दूर किसी अनागत में- काव्यात्मक भाषा में ठोस कहानियाँ

 

वंदना गुप्ता जी कविता के क्षेत्र में जाना माना नाम हैं। “सरे बाजार कथा बाँचती स्त्रियाँ” से उन्होंने आलोचना के क्षेत्र में मजबूत दस्तक दी है। और अब जब कहानी के क्षेत्र में उतरीं तो भावना प्रकाशन से प्रकाशित अपनी पहली कृति “दूर किसी अनागत में” कव्यात्मक भाषा और स्त्री मनोभावों की का सुंदर तालमेल लेकर आई हैं। कहानी संग्रह का शीर्षक एक रहस्य के साथ अपने नाम से आकर्षित करता है। जिससे पाठक सहज ही किताब उठा लेता है और प्रारंभ हो जाती है तेरह कहानियों के कथा पात्रों की यात्रा साथ ही खुलने लगते हैं अनागत के रहस्य।

दूर किसी अनागत में- काव्यात्मक भाषा में ठोस कहानियाँ

“तहखानों से दूर” सिक्किम की सुगंध लिए मार्मिक और महत्वपूर्ण कहानी है जो स्त्री विरोधी धर्मसत्ता के नुकीले पंजों को अनावृत करती है। भले ही कहानी लामाओं और मठों की बात करती है पर कहानी पढ़ते हुए आप महसूस करते हैं कि बात एक की होकर भी ईशारा सब की ओर है। वैसे भी ऐसी कौन सी जगह है, जहाँ स्त्रियाँ सुरक्षित हैं पर रक्षक ही भक्षक बन जाए तो? कहानी तिब्बत से आए उन शरणार्थियों की बात करती है, जिन्होंने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में पनाह ली। नए देश की मिट्टी और हवा में अपने देश कि संस्कृति को बचाए रखने की अदम्य लालसा उन्हें शिक्षा की जगह मठों से जोड़ने लगी। ऐसा ही एक परिवार रिंछिन का है। जहाँ उसके परदादा ने साथ 7 साल के दादाजी को अपनी संस्कृति बचाने के लिए मठ को सौंप दिया था।  उनके कार्यों के गर्व के तले परिवार के एक बच्चे को मठ को सौंपने की परंपरा बन गई। रिंछिन के भाई के अस्वस्थ होने पर उसे मठ को सौंप दिया जाता है। पीछे छूटते गाँव-घर, पहले प्रेम की पहली सुवास के बीच रिंछिन के स्त्री चेतना से उठे संवाद गहन गंभीर हैं। शिक्षा और विकास के संबंध पर उसके तीखे प्रश्न समस्त मानवता को झकझोरते हैं। परंपराओं की जकड़न में इलाज में लापरवाही चुभती है।

माता- पिता द्वारा ठुकराई गई बच्ची एक मठ के स्याह अँधेरों से सिक्किम के मठ की मुखिया जिलियन द्वारा बचा ही नहीं ली जाती है, वह जिलियन के प्रयासों से उच्च शिक्षा भी प्राप्त करती है। जिस मठ में वह जिलियन के ममत्व की छाँव में महफूज रहकर अपने सपनों की उड़ान भरती है उसके भी अंधेरे सामने आते ही रिंछिन के साथ-साथ पाठक भी शोकाकुल हो जाता है।

लेकिन कहानी एक बार फिर अँधेरों से जूझती है और धर्म के नाम पर तहखानों में बंद स्त्रियों के लिए संघर्ष का बिगुल बजाती है। कहानी पात्रों, नामों, परिस्थितियों, बौद्ध धर्म और लामा संस्कृति, रूढ़ियों की जकड़नों, भाषा और संवादों से सिक्किम का एक अलग ही लोकेल खड़ा करती है और शुरू से पाठक को अपनी गिरफ्त में ले लेती है। शिक्षा और स्वतंत्रता की अलख जगाती कहानी।

पहली कहानी “अपने-अपने आसमान” दो प्रतिभाशाली बहनों की कहानी है। एक की कलम शब्द-संगीत उलीचती है तो दूसरे की तूलिका रंगों से आसमां के विभिन्न कोनों को कैनवास पर उकेर देती है।एक की कला में उदासी का श्यामल रंग ढला है तो दूसरी की जिद सतरंगी धमक से सराबोर है। दोनों के दुख, स्त्री के वो शाश्वत दुख हैं, जहाँ उनके अपनों द्वारा ही उनकी कला का गला घोंटा जाता है। लंबी उदास रातों के संघर्ष के मध्य बनाई गई पहचान किसी आसमान में दर्ज होने से पहले बार-बार धरती पर पटकी जाती है। ये एक ऐसा आसमां है जो क्षितिज से दूर बस सपनों में झिलमिलाता है। छोटी बहन को बड़ी का सहारा मिलता है। पर अततः होता वही है, जो सदियों से होता आया है। परिवार और कैरियर में एक को चुनो। स्त्री के मन के कोनों को खंगालती कहानी अपने कहन से प्रभावित करती यही और उदासी के रंग में ढली कहानी पाठक को एक ऐसे मोड पर छोड़ देती है जहाँ उसे फ़ैसला करना है।

