की भी फुरसत नहीं मिल रही थी । जाने कहाँ से ये मरीजों का छत्ता टूटकर भिनभिना रहा
था ।हालाँकि किसी भी डाक्टर को मरीज बुरे नहीं लगते लेकिन आज अक्की आने वाली थी और
मैं उसे तसल्ली से चेक करना चाहता था । जब से सुबह उसकी माँ से बात हुई थी मैं
असमंजस में था ।उसके एक हाथ को दो महीने पहले मगरमच्छ चबा गया है और वो गहरे सदमे
में मानों गुम सी हो गयी है, ये सुनकर ही मेरे दिमाग के सारे पाइप टपर-टप-टप करने लगे थे ।
संवेदनशील और संयमी हो सकती है कोई सोच भी नहीं सकता ।कोई क्या !!!! मैं खुद भी तो
उसे छ सालों से जानता हूँ पर कभी उसके जीवन को पढ़ नहीं पाया ।
इतना जरुर महसूस
किया था की छ साल पहले अक्की ने जब मेरे अस्पताल में ज्वाइन किया था वो बड़ी हंसमुख
थी । गोरा रंग, भूरी आँखे , घुंघराले भूरे बाल जो उसके कद से भी लम्बे लगते थे । खुद को बहुत गंभीर और
मैच्योर दिखाने के लिए वो कभी कभी जीरो नम्बर का चश्मा पहनती थी और चाइल्ड पेशंट्स के साथ मस्ती करते पाए जाने पर मासूमियत का ऐसा भयंकर नाटक करती थी की नारद भी
शर्मा जाए ।
कुलीग्स के साथ भी वो ऐसे घुल मिल गयी थी जैसे बरसों पुरानी यारी हो । किसी का
जन्मदिन हो या शादी की सालगिरह , कोई गमी हो या सास बहू टॉपिक , उसके पास सब सुलझाने का समय था । हाँ ,मुझे अच्छे से याद है सास बहु टॉपिक को वो नॉनसेंस टॉपिक कहती थी और अपने
दिमाग की सारी खुराफंते अपनी बहू दोस्तों को सिखाती थी ।
।जब भी इन्स्पेक्शन के लिए निकलता था वो हमेशा अस्पताल के किसी न किसी हिस्से में
शरारती चश्मा लगाए , अपने लम्बे बालो से लगभग पोंछा मारती हुई दिख
जाती ।उसका पांच फुटा साइज कभी भी उसके चार फुटे बालों का साथ नहीं देता था ।उसे
देख कर कभी-कभी मैं भी भ्रम में पड़ जाता था की क्या इसने सचमुच डाक्टरी पढ़ी है, इसे तो जोकर होना चाहिए था ।
उसकी सुन्दरता का बखान किया हो । जेंट्स तो छोड़ो मुझे तो किसी लेडिस डाक्टर का भी
कोई कमेन्ट याद नहीं आता लेकिन फिर भी वो सबकी चहेती थी ।
हुई थी ।हम सभी उसकी शादी में गए थे । हमारी पांच फुटी अक्की को छ फिटा लड़का मिला
था । रंग अक्की से कुछ दबा हुआ था लेकिन मूंछो और बढिया फिजिक के चलते एकदम अनिल
कपूर लुक दे रहा था । शादी के कुछ दिनों के अंदर ही अंदर अक्की का रंग रूप गजब का
निखर आया था । उसको देख कर लगता था जैसे विश्व विजयनी आ रही हो ……आह !! मैं भी
क्या – क्या सोचने लगा ! पर उसका इलाज करने से पहले उसके साथ हुए हादसे के बारे
में जानना जरुरी भी तो है । हूँ …….सबसे पहले उसके परिवार के साथ -साथ उस
चचेरी बहन से भी मिल कर देखता हूँ ।।
देखने का काम अपने एक जूनियर पर छोड़ कर उसे अटैंड करने शल्य चिकित्सा विभाग की ओर
चल दिया ।
शरीर पहले से आधा भी नहीं रह गया था और जब ….जब मैंने उसे सामने से देखा
