जिंदगी में भर जाती हैं |यूँ तो अलगाव या
ब्रेकअप किसी भी रिश्ते का हो सकता है | कभी भी हो सकता है |पर कुछ रिश्ते जिन्हें
हम सहेजना चाहते हैं , संभालना कहते हैं |चाहते है की उनका अटूट बंधन बना रहे | उनका ब्रेक अप बहुत पीड़ा दायक होता है | कभी –
कभी पूरा ब्रेकअप नहीं होता | फिर भी रिश्ते में पहले जैसी बात नहीं रहती | कुछ
ऐसा होता है जो दो लोगों के बीच स्थिर
नहीं रहता | खो जाता है | वो है पहले जैसा प्यार , विश्वास और अपनापन | पर अगर आप
किसी भी प्रिय रिश्ते से ब्रेकअप की एनालिसिस करेंगे तो पता चलेगा की कोई भी
रिश्ता अचानक से नहीं टूटता | उसके टूटने की बहुत पहले हो चुकी होती है | अन्दर ही
अंदर ब्रेक अपबेल्स बजने लगती हैं | जो हमें सुनाई तो दे रही होती हैं पर हम
उन्हें अनदेखा करते रहते हैं | शायद तब तक जब तक रिश्ता बिखर न जाए | कितना अच्छा
हो अगर हम ब्रेक अप बेल्स सुन सकें और समय रहते अपने रिश्ते को बचा लें | आज मैं एक सच्ची कहनी कहानी शेयर कर रही हूँ की कैसे उन्होंने समय रहते ब्रेक अप बेल्स को सुना
और अपने जीवनसाथी के साथ अपने खत्म होते
रिश्ते को बचाया | कैसे समझा की हमारे ताज़ा रिश्तों की समस्याओं के तार हमारे बचपन में भी छिपे हो
सकते है | इस कहानी को शेयर करने का उद्देश्य महज इतना है की अगर आप को भी ब्रेकअप
बेल्स सुनाई दे रहीं हैं तो उन्हें अनदेखा न कर समस्या को समझें , समाधान खोजें और
अपने खूबसूरत रिश्ते को बचा लें |
ब्रेकअप
बेल्स – समस्या के बीज बचपन में भी दबे हो सकते हैं
खिड़की पर बैठी हुई हुई थी | बाहर अपने ही घर
के फ्रंट गार्डन में लगाए हुए कैक्टस देख रही थी | ये कैक्टस कुछ मैंने लगाये थे
कुछ भानु ने | शादी के बाद कितना शौक था मुझे व् भानु को की हम अपने घर का गार्डन
सबसे यूनीक बनायेंगे | न जाने कहाँ – कहाँ से ढूंढ कर लाये थे हम कैक्टस | पर
अफ़सोस उस समय हमें कहाँ पता था की ये कैक्टस देखने में भले ही कितने सुन्दर लगें
पर ये कैक्टस चुभते भी हैं | तार – तार कर देते हैं आत्मा को | विचित्र बात ये थी
कि मेरे लगाए कैक्टस भानु को चुभ रहे थे और भानु के लगाये मुझको | लेकिन ये वो
कैक्टस नहीं थे जो हमने अपने गार्डन में लगाए थे | ये तो हमारे मन की मिटटी में लग
गए थे अपने आप न जाने कब , कैसे हमें अहसास ही नहीं हुआ | अहसास तब हुआ जब वो
दूसरे को चुभने लगे |
जाते दिखे | जाते समय बाय करने का रिश्ता तो हमारा कब का खत्म हो गया था | पर आज
… आज मैं नहीं रुकी | दौड़ कर भानु के पास गयी और उससे कहा ,” भानु क्या तुम
हमारे रिश्ते को एक मौका और दे सकते हो | भानु ने उड़ती सी नज़र मेरे ऊपर डाल कर कहा
,” देखो निकिता वैसे तो कुछ होने वाला
