बाल दिवस : समझनी होंगी बच्चों की समस्याएं

बाल दिवस : समझनी होंगी बच्चों की समस्याएं


बच्चे , फूल से कमल ओस की बूँद से नाजुक व् पानी के झरने से गतशील |
कौन है जो फूलों से ओस से , झरने से और बच्चों से प्यार न करता होगा | बच्चे हमारा
आने वाला कल हैं , बच्चे हमारा भविष्य है , बच्चे उन कल्पनाओं को साकार करने की
संभावनाएं हैं | रविन्द्र नाथ टैगोर ने कहा था कि 

हर बच्चा इस सन्देश के साथ आता है की ईश्वर अभी इंसान से निराश नहीं हुआ है |


उन्हीं नन्हें मुन्ने बच्चों के लिए समर्पित है एक खास दिन यानी  बच्चों का दिन … बाल दिवस | आइये सब से पहले जानते
हैं इस बाल दिवस के बारे में …….

बाल दिवस का इतिहास

हमारे देश भारतवर्ष के लिए ये गौरव की बात है कि बच्चों के लिए एक खास
अन्तराष्ट्रीय दिन बनाया जाए इस की यू एन ओ में मांग सबसे पहले पूर्व भारतीय रक्षा
मंत्री श्री वी के कृष्ण मेनन ने की थी | और पहली बार २० नवम्बर १९५९ को
अन्तराष्ट्रीय बाल दिवस मनाया गया | भारत में भी पहले २० नवम्बर को ही बाल दिवस
मनाया जाता था |
जैसा की सभी जानते हैं कि भारत के प्रथम प्रधान मंत्री जवाहर लाल
नेहरु जी को बच्चों से बहुत प्यार था | वो बच्चों के साथ खेलते उन्हें दिशा दिखाते
व् उनके साथ खेलते थे | उन्होंने बच्चों के लिए कई कल्याण कारी योजनायें भी शुरू
की | बच्चे भी उन्हें बहुत प्यार करते थे , और प्यार से उन्हें चाचा नेहरु कहा
करते थे | बच्चों द्वारा प्यार से कहा गया चचा नेहरु बाद में नेहरु जी का मानो उपनाम
पड़ गया |
२७ मई १९६४ को नेहरु जी की मृत्यु के बाद उनके बच्चों के प्रति प्रेम
को सम्मान देने के लिए उनके जन्म दिन १४ नवम्बर को बाल दिवस के रूपमें मनाये जाने
की घोषणा कर दी गयी |तब से भारत में नेहरु जी की जयंती यानि १४ नवम्बर को बाल दवस
मनाया जाने लगा |

कैसे मनाया जाता है बाल दिवस

बाल दिवस को
मानाने में तमाम सरकारी व् गैर सरकारी आयोजन होते हैं | स्कूलों में रंगारंग
कार्यक्रम , भाषण व् निबंध प्रतियोगिताएं होती है |बच्चे जिसमें बढ़ चढ़ कर हिस्सा
लेते हैं | बाल दिवस पर बच्चों स्कूल में यूनिफार्म में न आने की छूट होती है |
जिससे बच्चों को स्कूल में कुछ खास होने का अहसास होता है | कई स्कूलों में प्रिसिपल
व् टीचर्स मिल कर बच्चों के लिए कार्यक्रम बनाते हैं | रोज सजा देने वाले या अनुशासन
में रहने की ताकीद देने वाले टीचर्स जब इस कार्यक्रम को
  बच्चों की ख़ुशी के लिए करते हैं तो बच्चे बहुत
आनन्दित होते हैं | कार्यक्रम के अंत में बच्चों को मिठाइयाँ व् फ्रूट्स बांटे
जाते हैं |

स्कूलों के अतरिक्त टेलीविजन व् रेडियों में भी बाल दिवस पर बच्चों के
लिए
 खास कार्यक्रम होते हैं | कई
कार्यक्रम ऐसे होते हैं जिनमें बच्चे बढ़ चढ़ कर भाग लेते हैं |
कई स्वयं सेवी संस्थाएं भी बच्चों के लिए कार्यकर्मों का आयोजन करती
हैं | बच्चों को मिठाइयाँ
 व् फल आदि
वितरित किये जाते हैं |

बाल दिवस पर आइये सोंचे बच्चों के बारे में


                            बाल दिवस बच्चों का दिन है | इसे स्कूल , संस्थाओं , व् सरकारी तौर पर
मनाया जाता है | पर एक
  दिन रंगारंग
कार्यक्रम कर के मिठाइयाँ बाँट देना बच्चों की सारी
 समस्याओं का हल है | जिन्हें आज के बच्चे झेल
रहे हैं
 | एक नागरिक के तौर पर हमें उन
समस्याओं को समझना होगा व् उनका हल निकालना होगा | आइये उस बारे में क्रमवार सोंचे


कन्या शिशु की भ्रूण हत्या ..