 

ममता या ममत्व एक भाव है। जिसके लिए स्त्री देह आवश्यक नहीं। यह पुरुषों में भी होता है और समाज द्वारा तिरिस्कृत  किए गए किन्नरों में भी। प्रश्नचिह्न चौराहों के ममता से वंचित किए गए किन्नरों की मार्मिक कहानी है, जो किन्नरों के जीवन की भी पड़ताल करती है। मानसिक शोषण और तिरिस्कार के अतरिक्त समाज यहाँ तक की रक्षक पुलिस द्वारा उनके दैहिक शोषण को भी कहानी छूकर गुजरती है। धनी सेठ द्वारा कूड़े में फेंकी गई बच्ची के प्रति ममता उपजती है सन्नों में और उसकी जिद पर उसकी सखियाँ स्वीटी और सिमरन भी उसे पालने का मन बना लेती हैं। तीन माताओं की बेटी खुशबू बहुत परिश्रम से पालकर योग्य बनाई जाती है। लेकिन फिर कहानी पलटती है और तिरस्कार का एक अन्य रूप सामने आता है। कहानी का मार्मिक अंत कई सारे सवाल छोड़ जाता है।

इच्छा मृत्यु (यूथेनेशिया) हमेशा विवाद में रही है। लेकिन जैन धर्म में संथारा (या सल्लेखना) एक पवित्र, स्वेच्छिक व्रत है, जिसमें बुढ़ापे या लाइलाज बीमारी में गुरु की आज्ञा से व्यक्ति मृत्यु के निकट होने पर अन्न-जल का धीरे-धीरे त्याग कर देता है। यह आत्महत्या नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि, कर्मों के नाश और मोक्ष प्राप्त करने का आध्यात्मिक मार्ग है। इसी प्रथा के एक अन्य प्रकार में हंस सम्मान से सम्मानित कहानी आलोक रंजन की “तलईकूतल” पढ़ी थी। रोंगटे कंपा देने वाली इस प्रक्रिया का अलग रूप है “मृत्यु उत्सव”। जिसमें लेखिका सत्य घटना पर आधारित कहानी का डिसक्लेमर भी देती है। इस कहानी की अवांतर कथा मुझे कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण लगी जो घर -परिवार की जिम्मेदारियों में अपनी सेहत का ध्यान न देने वाली महिलाओं को रेखांकित करती है। असहनीय पीड़ा से गुजरते हुए संथारा लेती नायिका मंजुला भले ही आध्यात्मिक ऊंचाइयों से समृद्ध किसी अनदेखे लोक में पहुँच जाती हो पर उसे समय-समय पर अपनी सेहत के प्रति जागरूक करती आँसुओं से डूबी शालिनी के साथ पाठक मायूस खड़ा रह जाता है।

कभी-कभी मन की शाख पर प्रेम के किल्ले फूटते है पर कोई आकार नहीं ले पाते। दोस्ती के साये में मन पर खींची ये लकीरें समानांतर रेखाओं के रूप में बरसों बरस साथ चलती रहती हैं। इसीलिए   शीर्षक कहानी “दूर कहीं अनागत में” डिमेंशिया की शिकार राशि के बच्चे उसके दोस्त को ऑस्ट्रेलिया बुलाते हैं। ताकि स्मृति की छूटी रेखाएँ कहीं किसी अनागत पर मिल सकें।

स्त्री विमर्श को साथ लेकर चलती “फ्राइडे नाइट” स्त्री विमर्श के लिए कार्य करती दो सहेलियों सिमरन और अंकिता की कहानी है। जिनके स्त्री विमर्श के तरीके अलग-अलग हैं, जो कभी-कभी तकरार का विषय भी बन जाते हैं। आगे खुलती हुई कहानी  बताती है कि हर किसी का विमर्श उसके अनुभव और परिस्थितियों से आता है। कहानी भूटान के जीवन, रहन-सहन के साथ कई ऐसे दुराग्रह पूर्ण कानूनों को भी इंगित करती है। जैसे भूटान में दूसरे देश से शादी करके आए पुरुष को नौकरी में प्रमोशन नहीं मिलेगा या मुफ़्त शिक्षा पाए युवकों को 5 साल तक भूटान सरकर के अधीन काम करना पड़ता है। कैसे एक खराब विवाह का असर बच्चों पर पड़ता है और बच्चे शादी से विमुख हो जाते हैं। ये कहानी फ्राइडे नाइट सी है, जो आम तौर पर कॉर्पोरेट में काम करने वालों के लिए सुकून का सबब होती है पर किसी के लिए यादों की वीथिकाओं में भटकने का दुस्वप्न भी।