…….ओह !! अक्की ये क्या हुआ ? ऐसा कहकर मैं चीखना चाहता था , पैर पटकना चाहता था लेकिन मेरी जुबाँ गले के भीतर ही घुट गयी थी और पैर जमीं
में धंस गए थे ।उसकी शरारती आँखों के आस -पास काले घेरों ने काला चश्मा बना लिया
था । गोरा रंग पीलपिली सफेदी में तब्दील हो चुका था ।वो गली के कोने पर बने उस
झोपड़े सी जर-जर दिख रही थी जिसे आंधी से भी ज्यादा एक फूंक में ढह जाने का डर हो ।
सीधे हाथ का आकार लगभग टेढ़ा हो चुका था , मगरमच्छ ने पुरे मांस को खा लिया था । अब वहां बचा था तो बस हड्डी का डंडा , जिस पर पतली चमड़ी मानो अनेको टांको के साथ अपने
दर्द की शिकायत कर रही हो ।उसका वो अंगूठा जिससे वो साथी दोस्तों को ” ऐ ssssssssss” करके चिड़ाती थी , इस हादसे में उससे नाता तोड़ चुका था ।
कंकाली आँखों के पोर भीग गए और फटे सूखे होंठ कांपने लगे । अस्थियों के इस ढेर से
मैं क्या पूछता ? उसे तो खुद सहारे की जरूरत थी और यूँ भी मैं
उसके ज़ख्म कुरेदना नहीं चाहता था । थोड़ी बहुत यहाँ वहां की बाते करके , हाथ का निरक्षण करके उसे मैंने रूम में शिफ्ट
करवा दिया । उसके हाथ की अवस्था सुधारने के लिए कम से कम चार बार प्लास्टिक सर्जरी
की जरूरत थी और मन की सर्जरी के लिए कितने आपरेशन करने पड़ेगे , ये मैं खुद भी नहीं जानता था ।
मैंने उसकी चचेरी
बहन निशा को बुलवा लिया था । निशा आई तो मैं सीधे उसे साइक्लोजिस्ट वैभव के रूम
में ही ले गया । मैं चाहता था की वैभव भी सारी बात जान ले और आज से ही अक्की को
देखना शुरू भी कर दे ।
भी जानती हो शुरू से हमें बताओ । “
के बारे में वहां से बताऊँ , जहाँ से इस प्रेम की जमीन में बीज पड़ा था ?”
बारे में जितनी ज्यादा मालूमात होगी उसे हैंडल करने में उतनी ही आसानी होगी । वैसे
आप किस प्रेम के बारे में बता रही है ?” वैभव ने निशा और मुझे बैठने का इशारा करते हुए
कहा
……………………………………
जान ले रही है और ऊपर से ये साला गुमनाम आशिक़ ” पैंथर ” । निशा चिड़ते हुए बोली
ब्लैक स्केच पैन से लिखा है ” आई लव यू अक्की , आई लव यू अक्की !! कहीं दिल बना कर तो कहीं
गुलाब और नीचे लिखा है
” पैंथर“
पर-ब्लैक बोर्ड पर – दीवारों पर चौक से लिख रहा था जिसे हम साफ़ कर लेते हैं लेकिन
अब इस स्केच पैन को कैसे साफ़ करेंगे ???? निशा घबरा सी गयी
में तो मेरा नाम आकांक्षा है और अक्की नाम किसी को मालूम नहीं है । क्लास से साफ़
करना इसलिए जरुरी है क्यूंकि रोज एक ही नाम के लैटर देखकर इन्कयूआरी होगी और फिर
सबको पता चल जाएगा की ये झोल मेरे कारण चल रहा है ” अक्की बोली
नहीं है । पर यहाँ लोचा इस बात का है की हम उसे जानते ही नहीं है जो तुझ पर मर
मिटा है !
” निशा आहें भरने का
नाटक करती हुई बोली
मारूं सौ और गिनू एक
”
निशा आँख मारते
हुए बोली और जब दोनों क्लास रूम पहुंची तो…….
