कवितायें भावनाओं की वो अभिव्यक्ति हैं,जो जब खुद ही अपना आकार लेती हैं,तो पाठकों के मन को अवश्य छूती हैं | आज हम लायें नाजीरिया में रहने वाली युवा कवियत्री श्वेता मिश्रा की 5 कवितायेँ |पेशे से फैशन डिजाइनर कविताओं के माध्यम से भावनाओं का ताना -बाना भी बहुत ख़ूबसूरती से बुनती हैं |
1. रात
कुछ रोली कुछ चन्दन
एक हार था प्रभु के वास्ते
एक उल्लास था भक्ति के रास्ते
एक ही था कठोर मन
भीगा था नेह में
मधुर था स्नेह में
अधरों पर थी लौटी एक मुस्कान
पल जो बीता था कल
सौ बात की इक बात
मधुर प्रेम पर है विश्वास
ईश भी रहता जिनके द्वार
कठोर मन के भीतर
रहता मिश्री घुला मीठा जल
क्यूँ हो तुम जैसे एक नारियल !!!
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की महज़ चाहत हुयी
तेरे पत्तों ने गिर कर
मेरा कोमल मन घायल किया
दोष मेरा क्या ??????
इक बार तो बता दो
माना तेरी छावं के
हकदार हैं कई
मगर क्यूँ
सजा का मुझे हकदार किया ???
ए दरख्त तुझे कई बार
सींचा है मैंने भी अपने स्नेह से
स्वार्थ था शायद या थी असीम चाहत
तूने समझने से ही इनकार किया
ए दरख्त तू यूँ ही हरा भरा रहे
तेरी छावं तेरी चाहतो पर बनी रहे
मैं मुसाफ़िर हूँ दूर से ही
तुझे देख कर नेह जल से तुझे सींचती रहूंगी
आखिर मैंने तुझे प्यार किया प्यार किया प्यार किया
……………………………..
जो पलक तक
आ ठहरी थी
जाने कितने
ख्वाब समेटे
जाने कितने
सपनो के रंग लिए
अनछुई थी बस
एक स्पर्श से
टूट कर गिरी
और दफ़न हो
गयी हथेली में !!!!
सम्प्रति- फैशन डिजाईनर
लेखन विधाएँ-कविता गजल नज़्म कहानी
प्रकाशित कृतियाँ- (कविता एवं कहानी) — साहित्य अमृत, रचनाकार , अपना ब्लॉग ,पुष्पवाटिका मासिक पत्रिका(मई २०१४ से नियमित ….) तथा अन्य समाचार पत्र पत्रिकाओं में कवितायेँ एवं कहानियां प्रकाशित
ई पत्रिका – साहित्य कुंज, लेखनी, साहित्य रागिनी ,युवा साहित्य,हमरंग.com आदि में भी

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