लघुकथा में लोक मांगलिक चेतना होना जरूरी है ।-सूर्यकांत नागर

 डॉक्टर रमेश चंद्र की लघुकथाएं सादगी से भरी हुई है। जैसा उनका सहज जीवन है, वैसी ही उनकी लघुकथाएं हैं ।उनका जीवन उनकी लघुकथाओं में प्रतिबिंबित होता है। उनकी लघुकथाएं जनपक्षधर हैं ,और लघुकथा में लोक मांगलिक चेतना होना जरूरी है। उसी से जन जागृति आती है। यह बात वरिष्ठ कथाकार सूर्यकांत नागर ने ‘क्षितिज’ संस्था द्वारा आयोजित डॉक्टर रमेश चंद्र के लघुकथा संग्रह ‘ मौत में जिंदगी ‘ के लोकार्पण प्रसंग पर, अपने अध्यक्षीय उदबोधन में कहीं। उन्होंने यह भी कहा कि, लघुकथा को किसी नियमावली में नहीं बांधा जा सकता। शिल्प के स्तर पर निरंतर प्रयोग हो रहे हैं, और प्रयोग से ही प्रगति होती है।
 कार्यक्रम के अतिथि के रुप में खंडवा से पधारे कवि डॉक्टर प्रताप राव कदम ने पुस्तक की लघुकथाओं के शिल्प की तारीफ की, और कुछ महत्वपूर्ण लघुकथाओं का ज़िक्र भी किया । डॉक्टर पुरुषोत्तम दुबे ने कहा कि, इन लघुकथाओं में प्रतिकात्मक स्तर पर कई बातें कही गई हैं, और पौराणिक व्यंजनाओं का सशक्त इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने’ कबीर का फाइव स्टार होटल ‘ लघुकथा की विवेचना की। डॉक्टर योगेंद्रनाथ शुक्ल ने पुस्तक पर चर्चा करने के साथ ही उन साहित्यिक षड्यंत्रों का जिक्र किया, जो प्रेमचंद को साहित्य से खारिज करने की बात करते हैं ।
उन्होंने कहा कि आज के लेखकों ने अपनी लाइन बड़ी करने के लिए इतिहास के साथ छेड़छाड़ नहीं करना चाहिए। पुस्तक पर समीक्षा आलेख में कवि ब्रजेश कानूनगो ने कहा कि, रमेश जी सचमुच मानवीय रिश्तो और मानवीय प्रवृतियों से संवेदित होकर सरल रुप से अपनी अनुभूतियों को लघुकथा का स्वरूप देते हैं। उन्होंने कहा कि लेखक एक व्यंग्यकार भी है और जब एक व्यंग्य दृष्टि सम्पन्न लेखक किसी अन्य विधा में अपनी बात कहता है तो वहां भी व्यंग्य के उपस्थित होने की अपेक्षा पाठक को हो जाती है।
श्रीमती ज्योति जैन ने लघुकथाओं को सांकेतिक बताते हुए कहा कि, वह कम शब्दों में पुरअसर तरीके से अपनी बात कहती है ।उनकी दो रुपए तथा पेड़ औऱ मनुष्य लघुकथाओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि इनमें सांकेतिक माध्यमों का उपयोग किया गया है। डॉ रमेशचंद्र ने अपनी लघुकथाओं का वाचन किया एवम अध्यक्ष के हाथों पुस्तक का लोकार्पण करवाया।
कार्यक्रम का संचालन क्षितिज के अध्यक्ष एवम कथाकार सतीश राठी ने किया और आभार सुरेश बजाज ने माना।
 कार्यक्रम में सर्वश्री राकेश शर्मा संपादक वीणा, सुरेश उपाध्याय, प्रदीप मिश्र, रजनी रमण शर्मा, हरेराम वाजपेई ,तीरथ सिंह खरबंदा, अशोक शर्मा ,कविता वर्मा ,अश्विनी कुमार दुबे अंतरा करवड़े आदि कई साहित्यकार उपस्थित थे । उज्जैन से साहित्य मंथन संस्था के साहित्यकार रमेश चन्द्र शर्मा एवं मित्रगण भी इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आए थे।
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