एक बच्चे ने अपने पिता से पूंछा ,” पिताजी ये जिन्दगी क्या है | और ये हम सब के प्रति अलग – अलग व्यवहार क्यों करती है |नन्हें बेटे के मुँह से ये प्रश्न सुन कर पिताजी सोंच में पड़ गए | आखिरकार उन्होंने बच्चे को जीवन की पाठशाला से सिखाने का मन बनाया | और वो बेटे के साथ एक ऐसी जगह पर गए जो चरों तरफ से पहाड़ियों से घिरी थी | पिता की अँगुली थामे आगे बढ़ते हुए बेटा बहुत खुश था | अचानक से वो पिता का हाथ छुड़ा कर तेजी से आगे बढ़ा |
उसके मुंह से निकला , ‘ आह
‘
पहाड़ों में से कहीं – से आवाज आई – ‘ आह ‘
अचरज में रह गया। उसने फौरन पूछा – तुम कौन हो ?
से वही सवाल आया , ‘ तुम
कौन हो ?’
पिता की ओर देखा और पूछा , ‘ यह
क्या हो रहा है ?’
ने मुस्कुराते हुए कहा , ‘ बेटा
, जरा ध्यान दो। ‘
बाद पिता चिल्लाया , ‘ तुम
चैंपियन हो !‘
मिला ,
‘ तुम चैंपियन हो !‘
को हैरानी हुई लेकिन वह कुछ समझ नहीं सका।
पर पिता ने उसे समझाया , ‘ लोग
इसे गूंज ( इको ) कहते हैं | मतलब जो हम बोलते हैं वाही पलट कर सामने से आता है | और लगता है की प्रकृति भी हमारे साथ वही बोल रही है | अगर हम डरपोंक कहते हैं तो वो हमें उत्तर देती है डरपोंक अगर हम चैम्पियन कहते हैं तो वो हमें उत्तर देती है चैम्पियन | है ना मजेदार |

