काव्य जगत
डायरियाँ – कविता ( वंदना बाजपेयी )
डायरियाँ जब -जब मैं दर्द और वेदना से भर उठी मेरी आह और कराह ढल गयी शब्दों में और किसी …
हाय रे ! प्याज ……. वंदना बाजपेयी
हैलो भईया। हाल ना पूछो मेरा भईया कैसे तुम्हें बताऊँ सब्जी मंडी में खड़ी हुई हूँ चक्कर खा गिर ना …
स्वतंत्रता दिवस पर विशेष : मैं स्वप्न देखता हूँ एक ऐसे स्वराज्य के
swatantrta divas par vishesh kavita / main swpn dekhta hoon ek aise swarajy ke मैं स्वप्न देखता हूँ एक ऐसे …
“एक दिन पिता के नाम “……कवितायें ही कवितायें
अटूट बंधन परिवार द्वारा आयोजित “एक दिन पिता के नाम ‘श्रंखला में आप सब ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया …
आयुष झा “आस्तीक ” की स्त्री विषयक कवितायें
आयुष झा “आस्तीक ” ने अल्प समय में कवितों के माध्यम से अपनी पहचान बना ली है | वह विविध …
अशोक कुमार जी कि कविताओं में एक तड़प है ,एक बैचैनी है जैसे कुछ खोज रहे हो … वस्तुत …
मायके आई हुई बेटियाँ
मायके आई हुई बेटियाँ , फिर से अपने बचपन में लौट आती है , और जाते समय आँचल के छोर …
गिरीश चन्द्र पाण्डेय “प्रतीक” की कवितायें
अब रेखाएं नहीं अब तो सत्ता तक पहुचने का कुमार्ग बन चुकी हैं हर पाँच साल बाद फिर रँग दिया …