असफलता से सीखें

असफलता से सीखें



क्या आप को पता है की असफलता भी हमें सिखाती है | सफलता का एक महत्वपूर्ण
सूत्र है असफल व्यक्तियों से या अपनी असफलता से  सीखना  |
जी हाँ , जिंदगी के पाठ्य क्रम में सफलता व् असफलता दोनों ही शिक्षक हैं | जहाँ
जरूरी है सफल ही नहीं असफलता या असफल व्यक्तियों से सफल होने के तरीके सीखना | आप
भी आश्चर्य में पड़ गए होंगे |


कभी आपने बचपन में किसी रस्सी को पकड़ कर उसका एक सिरा दरवाजे में बाँध कर
दूसरा पकड़ कर हिलाया है | आपने महसूस किया होगा रस्सी में एक तरंग  चलने लगती है | ऊपर
नीचे , ऊपर नीचे | हमारी जिंदगी भी बिलकुल ऐसी ही हैं | कभी सफलता के शिखर कभी
विफलता के गर्त |अंतर केवल इतना है की असली जीवन में जो लोग एक बार गर्त में आते
ही प्रयास छोड़ देते हैं वो असफल कहलाते हैं | जो गर्त में जा कर फिर से उठने का
प्रयास करते हैं वो सफल कहलाते हैं | वही रस्सी के दूसरे छोर  या सफलता के शिखर तक
पहुँच पाते हैं | इसके लिए असफल होने पर निराश न होकर अपनी असफलताओं से सीख लेनी
पड़ती है |

कैसे सीखें असफलता से 

 अपनी बात को समझाने के लिए मैं एक छोटी सी कहानी आपसे शेयर करना चाहता हूँ | रोहित और उसके मित्र की | रोहित एक असफल व्यक्ति था | वह अपने
एक अति सफल जानकार के पास सफलता के गुर सीखने गया | जाते ही उसने प्रश्न किया | आप
सफलता के गुर सिखाइए | सफल मित्र ने कहा ,” मैं क्या सिखाऊ , मैं तो खुद सीखता हूँ
| आप किससे सीखते हैं , रोहित  ने उत्साह से
पूंछा | असफल व्यक्तियों से , सफल व्यक्ति ने सीधा सादा  उत्तर दिया | वो कैसे ? रोहित ने आश्चर्य से
पूंछा | सफल व्यक्ति बोला , “ खैर ! वो बाद में पहले तुम मुझे ये बताओ की तुम असफल
कैसे हुए | रोहित बोला , “ मैं बहुत जल्दी सफलता पाना चाहता था | मैंने एक कम्पनी
खोली वो ठीक से जम भी न पायी की दूसरी खोल दी 
| अब पहली में घाटा  होने लगा | तो
उसे पूरा करने के लिए मैंने अपने सारे पैसे लगा कर तीसरी कम्पनी खोल ली | ताकि
उसकी कमाई  से दोनो का घाटा पूरा कर सकूँ |
पर हुआ उल्टा | काम के अत्यधिक दवाब के चलते एक –एक कर के मेरी तीनों कम्पनियां
बिक गयी | और मैं सड़क पर आ गया | मैं कर्जे में डूबा हुआ हूँ |
देखो तुम्हारी बातों  से मैंने दो
बातें सीखी | जिन्हें तुम सफलता के सूत्र भी कह सकते हो |

पहला जब तक एक काम ठीक से न जम जाए दूसरे में हाथ न डालो |दूसरी बात कभी अपना सारा पैसा कम्पनी में न  लगा दो ताकि घाटे की स्तिथि में दिवालिया होने
की नौबत न आये |

आप भी सीख सकते हैं असफलता से 


जैसे रोहित के मित्र ने असफलता से सीखा वैसे हम सब असफल व्यक्तियों से सीख
सकते हैं की क्या नहीं करना चाहिए | फलाना व्यक्ति ने ऐसा क्या किया जिससे वो असफल
हुआ |
यहाँ एक खास बात और हैं आप अपनी असफलता  से भी सीख सकते हैं | ज्यादातर होता यह है की जब
हम असफल होते हैं तो इस बात को स्वीकार नहीं कर पाते की हम से कुछ गलती हुई है |
इस कारण हम दूसरों पर दोष लगाने लगते हैं | 

