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चोंगे को निमंत्रण

चोंगे को निमंत्रण

चोंगा बाहरी चमक -दमक आकर्षित तो करती है, परन्तु इंसान की  असली पहचान  उसके गुण उसके संस्कार या उसका ज्ञान होता है | जो चमक -धमक् में उलझा रहता है , उसके लिए ज्ञान का मार्ग कठिन हैं

Motivational Hindi story -chonge ko nimntran 

 बहुत समय पहले की बात है एक झेंन गुरु थे | वो भिक्षा मांग कर भोजन करते व् सादा जीवन जीते थे | शाम को अक्सर वो अपने आश्रम के पास प्रवचन दिया करते थे | कुछ लोग उन्हें सुनने आते , और उनसे प्रभावित होते | धीरे -धीरे उनके प्रवचनों की चर्चा शहर में होने लगी |

 शहर में एक व्यापारी था , उसे लोगों से उस गुरु के बारे में जानकारी मिलती रहती थी | उसकी पत्नी को भी लोग उनके प्रवचन के बारे में बताते |  उसकी पत्नी की गुरु के पास जाने की इच्छा हुई | उसने अपनी इच्छा अपने पति को बताई | पति ने कहा , ” मैंने भी उनके बारे में सुना है मैं भी उनके विचार पसंद करता हूँ , ऐसा करते हैं मैं वहाँ  जा कर अगली एकादशी को उनको भोजन के लिए आमंत्रित कर लेता हूँ | वो यहाँ  आयेंगे , तब तुम इत्मिनान से उनके प्रवचन सुन लेना | पत्नी राजी हो गयी |

व्यापारी गुरु के आश्रम में गया | उसने प्रवचन सुनने के बाद गुरु के पास जाकर १० दिन बाद एकादशी पर अपने घर भोजन का आमंत्रण दिया | गुरु जी ने उसका आमंत्रण स्वीकार कर लिया | घर आ कर उसने नगर के कई खास लोगों को आमंत्रित किया कि   एकादशी के दिन मेरे घर में झेन गुरु आ रहे हैं आप भी आइयेगा | उनका प्रवचन सुनेगे व् भोजन करेंगे |

एकादशी के दिन उसने आने घर को अच्छे से सजाया | बाहर प्रवचन के लिए पंडाल लगवाया , तरह -तरह के सुस्वादु भोजन तैयार करवाए |

झेंन  गुरु तो ठहरे योगी , वो अपने भिक्षा मांगने वाले कपड़ों में ही वहां पहुँच गए |  व्यापारी उन्हें पहचान नहीं पाया | उसने उनकी बेईज्ज़ती करके बाहर भगा दिया |

झेन गुरु अपने आश्रम गए | उन्होंने राजा द्वारा भेंट किया हुआ कीमती चोंगा पहना | चोंगा बहुत ही आकर्षक था | उसमें सोने की जरी का काम व् बेशकीमती मोती लगे थे | जब वो चोंगा पहन कर गुरु व्यापारी के घर पहुंचे तो व्यापारी ने उन्हें बहुत आदर से अन्दर बुलाया व् भोजन करने का आग्रह किया | उसी समय झेंन गुरु ने अपना चोंगा उतार कर पाटे पर रख दिया और कहा , ” अब ये चोंगा भोजन करेगा | व्यापारी सकते में आ कर पूंछने लगा , ” क्यों महाराज “?

झेंन गुरु ने उत्तर दिया , ” तुमने इसे ही आमंत्रित किया था | अब ये ही भोजन करेगा | “

                         सारी  घटना जानने के बाद व्यापारी को बहुत पश्चाताप हुआ और उसने गुरु से माफ़ी मांगी |

उस दिन झेन गुरु ने प्रवचन देते हुए कहा ,” जो सिर्फ वस्त्रों में अटका है वो मनुष्य को नहीं देख सकता , जो इरफ शरीर में अटका है वो आत्मा को नहीं देख सकता , वस्त्र और शरीर दोनों चोंगे उतार दो तब ज्ञान के पात्र बनोगे |

अटूट बंधन परिवार

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