देव कित्ता बरसियो अभी ? ( बालकनी की तरफ
देखते हुए ) अरे ! ईमा तो पानी भरन लाग |
रिया अरी ओ रिया तनिक बाल्टी लाओ थोडा उलीचे |
आपन नल बंद करन भूल गए | बरसा ही जा रहा
है ,बरसा ही जा रहा है ,रुकन का नाम ही नाही लेत
है | आप तो कैलाश में बैठ हो इहाँ तो
हमार छज्जा भरन लाग | ई बड़े –बड़े
शहरन में बालकनी के नाम पर छोटा सा छज्जा
ही तो दे देत हैं ऊमा भी नाली नाही बनावत
हैं , ये भी नाही सोचत हैं बरसात का पानी कैसे निकालिए | और उहाँ गाँवो में तो बड़े बड़े चबूतरे रहे पर का
उजाड़ पड़े हैं | लड़का को तो पेट की खातिर शहर में रहे के परी | ( गाँव की याद करते
हुए दादी थोडा दुखी हो जाती हैं )|
देखते हुए ) अरी ई सुबह –सुबह तैयार काहे को हो | ( दरवाजे की तरफ देखते हुए ) अरे
ई बहु भी तैयार है | कहाँ जाय रही हो ऐसी बरखा –पानी में ?
उसे आन लाइन सोशल साइट्स पर शेयर करेंगी | ये एक अभियान का
हिस्सा है जिसका नाम है “सेल्फी विद डॉटर “
की है “कि मैं एक बेटी की माँ हूँ | बेटी को जन्म देकर कोई अपराध नहीं किया है |
जैसा की समाज समझाता रहता है ……कहता रहता है “ बेचारी “
बिटिया पराया धन |
दी जाती हैं | बेटियों को जन्म लेने का अधिकार भी नहीं दिया जाता है | लड़की को
जन्म देना कोई दोष नहीं है |आपके समय में
भी तो दादी लड़कियों के जन्म लेने के बाद दुध् मुँही बच्ची को आटा घोर कर पिला देते थे ,और बच्ची मर जाती थी | कोई
माँ क्रूर हो कर अपनी ही बेटी की हत्या
इसलिए करती है क्योंकि उस पर समाज का दवाब है | बेटी को जन्म देने वाली माँ को
नीची दृष्टि से देखा जाता है |
,आपकी सेवा करती हैं तब कहाँ पराई रह जाती हैं | और मैं मैं भी तो लड़की हूँ दादी
,कल को नौकरी करुँगी ,अपने ,अपने माता –पिता का सहारा बनूँगी | आज आई .ए .एस की परीक्षा को एक लड़की ने टॉप किया है
| समान अवसर मिलने पर लडकियाँ ,लड़कों से कम नहीं हैं | फिर भी लड़कियों को जन्म लेने से रोका जा रहा है |
,क्योंकि बुराई समाज में गहरे पैठी है |
अभी कल की ही बात बताऊ एक महिला अपनी तीन –तीन बेटियों के साथ मेट्रों में
जा रही थी | मेरे बगल में खड़ी औरत उसे देख कर बुदबुदाई “ उफ़ तीन –तीन बेटियाँ
,बेचारी !
जन्म देने का साहस किया था | पर वो समाज की नज़र में बेचारी है और ताउम्र रहेगी |
दादी समाज में गहरे पैठ बना चुकी मान्यताएं एकाएक नहीं बदलती | कानून अपना काम
करता है पर इस तरह के सुधार आन्दोलनों की भी जरूरत है | धीरे –धीरे ही सही पर समाज
बदलेगा | इसी अभियान की एक शुरुआत है “सेल्फी विद डॉटर “ गर्व करो कि आप एक बेटी
की माँ हैं |
सेल्फी विद डॉटर ‘
दादी |