
#तटस्थ#
वह किस तरफ है
क्योकि उसे मालूम है
वह किस तरफ है
व्यवस्था को
समाज को
खुद को भी
उसके लिये
गाली ही क्रांति है
दहाड़ता है
और जमीन पर
हांफता है
सिर्फ जमीन होती है
कविता कही नही
मै सिहरा नही
चीख उठा!!
सच बोलता है
इसलिये
कभी बोलता नही
उन्होंने
केवल पुरुषों की
हत्या की
स्त्रियों और बच्चों को
छोड़ दिया
मैंने ही महसूस किया
मै ही तड़पा
मुझी से खत्म हुआ
वह बिका नही है
इस तरह
रोज़ बेचता है
अपने ‘न बिकने’ को
इसलिये
कुछ नही करता
सिवा देशभक्ति के

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