मसलन फलां ने काम सही नहीं किया |फलां
दोस्त उस समय पैसे देने से मुकर गया | या फलां व्यक्ति को परखने में मुझसे भूल हो
गयी | अगर कोई भी कारण नहीं मिलता है तो हम भाग्य को दोष देने लगते हैं | अरे ,
मेरा तो भाग्य ही खराब है | मैं कुछ भी करूँ काम बनता ही नहीं है | पर अगर आप अपने
अहंकार को जरा हटा कर सोंचेंगे तो आपको 
अपनी कमियाँ स्वीकारने का साहस आएगा |

असफलता से सीखने के लिए करें सेल्फ एनालिसिस 

                            दोस्तों , कठिन है पर अपनी असफलता से सीखने के लिए सेल्फ एनालिसिस की जरूरत होती है |जैसे …

  • मैंने पढाई नहीं की इसलिए नंबर कम आये
  • टीचर के फेवरेटिज्म नहीं मेरे नम्बर मेरे दोस्त से कम इसलिए आये क्योंकि इस सा
    उत्तर देने के बावजूद मैं स्पेलिंग मिस्टेक ज्यादा की थीं |
  • मेरी दोस्त मुझसे ज्यादा टेलेंटेड हैं | उससे प्रतिस्पर्द्धा करने के लिए मुझे
    ज्यादा समय सीखने में लगाना होगा
  • अगर मैं ऑफिस में प्रमोशन नहीं पा  रहा
    हूँ | जबकि मैं काम सबसे बेहतर करता हूँ तो हो सकता है मैं अपने काम को ठीक से
    रीप्रेजेंट नहीं कर पा
     रहा हूँ |
  • अगर फलां व्यक्ति जिसे मैंने नौकरी पर लगाया था | ठीक से काम नहीं कर रहा तो
    भी मेरी गलती है | क्योंकि मैं योग्य व्यक्ति का चयन करने में असफल हो गया |
  •  अगर मेरी टीम योग्य होते हुए भी सही काम नहीं कर पा  रही है तो जरूरी मुझसे टीम कोलीद करने में कुछ गलतियाँ हुई होंगी 

  • बिजनेस में फेल होने की वजह मेरे प्रोडक्ट में ये कमी हो सकती है या फिर मेरी
    कस्टमर से डीलिंग सही नहीं है | या मैं प्रोडक्ट का प्रमोशन सही तरीके से नहीं कर
    पा रहा हूँ |

 ये तो कुछ उदाहरण हैं | हर काम और
उसमें असफलता के अलग –अलग कारण होते हैं | जरूरी है हम उनकी एनालिसिस करें | अपनी
गलतियों को स्वीकारें | यही उन्हें सुधार  कर आगे बढ़ना  सफलता की ओर ले जाने वाला पहला कदम होता है |
जितने भी सफल व्यक्ति हुए हैं वो कई बार असफल हुए पर उन्होंने सफलता इसलिए पायी
क्योंकि




  • उन्होंने प्रयास नहीं छोड़ा
  • अपनी असफलता को स्वीकार किया
  • असफलता के लिए स्वयं को जिम्मेदार माना
  • पूरे जी जान  उस कमी को दूर करने का
    प्रयास किया
  • और निरंतर ये प्रयास करते रहे |
  दोस्तों अगर आप सफल हैं तो उस सफलता को बरकरार रखने या युस मुकाम से आगे बढ़ने के लिए और यदि असफल हैं तो उस असफलता से बाहर निकल कर सफल होने के लिए असफलता से सीखना जरूरी है | जैसा की महा कवि हरिवंश राय बच्चन जी कहते हैं कि 
असफलता एक चुनौती है स्वीकार करो ,
क्या कमी रह गयी देखो और सुधार करो ,
कुछ किये बिना ही जय – जयकार नहीं होती 
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती 
सुबोध मिश्रा 

       

        

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