क्या आप को पता है की असफलता भी हमें सिखाती है | सफलता का एक महत्वपूर्ण
सूत्र है असफल व्यक्तियों से या अपनी असफलता से सीखना |
जी हाँ , जिंदगी के पाठ्य क्रम में सफलता व् असफलता दोनों ही शिक्षक हैं | जहाँ
जरूरी है सफल ही नहीं असफलता या असफल व्यक्तियों से सफल होने के तरीके सीखना | आप
भी आश्चर्य में पड़ गए होंगे |
दूसरा पकड़ कर हिलाया है | आपने महसूस किया होगा रस्सी में एक तरंग चलने लगती है | ऊपर
नीचे , ऊपर नीचे | हमारी जिंदगी भी बिलकुल ऐसी ही हैं | कभी सफलता के शिखर कभी
विफलता के गर्त |अंतर केवल इतना है की असली जीवन में जो लोग एक बार गर्त में आते
ही प्रयास छोड़ देते हैं वो असफल कहलाते हैं | जो गर्त में जा कर फिर से उठने का
प्रयास करते हैं वो सफल कहलाते हैं | वही रस्सी के दूसरे छोर या सफलता के शिखर तक
पहुँच पाते हैं | इसके लिए असफल होने पर निराश न होकर अपनी असफलताओं से सीख लेनी
पड़ती है |
कैसे सीखें असफलता से
एक अति सफल जानकार के पास सफलता के गुर सीखने गया | जाते ही उसने प्रश्न किया | आप
सफलता के गुर सिखाइए | सफल मित्र ने कहा ,” मैं क्या सिखाऊ , मैं तो खुद सीखता हूँ
| आप किससे सीखते हैं , रोहित ने उत्साह से
पूंछा | असफल व्यक्तियों से , सफल व्यक्ति ने सीधा सादा उत्तर दिया | वो कैसे ? रोहित ने आश्चर्य से
पूंछा | सफल व्यक्ति बोला , “ खैर ! वो बाद में पहले तुम मुझे ये बताओ की तुम असफल
कैसे हुए | रोहित बोला , “ मैं बहुत जल्दी सफलता पाना चाहता था | मैंने एक कम्पनी
खोली वो ठीक से जम भी न पायी की दूसरी खोल दी
| अब पहली में घाटा होने लगा | तो
उसे पूरा करने के लिए मैंने अपने सारे पैसे लगा कर तीसरी कम्पनी खोल ली | ताकि
उसकी कमाई से दोनो का घाटा पूरा कर सकूँ |
पर हुआ उल्टा | काम के अत्यधिक दवाब के चलते एक –एक कर के मेरी तीनों कम्पनियां
बिक गयी | और मैं सड़क पर आ गया | मैं कर्जे में डूबा हुआ हूँ |
बातें सीखी | जिन्हें तुम सफलता के सूत्र भी कह सकते हो |
पहला जब तक एक काम ठीक से न जम जाए दूसरे में हाथ न डालो |दूसरी बात कभी अपना सारा पैसा कम्पनी में न लगा दो ताकि घाटे की स्तिथि में दिवालिया होने
की नौबत न आये |
आप भी सीख सकते हैं असफलता से
सकते हैं की क्या नहीं करना चाहिए | फलाना व्यक्ति ने ऐसा क्या किया जिससे वो असफल
हुआ |
हम असफल होते हैं तो इस बात को स्वीकार नहीं कर पाते की हम से कुछ गलती हुई है |
इस कारण हम दूसरों पर दोष लगाने लगते हैं |
दोस्त उस समय पैसे देने से मुकर गया | या फलां व्यक्ति को परखने में मुझसे भूल हो
गयी | अगर कोई भी कारण नहीं मिलता है तो हम भाग्य को दोष देने लगते हैं | अरे ,
मेरा तो भाग्य ही खराब है | मैं कुछ भी करूँ काम बनता ही नहीं है | पर अगर आप अपने
अहंकार को जरा हटा कर सोंचेंगे तो आपको
अपनी कमियाँ स्वीकारने का साहस आएगा |
- मैंने पढाई नहीं की इसलिए नंबर कम आये
- टीचर के फेवरेटिज्म नहीं मेरे नम्बर मेरे दोस्त से कम इसलिए आये क्योंकि इस सा
उत्तर देने के बावजूद मैं स्पेलिंग मिस्टेक ज्यादा की थीं | - मेरी दोस्त मुझसे ज्यादा टेलेंटेड हैं | उससे प्रतिस्पर्द्धा करने के लिए मुझे
ज्यादा समय सीखने में लगाना होगा - अगर मैं ऑफिस में प्रमोशन नहीं पा रहा
हूँ | जबकि मैं काम सबसे बेहतर करता हूँ तो हो सकता है मैं अपने काम को ठीक से
रीप्रेजेंट नहीं कर पा रहा हूँ | - अगर फलां व्यक्ति जिसे मैंने नौकरी पर लगाया था | ठीक से काम नहीं कर रहा तो
भी मेरी गलती है | क्योंकि मैं योग्य व्यक्ति का चयन करने में असफल हो गया | - अगर मेरी टीम योग्य होते हुए भी सही काम नहीं कर पा रही है तो जरूरी मुझसे टीम कोलीद करने में कुछ गलतियाँ हुई होंगी
- बिजनेस में फेल होने की वजह मेरे प्रोडक्ट में ये कमी हो सकती है या फिर मेरी
कस्टमर से डीलिंग सही नहीं है | या मैं प्रोडक्ट का प्रमोशन सही तरीके से नहीं कर
पा रहा हूँ |
उसमें असफलता के अलग –अलग कारण होते हैं | जरूरी है हम उनकी एनालिसिस करें | अपनी
गलतियों को स्वीकारें | यही उन्हें सुधार कर आगे बढ़ना सफलता की ओर ले जाने वाला पहला कदम होता है |
जितने भी सफल व्यक्ति हुए हैं वो कई बार असफल हुए पर उन्होंने सफलता इसलिए पायी
क्योंकि
- उन्होंने प्रयास नहीं छोड़ा
- अपनी असफलता को स्वीकार किया
- असफलता के लिए स्वयं को जिम्मेदार माना
- पूरे जी जान उस कमी को दूर करने का
प्रयास किया - और निरंतर ये प्रयास करते रहे |
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