तेज दौड़ने के लिए जरूरी है धीमी रफ़्तार

एक पुरानी अंग्रेजी कहावत है ,“go slow to go fast “अगर आप आगे बढ़ना चाहते हैं तो अपनी शुरूआती गति थोड़ी धीमी रखिये | आपको सुनने में बहुत अजीब लग रहा होगा | पर याद करिए बचपन में पढ़ी कछुए और खरगोश की कहानी | कछुआ धीमे चलता है और रेस जीत जाता है | वहीँ शुरू में सरपट दौड़ने वाला खरगोश ऊंघता रह जाता है | ये कहानी मात्र प्रतीकात्मक है | जहाँ खरगोश के ऊँघने और हारने के अपने अपने सन्दर्भ में कई कारण समझे जा सकते हैं | 
जैसा की बिल गेट्स कहते हैं ,

 किसी भी कम्पनी के सफल होने के लिए ये कार्ययोजना जरूरी नहीं है की हम पहले साल कितना तेज दौड़ेंगे , बल्कि ये जरूरी है की हम दस साल में कितना दौड़ लेंगे |

आप जरूर जानना चाहते होंगे की कैसे आप धीमे दौड़ते हुए तेज दौड़ने वाले धावक सिद्ध होते हैं , तो जरा इन  कारणों पर गौर करिए |

बना रहेगा  काम के प्रति पैशन

पिछले दिनों अपने बचपन के दोस्त से मिला | वह डॉक्टर है , और उसके पास मिलने का समय बहुत कम ही रहता है | क्लिनिक में बैठ कर कभी ठीक से बात हो नहीं पाती | उसका खुद यूं घर आ जाना कुछ अजीब सा लगा | राज उसने ही खोला | बतौर दीपक ( परिवर्तित नाम ) अगर पिछले सालों में अपने जीवन को मुझे एक शब्द में परिभाषित करना पड़े तो निश्चित तौर पर वो शब्द होगा “व्यस्त ” | जो मुझे हमेशा से बहुत खूबसूरत शब्द लगता रहा है |जैसे घडी की सुइयां चलती हैं , जैसे दिल धडकता है , जैसे साँसे चलती हैं … बिना रुके बिना थके , तो हम क्यों नहीं |मुझे लगता था सारी खुशियाँ व्यस्त , अति व्यस्त रहने में है |अगर मैं व्यस्त हूँ तो इसका मतलब मैं अपने समय का पूरा सदुपयोग कर रहा  हूँ | हमारी सारी पाजिटिव थिंकिंग की किताबें भी तो यही सिखाती हैं | समय कीमती है | एक – एक मिनट का इस्तेमाल करो | आगे बढ़ो , दौड़ों , और सफलता , और पैसा , और शोहरत | पर पता नहीं क्यों सब कुछ मिलने के बाद भी एक खालींपन रह जाता है , जैसे बहुत कुछ पा कर खो दिया | ” इतना कह कर दीपक तो चला गया , क्योंकि उसे एक जरूरी ऑपरेशन करना  था | पर मैं सोचने में व्यस्त हो गया  ” अति व्यस्त ” लोगों के बारे में | बात सिर्फ दीपक की नहीं उन बहुत से लोगों की है जो अति व्यस्त रहते हैं | जो व्यस्तता को ही ख़ुशी समझते हैं |इनमें से ज्यादातर मल्टीटास्किंग होते हैं | एक साथ कई काम हाथ में ले लेना इनका हुनर होता है |परन्तु तेज दौड़ते – दौड़ते उनका काम के प्रति पैशन खत्म हो जाता है | अपना काम जिसे वो बेहद प्यार करते थे | बेहद उबाऊ लगने लगता है |

समझ विकसित करने का अवसर

आपने अगर कभी किसी बच्चे को पढ़ाया होगा तो आप बेहतर जानते होंगे की | जो बच्चे जल्दी – जल्दी पाठ पढ़ कर आप को सुना देते हैं उनकी समझ गहरी नहीं  होती | वह पाठ को ठीक से समझ नहीं पाते और ट्रिकी सवालों के जबाब नहीं दे पाते | और हाँ ! हर बार पाठ के रिविजन में उन्हें उतना ही टाइम लगता है | पर जो बच्चे एनालिसिस के स्तर  पर जा कर पाठ समझते हैं | उन्हें पहली बार पढने में तो समय लगता है | पर बार – बार उसे दोहराना नहीं पड़ता | वह पाठ आधारित सभी प्रश्नों के उत्तर आसानी से दे पाते हैं | यही बात जीवन के हर क्षेत्र में लागू होती है | जब आप किसी प्रोजेक्ट को समझ कर एक – एक कदम सधा हुआ व् ठोस उठाते है तो सफल होने की सम्भावना बहुत होती है | क्योंकि आप अपने हर कदम की एनालिसिस करते हुए आगे बढ़ते हैं | जिससे गलतियाँ सुधरती चलती हैं व् सही दिशा का चयन कर पाते हैं |

