इस बार दिवाली पर चीन निर्मित उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। टीवी पर
खबरों में लोग इन उत्पादों का बहिष्कार करके देशभक्ति निभाने की कसमें खा रहे थे।
इस विषय पर पड़ोसी दोस्तों के साथ एक गर्मागर्म चर्चा के बाद मैं भी अपनी बेटी के
साथ दिवाली की खरीदारी करने चल दिया था।
ये भी ले लो!!”-बेटी ने एक दुकान पर कई चीजें पसंद आ गई थीं।
भाई ये सब सामान?”
करीब हो जाएगा।”-दुकानदार ने हिसाब लगाकर बताया।
वेरायटी का सामान नहीं है क्या तुम्हारे पास…..?”
सामान मिल जाएगा।”- दुकानदार की अनुभवी आँखों ने मेरे चेहरे के भाव पढते हुए
पर्दे के पीछे बनी दुकान में जाने का इशारा कर दिया।
आइटम हैं!!! सरकार ने इसको बैन कर रखा है ना…?”
सबकी फीस उन तक पहुँच चुकी है।”
खरीदारी मजबूरी थी इसलिए बिना कोई बहस किये अंदर चला गया।
देशभक्ति की कसमें खाने वाले दोस्तों की मंडली पहले से ही वहाँ मौजूद थी। सभी की
नजरें आपस में मिली तो चहरों पर एक खिसियानी मुस्कुराहट दौड़ गई। सभी के मुँह से
एक साथ निकला– “यार, हम तो सिर्फ देखने आए थे।”

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