मेरा मशवरा है यही की तोड़ दो उसे
जिस आईने में ऐब अपने दिखाई न दें
कहती है मेरे साथ कब्र में भी जायेगी
इतना प्यार करती है मुझसे तन्हाई मेरी
शिकवे , गिले और साजिशों का , दौर जिंदगी |
न ये तेरी , न ये मेरी , हैं बस , खेल जिंदगी |
वो अपने फायदे की खातिर फिर आ मिले थे हमसे;
हम नादाँ समझे कि हमारी दुआओं में असर बहुत है!
सांसों के सिलसिले को न दो जिंदगी का नाम
जीने के बावजूद भी मर जाते हैं कुछ लोग
ये भी एक दुआ है खुदा से,
किसी का दिल न दुखी मेरी वज़ह से,
हर बात का इजहार जरूरी नहीं लब से….