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रिश्तों का अटूट बंधन

रिश्तों का अटूट बंधन

बाबा
कितने दिन , महीने बरस बीत गए
जब बांधा था तुमने
ये अटूट बंधन
एक अपरिचित अनजान से
और मैं घबराई सी
माँ की दी शिक्षाएं
और तुम्हारे दिए उपहार
बाँध कर ले चली थी उस घर
जिसे सब मेरा अपना बताते थे

वहां न जाने कितने अटूट बंधनों से
 बंध  गयी मैं
 कितने रिश्तों के नामों में
 ढल गयी मैं
न जाने कब , ये घर अपना हो गया
और वो घर मायका हो गया
बाबा न जाने
कब खर्च हो गए
तुम्हारे दिए उपहार
पर माँ की दी हुई थाती
आज भी सुरक्षित है
मेरे पास
जो संभालती है , सहेजती है हर पग पर
और बनाए रखती है
इस घर को अटूट 

उम्र की पायदाने चढ़ते हुए
न जाने कब
मैं आ गयी माँ की जगह
और बेटी
मेरी जगह
जो खड़ी  है उस देहरी पर
जहाँ से ये घर हो जाएगा मायका
और वो अपना घर
आज निकालूंगी फिर से वही पोटली
जो माँ तुम ने दी थी मुझे
विदा के वक्त
जानती हूँ
नहीं काम आयेंगे उसे भी पिता के दिए उपहार
काम आएगी तो बस
तुम्हारी  दी हुई थाती
जो पहुँचती रही है
एक पीढ़ी से
दूसरी पीढ़ी तक
और बनाती रही है
रिश्तों के अटूट बंधन 

नीलम गुप्ता

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जिस तरह एक स्वस्थ रिश्ते की नींव आपसी विश्वास और समझदारी पर टिकी होती है, उसी तरह परिवार की आर्थिक सेहत के लिए भी सूचित और सतर्क फ़ैसले ज़रूरी हैं। डिजिटल युग में नए-नए वित्तीय विकल्प लगातार उभर रहे हैं, और जो लोग इनकी बारीकियों को समझना चाहते हैं, वे अक्सर bitcoin sázení जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी पढ़ते हैं। हालाँकि, यह कभी न भूलें कि सट्टेबाज़ी में हमेशा जोखिम शामिल होता है और इसे कभी भी आय या पैसा कमाने के भरोसेमंद साधन के रूप में नहीं देखना चाहिए — बेहतर यही है कि ऐसे विकल्पों में केवल उतना ही शामिल हों, जितना आप खोने का खर्च उठा सकते हैं, और ज़रूरत पड़ने पर किसी जानकार से सलाह ज़रूर लें।