े हैं अग्नि-पथ पर
कौन सी मजबूरियाँ?

करुणा से दूरी बनाई
प्रेम-घट खाली किया
पोंछेगा किसके तू आँसू?
बन के बर्बर जो जिया

बढ़ती जाएँ दूरियाँ
कुटुम्ब और समाज से
पाठ जिनसे पढ़ते थे हम
नेह, प्रीति ,उजास के

बिखरते परिवार
रिश्ते टूटते अपनत्व के
अब सबक़ किससे पढ़ें ?
सहिष्णुता , समत्व के




उषा अवस्थी



                                  

लेखिका -उषा अवस्थी



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filed under-Hindi poetry, poem, agani-path, human relations, crime
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जिस तरह एक स्वस्थ रिश्ते की नींव आपसी विश्वास और समझदारी पर टिकी होती है, उसी तरह परिवार की आर्थिक सेहत के लिए भी सूचित और सतर्क फ़ैसले ज़रूरी हैं। डिजिटल युग में नए-नए वित्तीय विकल्प लगातार उभर रहे हैं, और जो लोग इनकी बारीकियों को समझना चाहते हैं, वे अक्सर bitcoin sázení जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी पढ़ते हैं। हालाँकि, यह कभी न भूलें कि सट्टेबाज़ी में हमेशा जोखिम शामिल होता है और इसे कभी भी आय या पैसा कमाने के भरोसेमंद साधन के रूप में नहीं देखना चाहिए — बेहतर यही है कि ऐसे विकल्पों में केवल उतना ही शामिल हों, जितना आप खोने का खर्च उठा सकते हैं, और ज़रूरत पड़ने पर किसी जानकार से सलाह ज़रूर लें।