लगा रहा है कक्षा
देना है आज हमें
धैर्य की परीक्षा
सोलह श्रॄंगार कर
दूंगी मैं तुझे अर्घ्य
मेरी माँग पूरी कर
प्रेम का साक्षी बन
बड़ी हठी हैं हम
तोड़ूंगी नहीं प्रण
तू आराध्य रहे
परीक्षा में पास कर
हे चंदा पाप हर
अटल रहे सुहाग हमारा
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सुनो प्रार्थना चांद गगन के
रूप तेरा नभ में यूं चमके
बिखरे चांदनी छटा धरा पर
माँग सिंदूर सदा ही दमके
पूजन करे संसार तुम्हारा
अटल रहे………………….
दिया जलाई नित्य नेह की
अर्घ्य चढ़ाऊंगी मैं तुझको
करो कामना पूरी मन की
जग में हो तेरा जयकारा
अटल रहे………………….
सदा सुहागन मैं कहलाऊँ
सोलह श्रृंगार कर मांग भरे पिया
जब मैं इस दुनियां से जाऊँ
पुष्प बरसाए सितारा
अटल रहे…………………
शीत तपन को मैं सही हूँ
चन्द्र दया कर उगो शीघ्र नभ
क्षमा करना यदि गलत कही हूँ
मेरा पति है तुझसे प्यारा
अटल रहे…………………
