“बुढऊ देख रहें हो न हमारे हँसते-खेलते घर की हालत!” कभी यही
आशियाना गुलजार हुआ करता था! आज देखो खंडहर में तब्दील हो गया|”
है! वह क्यों भला यहाँ की देखभाल करते|”
खंडहर में वे अपने लाडलो के साथ बीते समय को भला कैसे भुला यहाँ से विदा होतें!
दुनिया से विदा हो गये तो क्या?”
लम्बी सी आह भरी आवाज गूंजी
कल इसका कोई खरीदार आया था, पर बात न बनी चला
गया! बगल वाले जेठ के घर पर भी उसकी निगाह लगी थी|”
की आवाज गूंज उठी वातावरण में
बच्चों को ले जाने आया है …!”
दिए वर्ना इस खंडहर की तरह हमारे भी …..|”