जन्म लेने का अधिकार ईश्वर का दिया हुआ अधिकार है | परन्तु आज इतने प्रचार
के बावजूद कन्या शिशु की भ्रूड हत्या हो रही है | इसके आंकड़े दिन पर दिन बढ़ते ही
जा रहे है | ये न सिर्फ अमानवीय बल्कि अत्यंत पीड़ादायक प्रक्रिया है | हमारी कोशिश
यह होनी चाहिए कि हम अपने स्तर पर इसे रोकने का प्रयास करें | मतलब हम अपने परिवार
में ऐसा नहीं होने देंगें |

बाल श्रम की समस्या

सड़कों पर
कूड़ा बीनते बच्चे , होटल ढाबों में काम करते बच्चे , कार साफ़ करते बच्चे , हमारे
घरों में मेड के रूपमें काम करते बच्चे | ये सब भी बच्चे हिन् हैं जो बचपन में
खिलौने व् किताबों के स्थान पर श्रम कर के अपना व् अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं
| इनसे इनका पूरा बचपन छीना जा चुका है | क्या हमारा कर्तव्य नहीं की हम इन बच्चों
को बाल श्रम से निकाल कर सरकारी स्कूल में पढने की व्यवस्था करवाने की कोशिश करे |
सरकारी स्कूल में बच्चों को मुफ्त शिक्षा व् भोजन मिलता है |केवल जरूरत है इनके
माँ – पिता को समझाने की , कि जिम्मेदारी परिवार का पेट पालना नहीं है बल्कि आप की
जिम्मेदारी है की आप इनको शिक्षा देकर इस गरीबी के जीवन से निकलने में मदद करें |

बच्चों का शारीरिक व् मानसिक शोषण की समस्या

 अभी हाल में
कैलाश सत्यार्थी के व्यक्तव्य ने हर संवेदनशील व्यक्ति की आँखों में आंसूं ला दिए
, जब उन्होंने बताया की न जाने कितने बच्चे यौन शोषण का शिकार होते हैं | ये शिकार
सिर्फ लडकियां ही नहीं लड़के भी होते हैं | अफ़सोस ये ज्यादातर पड़ोस के भैया , मामा
, चाचा , अंकल कहे जाने वाले लोगों के द्वारा होता है | शिकार होते बच्चे किस भय
से अपने माता – पिता को उस समस्या के बारे में नहीं बता पाते | इन सब कारणों की तह
में जाना है | छोटे बच्चों को गुड टच व् बैड टच के बारे में समझाना व् उनके माता –पिता
को समझाना की अपने बच्चे की शारीरिक व् मानसिक बदले व्यवहार को नज़र अंदाज न करें |
एकसभ्य  नागरिक के रूप में हमारा कर्तव्य है |

लडकियों की शिक्षा

 अभी भी हमारा
समाज लड़का लड़की में भेद भाव करता है | लड़कियों की शिक्षा की भी पर्याप्त व्यवस्था
नहीं हैं | जहाँ है भी वहां माता – पिता यह ही कह कर
 की ,”ज्यादा पढ़ जायेगी तो वर खोजने में मुश्किल
होगी” सारे रास्ते ही बंद कर देते हैं | कहीं पर कन्या महाविद्यालय की सुविधा न होने से माता – पिता व् समाज सहशिक्षा वाले कॉलेज में अपनी लड़की को भेजना ही नहीं चाहते | 

कहा गया है की अगर आप एक लड़के को पढ़ाते हैं तो एक आदमी को शिक्षित करते हैं पर अगर आप एक लड़की को पढ़ाते हैं तो पूरे परिवार को शिक्षित करते हैं | लड़कियों की शिक्षा के प्रति  अपने समाज की विरक्ति को देखते हुए   हमारा कर्तव्य है कि हम लड़कियों को
पढने व् आगे बढ़ने लायक समाज का निर्माण करें | आखिर समाज हम ही से तो बनता है |

बच्चों की सुरक्षा की समस्या

अभी हाल के प्रद्युमन हत्याकांड के
बाद बच्चो की सुरक्षा एक गंभीर समस्या बन कर उभरी है | स्कूल में भी अगर बच्चे
सुरक्षित नहीं हैं तो वो कहाँ सुरक्षित हो सकते हैं |बच्चों की सुरक्षा से घबराए माँ – बाप बच्चो को पार्क , या घर के बाहर अकेले खेलने जाने देने से भी घबरा रहे हैं | सुरक्षा के मसले के चलते बच्चों का बचपन कैद किया जा रहा है | जिसके कारण वो कम्प्यूटर व्कि टी वी की चपेट में ज्यादा आ रहे हैं | उनका शारीरिक स्वास्थ्य व्शो फुर्तीलापन तेजी से कम हो रहा है | आज किशोर  बच्चे अपराधी मानसिकता की और मुड रहे हैं | हमें कारणों की तह में जाना होगा | और उन्हें दूर करना होगा | 


बच्चों पर पढाई का प्रेशर 



                       बच्चों पर 100% का प्रेशर माता – पिता ने बनाया है | हर बच्चा बराबर नहीं हो सकता न ही उसकी योग्यताएं बराबर हो सकती हैं | परन्तु माता – पिता अपने बच्चे को सबसे अच्छा बनाने के प्रयास में उन पर दवाब बना रहे हैं | जैसे उन्हें बच्चे नहीं रोबोट चाहिए | बच्चों में आत्महत्या , चिडचिडापन , व् झुन्झुलाहट  की बढती प्रवत्ति इसी का नतीजा है | जरूरी है कि हम समय रहते ही बच्चों को प्रेशर कुकर बनने से रोकें | नहीं तो बचपन इ इस विस्फोट कोहम संभाल  नहीं पायेंगे | 



                                         अपनी बात को संक्षेप में करते हुए मैं  इतना
कहना चाहूंगी की बच्चे हम सब का भविष्य है | उनकी समस्याओं को समझना व् उन्हें हल
करना हम सब का कर्तव्य है |जिसे हमें अवश्य निभाना चाहिए |  



और  ये बच्चों को बाल दिवस पर दिया गया सबसे खूबसूरत
तोहफा भी है |



बाल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 

नीलम गुप्ता 
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