नहीं है | फिर भी इस आखिरी कोशिश में मैं तुम्हारे साथ हूँ |मैं भी नहीं चाहता की
हमारे रिश्ते का ऐसा दर्दनाक अंत हो | कहकर भानु चले गए | मुझे ऐसा लगा जैसे एक –
एक सांस के लिए तडपते मरीज को किसी ने ऑक्सीजन मास्क दे दिया है | इस शर्त के साथ
जब तक रोग का इलाज हो इस मास्क को पह्ने रखो | अगर रोग का इलाज ढूँढने में असफल
रहीं तो मास्क छीन लिया जाएगा | मेरे पास समय कम था | पर इतनी ख़ुशी जरूर थी कि
अपने रिश्ते को भानु भी बचाना कहते हैं | मैं समय बर्बाद न करते हुए समस्या की जड़
तक जाने का प्रयास करने लगी |
कमरे में प्रवेश करते ही मैं विंड चाइम से टकरा गयी | घंटियाँ बजने
लगीं | ऐसी घंटियाँ तो बहुत दिन से बज रहीं थीं पर मैं ही अनसुना कर रही थी | वो
सामान्य घंटियाँ नहीं ब्रेकअप बेल्स थी |
मिले थे तो लगा था जैसे हमें वो मिल गया जिसकी हमें तलाश थी |भानु बिलकुल वैसे ही
थे जो मैं एक पुरुष में ढूंढ रही थी | लविंग , केयरिंग , प्रोटेक्टिव | भानु ने
अपना व्यवसाय खुद अपने दम पर जमाया था | नया व्यवसाय किसी बच्चे को पालने जैसा होता
है | ये मुझे पता था | उनके ऊपर काम का बोझ बहुत था | फिर भी वो मेरे लिए समय
निकालते थे |जैसा की भानु कहते थे की मैं वो लड़की थी जिसे भानु तलाश रहे थे | मैं
उच्च शिक्षित थी जॉब करती थी | व् अपनी जिंदगी अपने तरीके से संभाल रही थी | हम
अपने रिश्ते से बहुत खुश थे | | हमने अपने घर वालों से बात की | उन्होंने हमारे
रिश्ते को स्वीकृति दे दी | और दो महीने की जान पहचान के बाद हमने शादी कर ली |
मैं भानु के साथ उसके शहर आ गयी | मैंने जॉब छोड़ दिया | सोंचा था एक दो महीने बाद
फिर से कर लूंगी | भानु भी राजी थे |वो मुझे आत्मनिर्भर देखना चाहते थे | फिर ऐसा
क्या हुआ की शादी के बाद इन दो महीनों में हम बदल गए | हम वो नहीं रह गए जिससे
दूसरे ने कभी प्यार किया था |मैं भानु के पास और पास जाने की कोशिश करती और भानु
मुझसे दूर बहुत दूर | मेरा करीब आना उन्हें नागवार गुज़रता और उनकी उपेक्षा मुझे
| हम दोनों का रिश्ते में दम घुटने लगा |
फिर भी हमने एक साल रिश्ते को खींचा | हमने हर ब्रेक अप बेल को नज़रअंदाज किया |
व्हाट्स एप मेसेज किया ,
नहीं आया | हाँ seen आता रहा |
एक सेकंड निकाल कर रिप्लाई नहीं करोगे | मुझे तुम्हारी जरूरत है … प्लीज भानु ,
भानु प्लीज | ये मेसेज टाइप करते समय मैं
कितना रो रही थी | ये केवल मुझे पता था |इस बात से अनभिज्ञ भानु का संक्षिप्त सा
मेसेज आया
मेरा दिल टूट गया | नहीं अब भानु का इग्नोर करना मैं बर्दाश्त नहीं कर
सकती | रोज – रोज मरने से अच्छा है इस रिश्ते को ही खत्म कर दो | मैंने एक लविंग
केयरिंग , प्रोटेक्टिव पति चाहा था | क्या ये लव है , केयर है ?
