स्वागत है ऋतुराज

स्वागत है ऋतुराज


                     वसंत ऋतू की शोभा अनुपम है .. इसी लिए इसे ऋतुराज भी कहा जाता है | चरों ओर खिली हुई सरसों जब प्रकृति का श्रृंगार करती है तो क्यों न मन भी वसंती हो जाए | वसंत ऋतू में वासंती हुए मन में निखर ही जाता है प्रीत का रंग | 

आइये करें ऋतुराज का स्वागत 

                                 आइये हम वसंत ऋतू का स्वागत कुछ  कविताओं के साथ करें …


“वसंत ऋतु “

फिर पद चाप
 सुनाई पड़ रहे
 वसंत ऋतु के आगमन के
 जब वसुंधरा
बदलेगी स्वेत साडी
करेगी श्रृंगार
उल्लसित वातावरण में
झूमने लगेंगे
मदन -रति
और अखिल विश्व
करने लगेगा
मादक नृत्य
सजने लगेंगे बाजार
अस्तित्व में आयेगे
अदृश्य तराजू
जो फिर से
तोलने लगेंगे
प्रेम जैसे
विराट शब्द को
उपहारों में
अधिकार भाव में
आकर्षण में
भोग -विलास में
और विश्व रहेगा
अतृप्त का अतृप्त
फिर सिसकेगी
प्रेम की
असली परिभाषा
क्योकि
जिसने उसे जान लिया
उसके लिए
हर मौसम
वसंत का है
जिसने नहीं जाना
उसके लिए
चार दिन के
वसंत में भी क्या है ?






आइये ऋतुराज 



आगमन हो रहा है
वसंत का
कर लिया है
प्रकृति ने श्रृगार
आरंभ हो गया है
मदन -रति का
नृत्य
मैंने भी
 निकाल लिए है
कुछ सूखे
लाल गुलाब
जो तुम्हारे
स्पर्श से
पुनः खिल जायेगे
वो पुरानी बिंदिया
जो तुम्हारी
दृष्टि पड़ते ही
सुनहरी हो जायेगी
और सिल ली है
वो पायल
जिसकी
छन -छन
सीधे तुम्हारे
ह्रदय में जायेगी
हर वसंत
की तरह
इस बार भी
पुनः और दृढ
हो जायेगा
हमारे रिश्ते का वृक्ष
जिसे वर्ष भर
असंख्य जिम्मेदारियों
और व्यस्तताओ के बीच
धीरे -धीरे ,चुपके -चुपके
सींच रहे थे
हम -तुम
“स्वागत है ऋतुराज”

लाल गुलाब



आज यूं ही प्रेम का
उत्सव मनाते
लोगों में
लाल गुलाबों के
आदान-प्रदान के बीच
मैं गिन रही हूँ
वो हज़ारों अदृश्य
लाल गुलाब
जो तुमने मुझे दिए




तब जब मेरे बीमार पड़ने पर
मुझे आराम करने की
हिदायत देकर
रसोई में आंटे की
लोइयों से जूझते हुए
रोटी जैसा कुछ बनाने की
असफल कोशिश करते हो

तब जब मेरी किसी व्यथा को
दूर ना कर पाने की
विवशता में
अपनी डबडबाई आँखों को
गड़ा देते हो
अखबार के पन्नो में

तब जब तुम
“मेरा-परिवार ” और “तुम्हारा-परिवार”
के स्थान पर
हमेशा कहते हो “हमारा-परिवार”
और सबसे ज़यादा
जब तुम झेल जाते हो
मेरी नाराज़गी भी
और मुस्कुरा कर कहते हो
“आज ज़यादा थक गई हैं मेरी मैडम क्यूरी “

नहीं , मुझे कभी नहीं चाहिए
डाली से टूटा लाल गुलाब
क्योंकि मेरा
लाल गुलाब सुरक्षित है
तुम्हारे हिर्दय में
तो ताज़ा होता रहता है
हर धड़कन के साथ।

वंदना बाजपेयी

यह भी पढ़ें ………
वाणी वंदना


मायके आई हुई बेटियाँ


काहे को ब्याही ओ बाबुल मेरे


बाबुल मोरा नैहर छूटो ही जाए

आपको  कविता  ..स्वागत है ऋतुराज  कैसी लगी   | अपनी राय अवश्य व्यक्त करें | हमारा फेसबुक पेज लाइक करें | अगर आपको “अटूट बंधन “ की रचनाएँ पसंद आती हैं तो कृपया हमारा  फ्री इ मेल लैटर सबस्क्राइब कराये ताकि हम “अटूट बंधन”की लेटेस्ट  पोस्ट सीधे आपके इ मेल पर भेज सकें 
Share on Social Media
error:
WordPress Repository Meritking Giriş: Meritking Giriş Adresi Marsbahis Giriş: Marsbahis Güvenilir Mi Mavibet Giriş: Mavibet Para Yatırma Ve Çekme İşlemleri कुल्हड़ भर इश्क -बनारसी प्रेम कथा नव वर्ष यानी आपके हाथ में हैं नए 365 दिन माउथ ऑर्गन –किस्सों के आरोह-अवरोह की मधुर धुन WooCommerce Products Compare WooCommerce Product Featured Video Content Plugin Flickomatic Automatic Post Generator and Flickr Auto Poster Plugin for WordPress Voxey – Amazon Polly Text-to-Speech Plugin for WordPress WooCommerce Product Category Image Addon For Elementor Sharinger – Share Buttons for Elementor Perfex CRM Chat & Tickets App for Support Board eClass – Learning Management System Social Events for Videos Add-on for Easy Social Share Buttons Simple Video Player svPlayer Plugin For WpBakery and Elementor Builder