 

आखिर कहानी “मयूरपंखी खवाइशें” एक ऐसी कुशाग्र बुद्धि वाली लड़की कि कहानी है, जिसका विवाह कम उम्र में कर दिया जाता है पर एक उम्र गुजरने के बाद वह फिर अपने सपनों कि कमान अपने हाथ में लेती है और अपने बच्चों के साथ अपनी उड़ान भी सुनिश्चित करती है। कहानी में ज्योतिषी वाला प्रसंग कैसे एक हारी हुई लड़की के लिए मोटिवेशनल कोट का काम करता है, देखना सुखद है। ज़िंदगी के बड़े फैसले के बीज कई बार छोटी कही सुनी बातों में होते हैं। “धूसर शाम के परिदृश्य में” में कहानी पुरुष विमर्श पर केंद्रित है। यहाँ एक पुरुष का जीवन उसकी पत्नी के शक करने के कारण छिन्न-भिन्न हो जाता है। कहते हैं कि शक की दवा तो हकीम लुकमान के पास भी नहीं थी, फिर क्या पति और पत्नी। एक व्यक्ति जो विध्यालय को, समाज को दिशा दे रहा था, अपने में ही खोल में कैद हो जाता है। कहानी एक व्यथा से मोड़ लेकर भले ही अंत की ओर जाती है पर क्या शक किसी और का नाम रूप लेकर पत्नी के जीवन में दाखिल नहीं होगा ? उम्मीद कम ही है।

अंत में यही कहूँगी कि भावना प्रकाशन से प्रकाशित 13 कहानियों से सुसज्जित 143 पेज के इस संग्रह की तिब्बत, सिलिगुढी, दार्जिलिंग, और विदेश के परिवेश को समेटे हुई कहानियाँ मुख्यतः स्त्री जीवन की जकड़नों को मुक्त करने की तफ़सीलें हैं। परिवार, समाज, धर्म, रूढ़ियों से टकराती ये महिलायें ‘दूर किसी अनागत मैं” समता, समानता मूलक समाज का स्वप्न देखती हैं। लेखिका की भाषा इस संग्रह का प्लस पॉइंट है। छोटे-छोटे पर सुंदर वाक्य प्रभावित करते हैं। पहले संग्रह के लिए लेखिका को बधाई  और भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ

वंदना बाजपेयी

वंदना बाजपेयी

यह भी पढ़ें –

विशोका – राधा के किसना का श्रीकृष्ण हो जाना

खरगांव का चौक- मृत्यु के हाहाकार से सहकारिता की किलकारी तक खेत, खलिहान, किसान

असम्भावना में सम्भावना का आख्यान – लौ

विहान की आहट -अंधेरे से उजाले की ओर ले जाती कहानियाँ

आपको समीक्षात्मक लेख “दूर किसी अनागत में- काव्यात्मक भाषा में ठोस कहानियाँ” कैसा लगा ? अपनी प्रतिक्रिया से हमें अवश्य अवगत कराएँ । अगर आपको अटूट बंधन का काम अच्छा लगता है तो कृपया साइट को सबस्क्राइब करें व अटूट बंधन फ़ेसबुक पेज लाइक करें । आप सहयोग हमें बेहतर काम करने की प्रेरणा देगा ।

 

 

Share on Social Media

Leave a Comment

error:
WordPress Repository Meritking Giriş: Meritking Giriş Adresi Marsbahis Giriş: Marsbahis Güvenilir Mi Mavibet Giriş: Mavibet Para Yatırma Ve Çekme İşlemleri कुल्हड़ भर इश्क -बनारसी प्रेम कथा नव वर्ष यानी आपके हाथ में हैं नए 365 दिन माउथ ऑर्गन –किस्सों के आरोह-अवरोह की मधुर धुन Paymaster – Multipurpose Payment Gateway WooCommerce Product Slider for Elementor WP Mega Pack for News, Blog and Magazine – All you need Responsive Searchable 3 Level Accordion For WordPress Instagram Theatre Responsive Searchable 3 Level Accordion For WordPress YOORI eCommerce | Single & Multi-Vendor PWA Marketplace CMS Multi-Vendor SMS Notification for WooCommerce Grace — WordPress Photo Feed of Instagram Posts Alipay Cross Border Online Payment