मजबूरी

मजबूरी
जैसे एक झूठ  की वजह से सौ झूठ बोलने पड़ते हैं वैसे ही एक गलत कदम  कारण एक के बाद एक कई गलत कदम उठ  जाते हैं | जिन्दगी की पूरी धरा ही बदल जाती है | मजबूरी चंदा की भी थी और शिवम् की भी | आखिर शिवम् ने ऐसा क्या गलत कदम उठाया कि उसकी मजबूरी का सिलसिला बढ़ता ही चला गया | आइये जानते हैं कहानी मजबूरी में 
मजबूरी 

चंदा ओ चंदा सरला की आवाज में गुस्सा था, चंदा दौड़कर आई जी बोलिए,बस शुरू हो गई सरला, आज तूने अभी तक क्या किया है घर कितना बिखरा पड़ा है डस्टिंग नहीं हुई, सब्जी साफ नहीं की, बाथरूम गंदे पड़े हैं आखिर तू कर क्या रही है अभी तक। चंदा रोने लगी।रोता देखकर एक मिनट को सरला भी सहम गई क्या हुआ? अपने गुस्से को शांत करके चंदा को पानी पिलाया। फिर प्यार से पूछा क्यों रो रही हो। बात सुनकर सरला भी तनाव में आ गई। पड़ोस में रहने वाले बड़ी उम्र के शर्मा जी ने चंदा को लिफ्ट में गलत तरीके से छूने की कोशिश की थी यह सुनकर सरला ने अपने पति को फ़ोन किया और बात बताई।
घर आकर देखते हैं कहते हुए दिनेश ने फोन रख दिया।शाम को जब दिनेश घर आया तो शर्मा जी नीचे  ही मिल गये बोले यार तुम अपनी नौकरानी को समझाते नहीं हो कि बड़ों से कैसे बात करनी चाहिए।दिनेश सकते में आ गया अरे ये क्या यहां तो माजरा ही अलग है।उपर आकर सरला को बताया कि शर्मा जी ऐसा बोल रहे थे।सरला ने चंदा को पूछा कि तुमने क्या बोल दिया??, लेकिन चंदा की बात सुनकर सरला भी परेशान होकर शर्मा जी के यहां जाने की जरूरत महसूस कर रही थी। उसने जाकर पूछा आपने हाथ क्यों लगाया चंदा को??? 
शर्मा ने मना कर दिया मैंने कुछ नहीं किया। एक थप्पड़ जड़ दिया सरला ने बगैर सोचे। और घर आ गई। थोड़ी देर बाद प्यार से पूछने पर चंदा ने बताया कि शर्मा जी ने मेरी छाती पर हाथ रख दिया था इसलिए मैंने हाथ उठाया।शाबाश सरला ख़ुश होकर बोली। आगे से भी ये ही करना।
एक दिन सरला ने चंदा की शादी की बात चंदा के जीजाजी से करने का फैसला लिया। क्योंकि चंदा की बहन डिलेवरी में बच्चे को जन्म देकर भगवान को प्यारी हो गई थी।सो बच्चे को सम्हालने और बहन का घर बसाने का फैसला लिया ।अब सरला ने थोड़ी हेल्प लेकर और थोड़ा अपना पैसा लगाकर शादी की तैयारी की। वक्त आने पर शादी करके चंदा ससुराल आ गई ।अपनी बहन की जगह लेने में थोड़ा वक्त लगेगा यही सोचते हुए एक हफ्ता बीत गया। जीजाजी में पति को देखना,सहज नहीं था।रात को सोने के लिए अपना बिस्तर लगा रहे जीजाजी को देखते हुए चंदा सोचने लगी कि यह क्या हो रहा है। धीरे से बोली आप उपर सो जाइए मैं नीचे  सो जाउंगी। मनाने पर मान गया मधुर।
रात को थोड़ी देर बाद मधुर उपर आ गया चंदा के साथ सोने के लिए आखिर पुरुष था अपने पुरुषत्व को नीचा  नहीं दिखा सकता था।सुबह अलसाई हुई चंदा उठी और नहाने चली गई बदन टूट रहा था।नल के नीचे खड़ी हो गई,सारे अरमान जो शिवम् के साथ रहने के लिए सजाए थे,सब बिखर गए थे।शिवम् किराने की दुकान चलाता था,जब चंदा सामान लाने जाती थी,तब बातों में अपना प्रेम प्रगट कर चुका था। लेकिन सरला का कहना मानकर जीजाजी से शादी का फैसला मन मारकर लिया था चंदा ने।
