वंदना बाजपेयी
मिसेज़ चटर्जी वर्सस नॉर्वे और लीड्स में हुई हिंसा
लंदन से प्रकाशित पुरवाई के संपादकीय कई मुद्दों पर सोचने को विवश कर देते हैं। ‘प्रवासी हिंसा और दंगे” ऐसा ही संपादकीय है जिसने मुझे उसपर लिखने को विवश कर दिया l आदरणीय तेजेंद्र शर्मा जी अपने संपादकीय में लिखते हैं कि, “ब्रिटेन में ऐसे बहुत से इलाक़े हैं जिनमें एक ख़ास किस्म के प्रवासी … Read more
कथारंग कहानी प्रतियोगिता 2023 वंदना बाजपेयी ने जलाई जीत की ज्योति
“कथा रंग कहानी प्रतियोगिता परिणाम -2023” के सभी पुरस्कृत रचनाकारों को कथा रंग परिवार, ग़ाज़ियाबाद की ओर से हार्दिक मंगलकामनाएं और निर्णायक मंडल का आभार व्यक्त करते हुए आलोक यात्री ने कहा कि कहानियों की श्रेष्ठता का चयन निसंदेह एक मुश्किल कार्य था, लेकिन चयनकर्ताओं के अथक परिश्रम के बाद इस दुरूह कार्य को अंजाम … Read more
कलर ऑफ लव – प्रेम की अनूठी दास्तान
प्रेम जो किसी पत्थर हृदय को पानी में बदल सकता है, तपती रेत में फूल खिला सकता है, आसमान से तारे तोड़ के ला सकता है तो क्या किसी मासूम बच्चे में उसकी उच्चतम संभावनाओं को विकसित नहीं कर सकता | क्या माँ और बच्चे का प्रेम जो संसार का सबसे शुद्ध, पवित्र, निश्चल … Read more
लापता लेडीज- पहचान गुम हो जाने से लेकर अस्तित्व को खोजती महिलाएँ
हालांकि मैं फिल्मों पर नहीं लिखती हूँ, पर बहुत दिनों बाद ऐसी फिल्म देखी जिस पर बात करने का मन हुआ l लापता लेडीज ऐसी ही फिल्म है, जिसमें इतनी सादगी से, इतने करीने से, एक ‘स्त्री जीवन से जुड़े” महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया जा सकता है, ये फिल्म देखकर पता चलता है l … Read more
काव्य कथा – वो लड़की थी कुछ किताबी सी
काव्य कथा, कविता की एक विधा है, जिसमें किसी कहानी को कविता में कहा जाता हैं l काव्य कथा – वो लड़की थी कुछ किताबी सी में गुड्डो एक किताबी सी लड़की है , जिसे दुनिया की अच्छाई पर विश्वास है l उसकी दुनिया सतरंगी पर उसके प्रेमी को उसके सपने टूट जाने का डर … Read more
कोई शॉर्टकट नहीं दीर्घकालीन साधना है बाल साहित्य लेखन -भगवती प्रसाद द्विवेदी
यूँ तो साहित्य लेखन ही जिम्मेदारी का काम है पर बाल साहित्य के कंधे पर यह जिम्मेदारी कहीं ज्यादा महती है क्योंकि यहाँ पाठक वर्ग एक कच्ची स्लेट की तरह है, उसके मन पर जो अंकित कर दिया जाएगा उसकी छाप से वो जीवन भर मुक्त नहीं हो सकता l आज इंटरनेट पीढ़ी में … Read more
वंदना बाजपेयी की कविता -हमारे प्रेम का अबोला दौर
आजकल हमारी बातचीत बंद है, यानि ये हमारे प्रेम का अबोला दौर है l अब गृहस्थी के सौ झंझटों के बीच बात क्या थी, याद नहीं पर इतना जरूर है कि कोई बड़ी बात रही होगी जो उस बात के बाद नहीं मन हुआ बात करने का और हमारे मध्य शुरू हो गया “कन्डीशंड … Read more
कानपुर के अमर शहीद -शालिग्राम शुक्ल
“ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आँख में भर पानी, जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी” जब-जब भारत रत्न लता मंगेशकर जी का यह गीत हमारे कानों में पड़ता है, हम में से कौन होगा, जिसकी आँखों से भावों का दरिया ना बरस पड़ा हो | ये आजादी जिसका जश्न हम हर … Read more
बेगम हज़रत महल- एक निम्नवर्ग में जन्मी लड़की से बेगम हज़रत महल बनने तक की संघर्षमय गाथा
1857 का संग्राम याद आते ही लखनऊ यानी की अवध की बेगम हज़रत महल के योगदान को कौन भूल सकता है l खासकर तब जब आजादी के अमृत महोत्सव मना रहा देश अपने देश पर जाँ निसार करने वाले वीरों को इतिहास के पीले पन्नों से निकाल कर फिर से उसे समकाल और आज … Read more