से बात की | भानु का कहना था की इतना
इंटरफियरेंस उनके बर्दाश्त के बाहर है | मैंने एक पढ़ी लिखी जॉब करने वाली लड़की से
शादी की थी | जो स्वयं अपनी जिंदगी जीती हो व् दूसरे को भी उसकी प्राइवेसी दे |
तुमने क्या किया ? जॉब किया ही नहीं | अब हर समय तुम कहा हो ,तुम कहाँ हो करती हो
| आखिर कार मैं 24 घंटे तुम्हारे साथ नहीं बिता सकता | हर समय एक दूसरे से चिपके
रहो ये मैं नहीं कर सकता | मुझे स्पेस चाहिए | एक दूसरे पर घंटों आरोप –
प्रत्यारोप के बाद आखिरकार हम एक दूसरे
से अलग हो जाने के विनाशकारी नतीजे पर पहुँच गए |
हुआ की शादी के बाद मैं बदल गयी ? क्यों बदल गयी ? शायद भानु को भी ऐसा लगा होगा |
तभी तो उन्होंने आज मुझे रिश्ते को एक और मौका देने पर सहमति जताई |
उन्होंने पहले मुझे बुलाया | मेरे बचपन और पास्ट
हिस्ट्री के बारे में जानकारी ली | फिर भानु को बुलाया और उनसे उनके बचपन व् पास्ट हिस्ट्री के बारे
में जानकारी ली | ये सिलसिला कई हफ्ते चला
| इन सिटिंग्स में अब हम अकेले ही जाते थे
| कितनी बार ऐसा होता की हम अपनी बात बताते बताते रोने लगते |
दोनों सर झुकाए चुप- चाप किसी गुनाहगार की तरह उन के केबिन में उनके सामने बैठ गए
|
मेरे हिसाब से इस झगडे में आप दोनों ही दोषी नहीं हैं | आप की समस्या के तार गहरे
आप के बचपन में छिपे हैं |
जीवन में गहरे झाँकने की जरूरत है | निकिता अपनि माँ और बड़े भाई के साथ रहती थी |
उसके पिता दूसरे शहर में नौकरी करते | कभी – कभी आते | पर उन्हें बेटी से ज्यादा
बेटे से प्यार था | वो उसे सफल देखना चाहते थे | वो अपने बेटे के माध्यम से अपने वो सपने पूरे करना चाहते थे
जो उन्होंने बचपन में देखे थे |बेटी तो लायबिलिटी है | शादी करो और गंगा नहाओ
| नन्ही निकिता इंतज़ार करती रही अपने पिता
के प्रेम का | धीरे – धीरे उसे लगने लगा की शायद सफलता ही सब कुछ है | बेटे सफल
होते हैं | नाम ऊँचा करते हैं | इसलिए पापा भाई को ज्यादा प्यार करते हैं | उन्हें
लड़कियों की बुद्धि पर शक है | वो उन्हें कम तर मानते है | नन्ही निकिता ने अपनी पढाई पर ध्यान
दिया | उसे लगा एक यही माध्यम है अपने पिता के प्यार को वापस पाने का | वह पढाई में
निरंतर सफल हुई उसने नौकरी की पर वो अपने पिता का दृष्टिकोण बदलने व् प्यार पाने
में असफल रही | उसके पिता को लगता था की पढाई के कारण उस पर खर्चा ज्यादा हो गया
है व् शादी में भी देर हो गयी है | वो सफलता ,वो नौकरी जो निकिता के लिए पिता का
प्यार पाने का जरिया था | उसके प्रति निकिता का आकर्षण घट गया | अफ़सोस की निकिता
की नौकरी व् आत्मनिर्भरता ही वो वजह थी जिससे तुम उसकी तरफ आकर्षित हुए |
लिए तरस रही थी | वो इनसिक्योर थी | तुम्हारी जरा सी इग्नोरेंस उसे अन्दर तक हिला
देती की कहीं तुम उसे छोड़ न दो | जितना उसके अन्दर भय होता वो तुम्हें और बाँधने
की कोशिश करती | इतनी की तुम्हारा दम घुटने लगा |
कर बोले ,” निकता जी आपने जिस भानु से प्यार किया जिससे शादी की क्या आपने कभी उसे
समझने की कोशिश की |
से चलाना चाह्ती थी | भानु व् उसका छोटा भाई अपनी माँ के बेहेवियर डिफेक्ट से
अनजान थे | पर उनके व्यवहार से आजिज़ आ कर
भानु के पिता ने उनसे तलाक ले लिया व् दूसरी शादी कर ली | वो भानु से मिलने आते पर
भानु का ज्यादातर समय तो माँ के साथ ही बीतता | वो पूरी तरह भानु को अपने कंट्रोल में रखती | ऐसे करो ,
वैसे करों , ये ऐसे क्यों किया वो वैसे क्यों किया | भानु उनकी रोक टोंक से आजिज़ आ
गया था | पर उसके पास कोई चारा नहीं था | जब तक वह उस घर में रहा परेशान ही रहा |