थोड़े दिन बाद चंदा सरला के घर आईं। सरला ने गरम पकोड़े,और चाय लाने के लिए चंदा को आवाज दी।बुझी हुई चंदा और भी चुप हो गई थी। अब तो सामान लाने के लिए भी आनाकानी करने लगी। लेकिन कब तक नहीं जाती।एक दिन दुकान पर जाकर सामान की लिस्ट शिवम् को देकर‌ नजरें हटा लीं उसने, लेकिन आंखों में आसूं आ ही गये। शिवम् ने भी देखकर कुछ कहना चाहा मगर और भी लोग खड़े थे,सो चुप ही रहा।
१५ दिन में बहुत बार जाना हुआ दुकान पर। लेकिन कोई बात नहीं हुई शादी के बारे में।आज तो बात करूंगी यह सोचकर दुकान से थोड़ी दूर जाकर खड़ी हो गई और इशारे से शिवम् को बुलाया और अपने मन की बात कही कि तुम्हारे साथ शादी करना चाहती थी बचपन से आ रही हूं तुम्हारी दुकान पर लेकिन ना तुमने कुछ कहा ना मैंने कुछ बोला।
सुनकर शिवम् बहुत उदास हो गया अब तो कुछ नहीं होगा। तुम खुश रहो बोलकर चला गया।दो साल बीत गए।अब बच्चा चलने लगा था।एक दिन घर के बाहर खेल रहा था एक लड़का आकर बच्चे को उठा कर ले गया। चंदा को जब काम खत्म होने पर ख्याल आया कि मुन्ना कहां है सो बाहर भागी लेकिन मुन्ना नहीं मिला थोड़ी देर बाद जब ढूंढते हुए थक‌ गई तो पति को फ़ोन किया और बताया कि मुन्ना नहीं मिला कोई उठा ले गया है। दोनों पुलिस को रिपोर्ट लिखवाने थाने जाने लगे। रास्ते में भीड़ थी देखा कि कोई दुर्घटना हुई है।अरे
यह तो मुन्ना है और साथ में शिवम् ।चंदा को कुछ नहीं सूझा उसने मुन्ना को गोद में उठा लिया और हिलाने लगी आवाज दी लेकिन वह भगवान को प्यारा हो गया था। शिवम् को किसी ने अस्पताल पहुंचाया। थोड़े दिन बाद शिवम् ठीक हो गया। 
उसने चंदा के दूर चले जाने के बाद अपनी दुकान बन्द कर दी थी। कोई काम नहीं कर सकता था।सो खर्च बढ़ने से गलत लोगों के संगत में पड़ गया। बच्चों को अपहरण करके उनकी किडनी निकालने बेचने का काम किया करता ।उसको मलाल था कि चंदा को उसकी वजह से कितना दुःख हुआ है लेकिन पैसे की कमी और खर्च ज्यादा होने से बच्चों को उठाकर किडनी निकालने बेचने वाले गिरोह से सम्बन्ध होने की वजह से आज शिवम् को कितना कुछ देखना पड़ा।
रात को नींद नहीं आ रही थी बहुत सोचने के बाद अस्पताल में उपर छत पर जाकर नीचे छलांग लगा दी और अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। ग़रीबी के कारण क्या,क्या नहीं सहना पड़ता है लोगों को। अपने से प्यार करने वाले से ना शादी की,। जैसा मालकिन ने कहा किया चंदा ने ।
और ना अपना बच्चा पैदा किया और ना अपनी बहन के बेटे को बचा पाई।और शिवम् ने गलत काम की वजह से कलंक लगा कर जीवन लीला समाप्त कर ली।एक मजबूरी दूसरी मजबूरी को जन्म देती है शायद। 
प्रेमलता तोंगिया 


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