आपसी बॉन्डिंग होती है बेहतर 

ज्यादातर बड़ी सफलताएं टीम वर्क का नतीजा होती हैं | जब आप जब आप तेज भागते हैं तो आपकी टीम को भी उसी गति से दौड़ना पड़ता है | जहाँ उन्हें आपसी समझ विकसित करने का अवसर नहीं मिलता | कुछ सदस्य तो तेज दौड़ते हैं कुछ धीमे | उनके बीच ” वर्क कॉडीनेशन ” का आभाव हो जाता है | नतीजा नेट परिणाम जीरो आता है | वहीँ अगर टीम की बॉन्डिंग अच्छी होती है तो हर व्यक्ति अपना १०० % दे पाता है व् तुलनात्मक रूप से कम्पनी का विकास होता है |

जरूरी हैं अंतिम दस मीटर 

कभी आपने किसी ऐथिलीट को दौड़ते हुए देखा है | यहाँ जीतने वाले शुरू में अपनी पूरी ताकत नहीं झोंक देते बल्कि एक सामान गति से दौड़ते हैं और अंतिम दस मीटर की निर्णायक दौड़ में अपनी पूरी उर्जा लगा देते हैं |जरूरी है पाला छूना न की ये की आप पहले कितना तेज दौड़े थे |अगर आप शुरू में अपनी पूरी उर्जा झोंक देते हैं तो आप थका हुआ महसूस करेंगे | हो सकता है आप काम इतना बाधा लें की आप के पास उसे पूरा करने की ताकत ही न बचे | यही वो जगह है जहाँ आप का काम पिछड़ना शुरू कर देता है | अगर आप पहले से ही अपनी गति व् उर्जा का उचित आकलन करते हुए आगे बढ़ते तो काम को सफलता पूर्वक निष्पादित कर पाते |

जरूरी है पौज 

फिर से मुझे एक पुरानी अंग्रेजी कहावत याद आ रही है …

 go fast enough to go there  go slow enough to see 

आपने कभी सोंचा है की मूवी में इंटरवेल क्यों होते हैं | या यूँ कहने की जब हम नेट पर भी कोई मूवी देख रहे होते हैं तो थोड़ी – थोड़ी देर में पॉज  कर के क्यों उठ जाते हैं | कारण स्पष्ट है मूवी ज्यादा एन्जॉय करने के लिए थोडा पॉज  जरूरी है |यही बात जिन्दगी की मूवी पर भी लागू होती है | जहाँ तेज दौड़ने के बीच में थोडा सा पॉज  या विश्राम करना जरूरी है | ताकि हम अपनी सफलता का उत्सव मन सकें |मूल्याङ्कन कर हम नयी योजनायें बना सके | व् तरोताज़ा हो कर पुन : अपने काम में लग सकें |
जिंदगी की सफलता केवल दौड़ने और जीतने में नहीं बल्कि वर्क सैटिसफेकशन , आपके महकते हुए रिश्तों और बेहतर स्वास्थ्य में भी है |याद रखिये आपका जीवन एक गाडी है और आप उस के ड्राइवर …

 स्पीड इतनी रखिये की आप सफ़र का आनद भी लें , एक्सीडेंट भी न हो और मंजिल भी मिले |

ओमकार मणि त्रिपाठी
प्रधान संपादक
अटूट बंधन राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका
व् सच का हौसला दैनिक समाचार पत्र 
आपको  लेख “तेज दौड़ने के लिए जरूरी है धीमी रफ़्तार ”  कैसा लगा  | अपनी राय अवश्य व्यक्त करें | हमारा फेसबुक पेज लाइक करें | अगर आपको “अटूट बंधन “ की रचनाएँ पसंद आती हैं तो कृपया हमारा  फ्री इ मेल लैटर सबस्क्राइब कराये ताकि हम “अटूट बंधन”की लेटेस्ट  पोस्ट सीधे आपके इ मेल पर भेज सकें 
Share on Social Media

Comments are closed.

error:
WordPress Repository Meritking Giriş: Meritking Giriş Adresi Marsbahis Giriş: Marsbahis Güvenilir Mi Mavibet Giriş: Mavibet Para Yatırma Ve Çekme İşlemleri कुल्हड़ भर इश्क -बनारसी प्रेम कथा नव वर्ष यानी आपके हाथ में हैं नए 365 दिन माउथ ऑर्गन –किस्सों के आरोह-अवरोह की मधुर धुन HRSALE – The Ultimate HRM Faq for Elementor WordPress Plugin Spectrum Audio Player WordPress & WooCommerce Plugin Responsive HTML5 Audio Player PRO WordPress Plugin Resido – Laravel Real Estate Multilingual System Live Deals for WooCommerce Circle Menu For Elementor WooCommerce Product Options / Customizer Mine Flipbook WordPress Plugin WPBakery Mega Pack – Addons and Templates