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सकारात्मक चिंतन और व्यक्तित्व विकास एक ही सिक्के के दो पहलू

सकारात्मक चिंतन और व्यक्तित्व विकास एक ही सिक्के के दो पहलू हैं | जो एक साथ आतें हैं |दरसल जब लोग पर्सनाल्टी शब्द का प्रयोग करतें है तो वह इसे शारीरिक आकर्षण या सुन्दर व्यक्तित्व के रूप में लेते हैं | पर यह पर्सनालिटी का बहुत संकुचित रूप हुआ | वास्तव में पर्सनॅलिटी सिर्फ़ शारीरिक गुणों से ही नही बल्कि विचारों और व्यवहार से भी मिल कर बनती है | जो हमारे व्यवहार और समाज में हमारे समायोजन को भी निर्धारित करती है | इसका निरंतर विकास किया जा सकता है | सिर्फ सुन्दर या बुद्धिमान होना एक बात है | पर व्यक्तित्व का अर्थ है हम अपने पोस्चर ( आसन ) व् गेस्चर ( इशारों ) द्वारा अपने ज्ञान का सही उपयोग कैसे कर पातें हैं की हमारी बात प्रभावशाली लगने लगे | व्यक्तिव को निखारने का सबसे आसान व् खूबसूरत तरीका ये है की व्यक्ति अपने देखने का तरीका या नजरिया बदल दे | एक सच्चाई है की व्यक्ति अपनी आँखों से नहीं दिमाग से देखता है |

और अगर दिमाग में नकारात्मक विचार भरे हैं तो वह कभी अपने आप को या दूसरों को सही नज़रिए से नहीं देख पायेगा | नकारात्मक विचारों को दूर करते ही इन्फ़िरिओरिटी काम्प्लेक्स दूर हो जाता है और व्यक्तित्व का विकास शुरू हो जाता है | अगर आप देखे तो महात्मा गाँधी या मार्टिन लूथर किंग शारीरिक रूप से बहुत खूबसूरत नहीं थे परन्तु सकारात्मक विचारों के कारण उनका व्यक्तित्व बेहद प्रभावशाली बन गया था | अपने बारे में अच्छा सोच कर , खुद को प्यार करके , जिंदगी में ऐसे लक्ष्य बना कर जिन्हें हम पा सकें नकारात्मक विचारों पर नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है |
सकारात्मक विचार तभी आते हैं जब व्यक्ति अपने को पूर्ण रूप से स्वीकार कर ले | अपनी कमियों , अपने चेहरे के निशानों को , शारीरिक गुण-दोषों को सहजता से स्वीकार कर ले | जब व्यक्ति सकारात्मक विचारों से घिरा होता है | तो वो उर्जा के उच्च स्तर पर होता है | जिससे उसके पारस्परिक संबंध अच्छे चलते हैं | सामाजिक स्वीकार्यता किसी व्यक्ति के आत्म विश्वास को बढ़ा कर उसके व्यक्तित्व विकास के नीव की ईंट रखती है | इसके बाद सीखने की इच्छा जागृत होती है| बोलने चलने उठने बैठने के कुछ ढंगों को सीख कर व्यक्तित्व को चमत्कारी बनाया जा सकता है | कुल मिला कर देखा जाए सकारात्मक विचार व् व्यक्तित्व विकास अलग –अलग नहीं एक दूसरे के पूरक हैं |

ओमकार मणि त्रिपाठी 
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