अंतरराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस परिचर्चा : व्यस्त रखना है समाधान : किरण सिंह

                                                              









                                                      
हमारे बुजुर्ग हमारे धरोहर हैं..! जिन्होंने अपने सुन्दर घर बगिया को अपने खून पसीने से सींच सींच कर उसे सजाया हो इस आशा से कि कुछ दिनों की मुश्किलों के उपरान्त उस बाग में वह सुकून से रह सकेंगे ! परन्तु जब उन्हें ही अपनी सुन्दर सी बगिया के छांव से वंचित कर दिया जाता है तब वह बर्दाश्त नहीं कर पाते .और खीझ से इतने चिड़चिड़े हो जाते हैं कि अपनी झल्लाहट घर के लोगों पर बेवजह ही निकालने लगते हैं जिसके परिणाम स्वरूप घर के लोग उनसे कतराने लगते हैं …! तब बुजुर्ग अपने आप को उपेक्षित महसूस करने लगते हैं ! “उनके अन्दर नकारात्मक विचार पनपने लगता है फिर शुरू हो जाती है बुजुर्गों की समस्या !

परन्तु कुछ बुजुर्ग बहुत ही समझदार होते हैं, वो नई पीढ़ी के जीवन शैली के साथ समझौता कर लेते हैं, उनके क्रिया कलापो में टांग नहीं अड़ाते हैं बल्कि घर के छोटे मोटे कार्यो में उनकी मदद कर उनके साथ दोस्तों की भांति विचारों का आदान-प्रदान करते हैं, और घर के सभी सदस्यों के हृदय में अपना सर्वोच्च स्थान बना लेते हैं ! उनका जीवन खुशहाल रहता है !
बुजुर्गों के समस्याओं का मुख्य कारण- एकल परिवार का होना है ! जहाँ उनके बेटे बेटियाँ बाहर कार्यरत रहते हैं, जिनकी दिनचर्या काफी व्यस्त रहती है ! उनके यहाँ जाने पर बुजुर्ग कुछ अलग थलग से पड़ जाते हैं, क्यों कि बेटा और बहू दोनों कार्यरत रहते हैं, वहां की दिनचर्या उनके अनुकूल नहीं रहता, जिनमें सामंजस्य स्थापित करना उनके लिए कठिन हो जाता है ! इसलिए वो अपने घर और अपने समाज में रहना अधिक पसंद करते हैं ! ऐसी स्थिति में हम किसे दोषी ठहराएं ? कहना मुश्किल है क्योंकि यहां पर परिस्थितियों को ही दोषी ठहराकर हम तसल्ली कर सकते हैं !
इन समस्याओं के समाधान के लिए कुछ उपाय किये जा सकते है !
अपार्टमेंट निर्माण के दौरान युवा और बच्चों के सुविधाओं का ध्यान रखने के साथ साथ बुजुर्गों के सुविधाओं तथा मनोरंजन का भी खयाल रखना चाहिए जहां बुजुर्गो के लिए अपनी कम्युनिटी हॉल हो जहां वो बैठकर बात चित , भजन कीर्तन, पठन पाठन आदि कर सके साथ ही सरकारी तथा समाजसेवी संस्थानों को भी ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जहां बुजुर्गों के सुरक्षा, सुविधा, एवं मनोरंजन का पूर्ण व्यवस्था हो ! बुजुर्गों के पास अनुभव बहुत रहता है सरकार को ऐसी व्यवस्था बनाना चाहिए जहां उनके अनुभवों का सदुपयोग हो सके जिससे उनकी व्यस्तता बनी रहे !
बुजुर्गों को अपने लिए कुछ पैसे बचाकर रखना चाहिए सबकुछ अपनी जिंदगी में ही औलाद के नाम नहीं कर देना चाहिए !
जिन्हें अपनी संतान न हो उन्हें किसी भी बच्चे को गोद अवश्य ले लेना चाहिए ! क्यों कि जिनके औलाद नहीं होते उनके सम्पत्ति में हिस्सेदारी लेने तो बहुत से लोग आ जाते हैं परन्तु उनके सेवा सुश्रुसा का कर्तव्य निभाने के लिए बहुत कम लोग ही तैयार होते हैं !
हमें यह सर्वथा ध्यान रखना चाहिए कि कल हमे भी इसी अवस्था से गुजरना है तथा हम आज जो अपने बुजुर्गों को देंगे हमारी औलादें हमें वही लौटाएंगी !
साथ ही बुजुर्गों को भी अपनी सोंच सकारात्मक रखना चाहिए तथा समझौतावादी होना चाहिए !
**********************
©Copyright Kiran singh

Share on Social Media
error:
WordPress Repository Meritking Giriş: Meritking Giriş Adresi Marsbahis Giriş: Marsbahis Güvenilir Mi Mavibet Giriş: Mavibet Para Yatırma Ve Çekme İşlemleri कुल्हड़ भर इश्क -बनारसी प्रेम कथा नव वर्ष यानी आपके हाथ में हैं नए 365 दिन माउथ ऑर्गन –किस्सों के आरोह-अवरोह की मधुर धुन WordPress Expire Passwords HT Slider Pro For Elementor Herd Effect – fake notifications that stimulate user action WooCommerce Payment Checkout Plugin: Offline Credit Card Checkout Method Advanced Grid Blog Layout Design SuperCache Module for Foodomaa WooCommerce Swatches Pro Plugin MobiKwik (Zaakpay) Payment Gateway WooCommerce Plugin Logo Showcase for Elementor WordPress Plugin Media Boxes Portfolio – WordPress Grid Gallery Plugin