हालत और ये लैटर……
“सिर्फ तुम“
निधि जोर से
चिल्लाई
सब बताउंगी ।
” अक्की ने निधि का
मुहँ भिचते हुए कहा
जरुरी हो गया था । इतना तो दोनो को पक्का लग रहा था की ये जो कोई भी है करीबी है , लेकिन कौन ?? अब उन दोनों की नजरे हर करीबी लड़के को शक से देखती और जासूसी चलती रहती ।तभी
एक दिन ……
घर पर नहीं थे और अंजन उनका इन्तजार कर रहा था ।अक्की वहां से गुजरी तो उसकी नजर
अंजन के गिटार बैग पर गयी , उस पर ठीक वैसे ही पैंथर लिखा था जैसे लेटर्स
में लिखा होता था ।उसने अंजन को बहाने से भईया के कमरे में बिठा दिया ,फिर उसका गिटार बैग और स्कूल बैग चैक किया ।
अक्की ये देख कर स्तब्ध रह गयी की बैग उसकी तस्वीरों से भरा था । लगभग साल भर से
हुए स्कूल के हर समारोह की फोटोज थी , अक्की इनाम लेते हुए-अक्की रंगोली बनाते हुए-
अक्की एन सी सी के बच्चों को कमांड करते हुए – अक्की नोटिस बोर्ड लिखते हुए – और
भी जाने कब – कब की…..लेकिन अक्की अब भी पूरी तरह आश्वस्त होना चाहती थी इसलिए
वो रूम में गयी ..
रूककर अक्की की ओर देखा ….. उसका राज खुल गया था ……दोनों की नजरे पहली बार
एक दूसरे से मिली और फिर जमीन पर मानो चव्वनी ढूंढने लगीं ।
हो रही हूँ , आपने……” इससे पहले की अक्की कुछ बोलती अंजन बोल पड़ा ।
फिलिंग्स पहुँचाना भी चाहता था । क्या तुम मुझसे शादी करोगी ?”
रुकी ।मारे शर्म के उसने अपना चेहरा अपनी ही हथेलियों में छिपा लिया । कानों में
बार-बार गूंज रहा था *अक्की आई लव यू, अक्की आई लव यू* । दिल राजधानी के ट्रैक पर दौड़ रहा था और हाथ पाँव पसीने
पसीने हो गए थे ।
ब्रिलियंट था की कौन सी किताब में कौन सा वाक्य किस पेज पर है तुरंत बता सकता था ।
ज्यादातर लडकियां
उसकी दीवानी थी और
उसकी फिजिक को देखकर आहें भरती थीं और वही अंजन मुझ पर मर मिटा है । हे राम , अब वो कैसे अंजन से नजरे मिलाएगी ?
यहाँ वहाँ छिपती फिरती थी । स्कूल में सभी लड़कियों को उनके बारे में पता चल गया था
और वो अक्की को छेड़ती रहती थी , ” अरे हममें क्या घुन लगा है वो हमें नहीं देखता और तू उसे ” “आए हाए मरुस्थल की चिड़िया जरा चूँ चूँ तो कर दो ” “यार कब तक उसे धक्के खिलवाएगी ? अब बात कर भी ले” “उफ़्फ़ आशिक हो तो अंजन जैसा हाय मर जांवा चीनी
(अक्की) खाके
“और भी जाने
क्या-क्या….