शुरू किया | तभी तुम उसकी जिंदगी में आयीं | एक पढ़ी लिखी समझदार लड़की | जो अपनी
जिंदगी के फैसले खुद करती है | भानु को लगा ऐसी लड़की जरूर उसे स्पेस देगी | पर
शादी के बाद तुम्हारी इनसिक्योरिटी उसे उसकी बचपन की दर्दनाक यादों में ले जाने
लगी | उसका दम घुटने लगा |
का clingy behaviour भानु को उसे इग्नोर करने पर विवश करता | और भानु का इग्नोर करना
निकिता की असुरक्षा और बढाता |
दूर कर सकते हैं तो हम कुछ सेशन और कर सकते हैं | जिससे आप के रिश्ते को बचाया जा
सके | कह कर डॉ चले गए |
हमारी आँखों में आँसूं थे | ओह , अनजाने ही सही हमने केवल अपनी समस्या
समझी थी | दूसरे की नहीं |पर अब और नहीं |
हमने सेशन की स्वीकृति दे दी |
अनुसार एक दूसरे के घर जा कर रहना शुरू किया | हमें एक दूसरे का स्वाभाव ऐसा क्यों
है इस बात को समझने में आसानी हुई | इसके साथ ही मुझे अपने clingy behaviour या neediness
को कंट्रोल करना था | क्योंकि भानु का व्यवहार उसी एक्शन का री एक्शन था | मैंने
उस पर काम करना शुरू किया |
भानु उतनी ही दूर हो जाते | जिससे डर कर
मैं और neediness दिखाती | तो वो और दूर जाते | इसे पजेसिवनेस भी कह सकते हैं जहाँ
हमें लगता है की साथी पर केवल मेरा अधिकार हो | और उसके २४ घंटे मेरे नाम हों |
अगर वो ऑफिस में भी है तो कम से कम मेरे बारे में सोंच रहा हो | एक नार्मल रिश्ता
ऐसा नहीं हो सकता | भानु को थोड़ी स्पेस देने के लिए मैंने जॉब ज्वाइन किया | हमारी इस मेहनत के अच्छे परिणाम आने लगे | मुझे
वापस से अपना शादी से पहले वाला भानु और भानु को शादी से पहले वाली निकता मिल गयी
|
हो तो उसकी कुछ मदद कर सकूँ |अगर आप या आप का कोई प्रियजन इस समस्या से गुज़र रहा हो तो इसे अवश्य पढ़े |
जाने रिश्ते में कोई क्यों हो जाता है सुपरनीडी
से भी गहरा रिश्ता बांधते हैं तो हमारी इच्छा “अटूट बंधन “ बनाने की होती है | परन्तु
एक के ज्यादा चिपकू या नीडी होने से ये बिखरने लगता है | दो लोगों का ये रिश्ता
पति – पत्नी का हो सकता है , मित्रों का हो सकता है , माता – पिता और बच्चों का हो
सकता है या भाई –बहन का हो सकता है | नीडी बनने की वजह बचपन में छिपी होती हैं |
- माता – या पिता में से किसी एक का प्यार पाने के लिए आपको बहुत संघर्ष
करना पड़ा हो - भाई या बहन इतने श्रेष्ठ हो की उनके बीच परिवार के लोगों में अपने वजूद
का अहसास दिलाने के लिए आप को बहुत मेहनत करनी पड़े |
- केवल माँ या पिता एक ही मिले |
- स्कूल में किसी टीचर का फेवरेट बनाने के लिए बहुत संघर्ष कर रह हों |
- इन सब से बिलकुल विपरीत आप बहुत ज्यादा लाडले रहे हों | आपको जरूरत से
ज्यादा अटेंशन मिला हो जिस कारण आप ये बर्दाश्त ही न कर पाए की आपका साथी आपके
आलावा भी कुछ कर या सोंच सके |
- बचपन में दिल में बहुत सारी बातें दबा कर अच्छा व्यवहार करने में माहिर हों
| हालाँकि आप ये दिखाते हो की आप सामान्य हैं पर अंदर ही अंदर तनाव लेवल बढ़ा हुआ रहता
हो | एक तनावग्रस्त बच्चा एक तनाव ग्रस्त बड़ा बनता है |
एक भी समस्या से आप या आप का कोई प्रियजन गुज़रा हैं तो बहुत संभावना है कि वह अपने उस रिश्ते
में चिपकू हो जाये | समस्या का स्तर आपके बचपन में झेले गए स्तर के अनुपात में
होगा |यहाँ ख़ास बात ये है की आप उसी रिश्ते में ही चिपकू होंगे जहाँ आप उसके खोने
से या विलगाव से भयभीत होंगें | बाकी रिश्तों में आप बिलकुल नार्मल होंगे |ज्यादातर
ये एक समय में एक ही रिश्ते तक सीमित रहता है | मुख्य रूप से गर्ल फ्रेंड / बॉय
फ्रेंड या जीवन साथी के साथ | शुरू शरू में ऐसे लोगों के साथी को आभास ही नहीं हो पाता
की आप किस कदर उसके जीवन से एकाकार होना कहते हैं |
