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छोटे बेटे की सूझ – बूझ

बहुत समय पहले की बात है | एक किसान था | उसके दो बेटे थे | तीनो मिलकर खेती किया करते थे | उनका घर धन – धन्य से भरपूर था | समय के साथ किसान बूढ़ा हुआ | उसने अपना खेत छोटे बेटे को देने का फैसला किया | और बड़े बेटे को उसके एवज में धन | यह सुनकर बड़ा बेटा नाराज़ हो गया | उसने  कहा ,” पिताजी ये तो सरासर अन्याय है | ये सही है की हम सब इस खेत से ही जीवन यापन करते रहे हैं | परन्तु मैंने छोटे से ज्यादा साल खेत पर काम किया है | क्योंकि वो मुझसे उम्र में छोटा है | यानी की मेरे “कार्य दिवस ”   उससे ज्यादा हैं | इस हिसाब से मुझे खेत मिलना चाहिए |

किसान ने उसे समझाते हुए कहा ,” देखो बेटा ये खेत मेरे बच्चे से भी बढ़कर है | मैं चाहता हूँ मेरे बाद ये और फूले फले | कार्य दिवस तुम्हारे ज्यादा होते हुए भी मैंने योग्य पुत्र का चयन किया | जो मेरे खेत का ध्यान बेहतर रख सकेगा | तुम्हें खाने पीने की दिक्कत न हो इसलिए तुम्हें धन दिया है |

अब बड़े बेटा खुद पर काबू न रख सका | वह जोर से बोला ,” पिताजी आपने छोटे को मुझ से ज्यादा योग्य कैसे समझ लिया | देखा जाए तो मैं उससे बड़ा हूँ | अनुभव मुझे ज्यादा है | मैं ज्यादा योग्य हूँ |

किसान बोला ,”मैंने बहुत सोंच समझ कर निर्णय  लिया है | फिर भी अगर तुम चाहतें हो की दूध का दूध और पानी का पानी हो  | तो मैं एक परीक्षा लेता हूँ | पहले तुम से शुरू करता हूँ | तुम्हें करना यह है की मेरे मित्र सुबोध के फार्म में जा कर पता लगाना है की वहां कितनी गाये बिकने योग्य हैं | प्रश् सुनते ही बड़ा बेटा खुश हो गया | वो सुबोध के खेत में गया और १० मिनट में ही लौट आया | उसने पिता से कहा ,” पिताजी वहां ६ गायें बिकने योग्य हैं |

फिर किसान ने छोटे बेटे को बुलाया |और उसे भी यही काम दिया | वो भी वहां गया | लौटकर बोला ,” पिताजी वहां ६ गायें बिकने योग्य हैं | जिसमें चार काली और दो सफ़ेद हैं | दो काली और एक सफ़ेद गाय सबसे ज्यादा हष्ट  – पुष्ट है | एक गाय की कीमत दो हजार  रुपये हैं | सुबोध चाचाजी का कहना है की एक से ज्यादा गाय खरीदने पर वो प्रति गाय सौ रूपये कमिशन देंगे | हाँ अगर हम इंतज़ार कर सकते हैं तो अगले हफ्ते बढ़िया जर्सी गाय आ रही हैं | लेंकिन अगर  हमें जल्दी है तो वो कल शाम  तक गाय पहुंचा देंगे |

छोटे बेटे का उत्तर सुनने के बाद किसान ने बड़े बेटे की तरफ देखा | उसने सर झुका लिया | वह समझ गया की केवल काम करना ही पर्याप्त नहीं होता | काम को इस तरीके से एक बार में ही करना है  जिससे बार – बार न जाना पड़े |

दोस्तों , हम अक्सरआपने देखा होगा की काम करने वाले दो व्यक्ति बराबर से सफल नहीं होते हैं | इसका कारण होता है | कुछ लोग उतना ही काम करते हैं जितना उनको दिया जाता है | पर कुछ लोग आगे की सोंचते हैं, ज्यादा काम करते हैं  और पूरी जानकारी करके योजना बनाते हैं | निश्चित तौर पर वही सफल होते हैं | 

सरिता जैन

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