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जन्माष्टमी पर 7 काव्य पुष्प

जन्माष्टमी पर 7 काव्य पुष्प


माखन चोर , नटखट बाल गोपाल , मथुरा का ग्वाला , धेनु चराने वाला , चितचोर , योगेश्वर , प्रभु श्री कृष्ण के नामों की तरह उनका व्यक्तित्व भी अनेकों खूबियाँ समेटे हुए हैं | तभी तो उनका जानना सहज नहीं है | सहज है तो प्रेम रस में निमग्न भक्ति … जो कह उठती है ” मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरों ना कोई ” और महा ज्ञानी कृष्ण भक्त के बस में आ जाते हैं | तो आइये जन्माष्टमी के पावन अवसर पर इन ७ कविताओं को पढ़ें जो कृष्ण की भक्ति के रंग में रंगी हुई हैं और खो जाएँ …. बांसुरी की मोहक धुनों में

जन्माष्टमी पर 7 काव्य पुष्प 

१—कृष्ण
चक्र, बाँसुरी, शंख का 
है अदभुत संगम,
प्रेम-मधुरिमा फैले सर्वत्र 
बजाते बाँसुरी कृष्ण!
रण का करना घोष जब 
फूँकते शंख कृष्ण!
आततायी को क्षमा नहीं 
चक्र घुमायें कृष्ण!
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२—पाहन शैया पर कृष्ण
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थोड़ा 
करने तो दो 
आराम मुझे..
अभी अभी तो 
लेटा हूँ आकर 
अपनी पाहन शैया पर 
चिंतन भी 
तुम सबके हित ही 
एकाकी हो रहा हूँ कर,
मिला न माखन 
व्यर्थ हुए सब 
अपने लटके-झटके 
सोचा कुछ करने को तो 
जा खजूर में अटके 
अब तो पूरी तैयारी कर 
मुझे लगानी घात 
जसुमति माँ को सब देखना 
माखन लाऊँगा साथ।
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३—कान्हा 
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नटखट कान्हा से तंग आकर 
जसुमति ने घर में ताला डाला 
दाऊ संग निकले झरोखे से 
झट गऊओं संग डेरा डाला 
पूँछ पकड़ कर बैठे कान्हा 
और दाऊ देख रहे खड़े खड़े 
दूर खड़ी माँ जसुमति निहारे 
अपने नैना करके बड़े बड़े।
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४—माधव 
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जब से प्रेम हुआ माधव से 
सब कुछ भूल गई 
किया समर्पण नहीं रहा कुछ 
सब अपना वार गई 
उठे दृष्टि अब ओर किसी भी 
दिखाई देते हैं माधव 
हुई माधवमय मैं अब सुन लो 
यमुना के तीर गई।
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५—माधव 
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नृत्य कर रहा मोहित होकर 
सबको मोहने वाला 
देख इसे सुधबुध बिसराई
ये कैसा जादू डाला 
कौन न जाए वारी इस पर 
पीकर भक्ति हाला
माधव छवि ही रहे ध्यान में 
गले मोतियन माला
देकर गीता ज्ञान सभी के 
भरम मिटाने वाला 
अपनी लीला दिखला कर 
हर संकट इसने टाला।
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६—उत्तर दो मोहन!
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पूछे मीरा कृष्ण से 
उत्तर दो मोहन! 
हो रहा विश्वास का 
क्यों इतना दोहन?
कैसे कोई आज कहीं 
सच्ची प्रीत करेगा?
वासना का दंश प्रतिपल 
मन को जब मथेगा 
तुम्हें सोचना होगा हित 
अब आगे बढ़ कर 
पाठ पढ़ाना कुकर्मियों को 
उदंड शीश काट कर।
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७—बंसी बजैया
बंसी बजैया!
सकल जग के हो 
तुम खेवैया।
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कहो माधव 
ग्वाल संग करते 
कैसा कौतुक?
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आओ मोहना 
निरखें सब मग 
रूप सोहना।
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हमारे मन 
बसो सर्वदा तुम 
जीवन धन।
•••••••••••

मुरली तान 
हुई अधीर राधा 
कहाँ है भान?
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कदम्ब तले 
रास गोपियों संग 
देवता जलें।
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मटकी फोड़ी
जसुमति देखती 
लीला निगोड़ी।
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डा० भारती वर्मा बौड़ाई


लेखिका


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