में उसके सामीप्य के सपने पिरोती । कभी उसके और अपने दाम्पत्य जीवन के चित्र
उकेरती और उन में प्यार के रंग भरती तो कभी डायरी में सैकड़ों बार अंजन – अंजन की
माला छापती ।
इजहार अब भी जारी था लेकिन तरीका बदल गया था । अब चिट्टी लेकर निशा कबूतरी जाने
लगी और जवाबी पर्ची भी लाने लगी । अंजन कभी लिखता ” कल तुम्हारी छोटी ननद के लिए लहंगा खरीदने गए
थे , जानती हो अक्की लहंगा देखकर मैं सोच रहा था अगर
इसको तुम पहनती तो परी लगती “ तो कभी
लिए बहुत से जेवर और साड़ियाँ सँजो कर रखी हुई है , तुमको उन सब चीजों मे देखने के
लिए मैं बेताब रहता हूँ । हाँ मम्मा थोड़ी गुस्सैल हैं और दीदी उनकी चमची लेकिन
मुझे पता है तुम इतनी प्यारी हो की कोई भी हमारी शादी के लिए ना नहीं कहेगा । “
के सारे दोस्त अक्की के पास से गुजरते तो ” नमस्ते भाभी ” कहकर जाते ।खुद के लिए भाभी सुनकर अक्की रोमांच
से भर जाती और सपनो में गोते खाती फिरती ।आखिर एक दिन निशा ने धोखे से दोनों को एक
रेस्टोरेंट में मिलवा ही दिया । अक्की अब भाग भी नहीं सकती थी, मन को मुट्ठी में दबाए वो अंजन के सामने बैठ
गयी ।
करो । हम बोर्ड के बाद मिलेंगे और हाँ अब लैटर भी बोर्ड के बाद लिखूंगा । हमें
बिना समय गवाएँ जल्द से जल्द डाक्टर बनना है ताकि हम एक हो सकें ।।
शादी भी हो गयी ।अब एक तरफ प्यार की गहरी , ठण्डी बयार बह रही थी तो एक तरफ अक्की की नई परीक्षा चल रही थी । अक्की
शाकाहारी थी और अंजन का परिवार माँसाहारी लेकिन अक्की के प्यार में इन सब की जगह
नहीं थी उसने मन से माँस खाना और बनाना सीखा ।जैन परिवार से होने के बावजूद उसने
अंजन के बिहारी संस्कारों को पूरी तरह अपनाया ।
ननदे उससे कभी खुश ना रहती लेकिन अपने अंजन के लिए उसे सब मंजूर था ।उसके आँखों के
रेटिना से लेकर दिल तक अंजन खुदा हुआ था और अंजन के भी मस्तिष्क की एक -एक ग्रंथि
अक्की हार्मोंस से चलती थी । अंजन परिवार के हर बुरे बर्ताव के समय अक्की के साथ
रहा और अक्की को कभी टूटने नहीं दिया । उसने कभी अक्की के खिलाफ अपशब्दों को
बर्दाश्त नहीं किया और विद्रोह से नहीं बल्कि अन्य रास्तों से अक्की को मन से
अपनाने का दवाब बनाया । धीरे -धीरे अक्की का संयम और अंजन का साथ काम करने लगा और
परिवार ने अक्की को अपनाना शुरू कर दिया ।
सामंजस्य बैठाने के बाद दोनों का प्रेम और भी परवान चढ़ने लगा । शादी के झंझटो के
चलते दोनों अब तक कहीं ठीक से घूमने नहीं जा सके थे इसलिए सुंदर वन जाने का
प्रोग्राम बना ।
बाकी थी । सुंदर वन में समुन्द्र के पास घूमते हुए अक्की सावधानी से चूक गयी और
मगरमच्छ ने उसका हाथ पकड लिया , अंजन पूरी ताकत से उस पानी के राक्षस से भीड़ गया । मगरमच्छ के मुहँ से हाथ
निकालने की जद्दों जहद में अक्की तो बच गयी लेकिन मगरमच्छ ने अंजन को पानी के भीतर
खींच लिया । अक्की की आँखों के सामने ही उसकी मोहब्बत चीथड़े-चीथड़े हो गयी । वो
चौड़ा सीना जिस पर वो सिर रखकर अपनी क़िस्मत पर इतराती थी , अंजर पंजर हो लहु में भीगा लोथड़ा बन गया था । अक्की ने कब होश खोये और कब उसे बचाया गया
उसे कुछ नहीं पता चला । जब आँख खुली तो वो अस्पताल में थी और अंजन को याद करते ही
कोमा में चली गयी । पचीस दिन कोमा में रहने के बाद होश तो आ गया लेकिन मन मस्तिष्क
जैसे शून्य हो गया ।
है । मुझे उम्मीद नहीं की अपने अंजन के बिना अक्की ज्यादा जी भी पाएगी और जाने
कैसे मेरे गाल गर्म बारिश से भीगने लगे …………किसी तरह मैंने अपने फ्रिज
हुए शरीर को धक्का मारते हुए अपने केबिन की कुर्सी पर पटक दिया …………