क्या हैं सुपरनीडी साथी के लक्षण
- नए रिश्ते तेजी से आगे बढ़ाना
- लगातार मेसेज या फोन करते रहना
- उसकी प्रतिक्रिया न मिलने पर नर्वस हो जाना ( कई लोग किसी खास का
फेसबुक लाइक तक न मिलने से नर्वस हो जाते हैं ) - हर समय उसके आस पास मौजूद रहने की कोशिश ( clingy behaviour).. यहाँ
मैं स्पष्ट करना चाहती हूँ की हम सब अपने साथी का साथ चाहते हैं पर ये नहीं चाहते
की उसे हमारी पीठ से सिल दिया जाए | - अविश्वास
- उसकी सामाजिक क्रियाकलापों पर शत –प्रतिशत ध्यान देना
- कोशिश करना की उसकी हर इच्छा पूरी कर दे | ( सावधान करना चाहूँगी की ऐसी स्थिति का अक्सर लड़के फायदा उठाने की
कोशिश करते हैं )
clingy behaviour क्यों हो जाता है नकारात्मक
behaviour करने वाले का पार्टनर धीरे –
धीरे परेशान हो कर दूर होना शुरू कर देता
है | ये बात clingy व्यक्ति के मन में और
घबराहट पैदा करेगी वो और पास जाने की कोशिश करेगा और दूसरा और दूर जाने की | needy
पार्टनर अपनी असुरक्षा को शक के दायरों में भी रख कर दूसरे पर इलज़ाम लगा सकता है |
हो सकता है की इनका किसी से अफेयर हो इसलिए मुझे इग्नोर कर रहे हैं | इस बात की प्रतिक्रिया
दूसरा चीख चिल्ला कर दे सकता है |कई बार वर्बल एब्यूज फिजिकल एब्यूज में भी बदल
जाता है | और लाख सँभालने की कोशिश के बाद रिश्तों का अटूट बंधन टूटता चला जाता है |
clingy behaviour को कैसे दूर करें
अत्यधिक चिपकू (clingy behaviour) होना एक गुण नहीं अवगुण है जो प्यार को बढाता नहीं
खत्म करता है | अगर आप को लागता है की आप
अपने खास रिश्तों के प्रति चिपकू हो जाते हैं तो आप को कुछ सुधार की जरूरत है |
यह समझना होगा की clingy व्यक्ति जिसे रिश्तों की मजबूत डोर समझ रहा है
उसमें रिश्ते का दम घुट रहा है |एक दूसरे को स्पेस दे | याद रखिये ये छोटी सी दूरी
प्यार को बढ़ा देती है | यह सच है की हर समय साथ नहीं रहा जा सकता | अकेले होना और
अकेलेपन में अंतर है | अपने साथ एन्जॉय कीजिये | जब आप के पार्टनर को लगेगा की आप
अपने साथ खुश हैं तो वो आपको ज्वाइन करने की कोशिश करेगा |
के प्रेम पर विश्वास करना होगा | जो आपको प्यार करता है वो जरूर आपके फोन कॉल्स या
टेक्स्ट मेसेज का जवाब देना चाहेगा | पर ये आप को भी समझना होगा की हो सकता है की वो कुछ जरूरी काम
में व्यस्त हो , किसी और कॉल पर हो , कार
ड्राइव कर रहा /रही हो | ऐसे में आप को तुरंत अधीर हो कर बीसियों मेसेज करने के
स्थान पर प्रतीक्षा करनी चाहिए | और अविश्वास तब तक न करें जब तक उसके कुछ पुख्ता प्रमाण
न मिलें |
समस्या की तरह यहाँ भी सेल्फ लव का स्थान है | आप किसी के प्रति चिपकू इस लिए हो
जाते हैं क्योंकि आपको कहीं न कहीं सेल्फ वर्थ तभी महसूस होती है | जब कोई दूसरा
यह अहसास कराये | इससे आप अपनी चाबी दूसरे के हाथ दे देते हैं | ऐसे में आपको हर
समय दूसरे की स्वीकारोक्ति की आवश्यकता होती है |
जिंदगी में शामिल करने से पहले सोंचिये की आप क्यों ये रिश्ता चाहते हैं | क्या आप
चाहते हैं की कोई ऐसा हो जो हमेशा आप को खुश रख सके | अगर ऐसा है तो रिश्ते में
आगे बढ़ने से पहले ठहर जाइए | अपने आप से खुश रहना सीखिए फिर कोई रिश्ता शुरू करिए
|
के साथी का clingy behaviour आप के रिश्ते को खोखला कर रहा है तो आपस में बात करें
| जरूरी हो तो मनोवैज्ञानिक की सलाह लें | परन्तु अगर रोज की कलह , मारपीट या
वर्बल एब्यूज जारी रहे तो बेहतर है अलग हो जाएँ |
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जब मैंने अपने माता – पिता को माफ़ किया
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