प्रो लाइफ या प्रो चॉइस …स्त्री के हक़ में नहीं हैं कठोर कानून

प्रो लाइफ या  प्रो चॉइस ...स्त्री के हक़ में नहीं हैं कठोर कानून







माँ बनना दुनिया के सबसे खूबसूरत अनुभवों में से एक है | किसी कली  को अपने अंदर फूल के रूप में विकसित होते हुए महसूस करने का अहसास बहुत सुखद है | कौन स्त्री है जो माँ नहीं बनना चाहती | फिर भी कई बार उसे ग्राभ्पात करवाना पड़ता है | गर्भपात का दर्द बच्चे को जन्म देने के दर्द से कई गुना ज्यादा पीड़ा दायक है …फिर भी स्त्री इससे गुजरने के पक्ष में निर्णय लेती है… तो यकीनन कोई बड़ा मसला ही होगा | ( यहाँ केवल लिंग परिक्षण के बाद हुए गर्भपातों को सन्दर्भ में ना लें , वो गैर कानूनी हैं )परन्तु अब ये बात फिरसे उठने लगी है कि गर्भपात को पूरी तरह से गैर कानूनी करार दे दिया जाए | खास बात ये है कि ये मान किसे विकासशील देश नहीं विकसित देश अमेरिका से उठ रही है |


प्रो लाइफ या  प्रो चॉइस …स्त्री के हक़ में नहीं हैं कठोर कानून 


प्रो लाइफ और प्रो चॉइस  के पक्ष और विपक्ष का वैचारिक विरोध कोई नयी बात नहीं है |
हम सब जीवन के पक्ष में है | फिर भी अगर इन परिस्थितियों पर गौर करा जाए जहाँ स्त्री गर्भपात के अधिकार की मांग करती है …


बालात्कार से उत्पन्न बच्चे
धोखा देकर भागे प्रेमी से उत्पन्न बच्चे
ऐसा भ्रूण जिसे कोई ऐसा रोग हो जो उसे जीवन भर असहाय बना दे |
ऐसा भ्रूण जिसका गर्भ में पलना माँ के जीवन को खतरा हो |
या स्त्री मानसिक रूप से इसके लिए तैयार ना हो चाहे इसका कारण उसका कैरियर हो या बच्चा पालने की अनिच्छा |


प्रो चॉइस महिलाओं को ये अधिकार देता है कि ये शरीर उनका है और उसमें बच्चे को पालने या जन्म देने का अधिकार  उनका है |


जबकी प्रो लाइफ का कहना है कि किसी भी जीव चाहें वो भ्रूण अवस्था में ही क्यों ना हो उसका जीवन खत्म करने का अधिकार किसी को नहीं है |


यूँ तो प्रो लाइफ के तर्क बहुत सही लगते हैं ,क्योंकि वो जीवन के पक्ष में है , लेकिन प्रो चॉइस के अधिकार पाने के लिए महिलाओं को बहुत संघर्ष करना पड़ा , क्योंकि गर्भपात हमेशा से कानूनी रूप से गलत माना जाता रहा है | 




अभी हाल में अमेरिका के ओकलाहोमा में प्रो लाइफ के पक्ष में निर्णय देते हुए गर्भपात को पूरी तरह से गैर कानूनी बना दिया जिसमें गर्भपात करने वाले डॉक्टर को भी 99 वर्ष के लिए जेल जाना पड़ेगा जाहिर है कोई डॉक्टर ये खतरा नहीं उठाएगा ऐसा करने वाला ये राज्य अमेरिका का पांचवां राज्य है |


तो क्या महिलाएं गर्भपात नहीं करवाएगी ?







जहाँ विवाहित दंपत्ति  प्रेम पूर्ण साथ -साथ रहते हैं वहां वो वैसे भी भी बच्चे को लाने या नहीं लाने का निर्णय साथ –साथ करते हैं और अगर बिना मर्जी के बच्चा आ ही गया तो उसे सहर्ष पाल ही लेते हैं |( फिल्म –बधाई हो जो असली जिंदगी की ही कहानी है  ) परन्तु ऊपर लिखे सभी कारणों में अगर स्त्री  गर्भपात नहीं करवा पाएगीं तो वो क्या करेगी …


उन बच्चों ओ जन्म देकर कूड़े में फेंकेंगी या अनाथालयों मे भेजेंगी ,क्योंकि रेप चाइल्ड या धोखेबाज प्रेमी से उत्पन्न बच्चों को पालने, उस बच्चे को देखकर उस सदमे के साथ हमेशा जीने के लिए विवश करता है , जबकि बच्चे का पिता पूर्ण रूप से उस बच्चे और अपने कर्तव्यों के प्रति आज़ाद रहता है | प्रो चॉइस स्त्री को ये अधिकार देता है कि केवल वो ही दंडित ना हो |




या फिर खराब भ्रूण के कारण अल्प मृत्यु का शिकार होंगी | जैसे की भारतीय मूल की सविता की २०१२ में आयरलैंड में मृत्यु हो गयी थी | जिसके गर्भ में पलने वाला भ्रूण खराब था और उससे माँ की जान को खतरा था | परन्तु कोई डॉक्टर गर्भपात  के लिए तैयार नहीं हुआ क्योंकि उस समय वहाँ का कानून यही था कि  किसी भी तरह का गर्भपात गैर कानूनी है | उनके पति द्वारा अदालत में गुहार लगाने के बावजूद सविता को नहीं बचाया जा सका और वो मृत्यु का शिकार हुई |उसके बाद वहां हुए विरोध प्रदर्शनों के मद्देनज़र वहां की सरकार को कानून में बदलाव करना पड़ा कि स्त्री की अगर जान को खतरा हो तो उस भ्रूण का गर्भपात  करवाया जा सकता है |


कानून बनने के बाद भी बहुत सी स्त्रियाँ गर्भपात करवाएंगी पर वो अप्रशिक्षित व् अकुशल दाइयों और झोला छाप डॉक्टरों द्वारा होगा …जिसमें स्त्री के जीवन को खतरा है |

                            जीवन का अंत करना भले ही सही ना हो परन्तु ख़ास परिस्थितियों में किसी स्त्री , किसी भावी माँ के शारीरिक , मानसिक स्थिति को देखते हुए ये जरूरी हो जाता है कि महिलाओं के पास ये अधिकार रहे कि वो बच्चे को जन्म दे या नहीं |

आप क्या कहते हैं ?


वंदना बाजपेयी 


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