मन इसका आयाम इतना विस्तृत है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती | हम किसी दूसरे से
कितनी देर बात करते होंगे | घंटे दो घंटे पर खुद से दिन भर बोलते रहते हैं | ये
बातचीत कभी खत्म ही नहीं होती | दिन भर , रात भर, यहाँ तक की सपनों में भी चलती ही
रहती है | और हम इससे अनजान ये सोंचते रहते हैं की अपने से हम कुछ भी बोले क्या फर्क पड़ता है | कहने वाले हम, सुनने वाले
भी हम तो क्यों सोंच – सोंच कर बोले ? कौन है जो रूठ जाएगा |
हकीकत इसके उलट होती है |खासकर उनके लिए जिनका अतीत सुखद नहीं है | अगर हम खुद को सुनाई जाने वाली कहानियों पर
ध्यान नहीं देंगे तो हमारा वर्तमान रूठ जाता है | भविष्य रूठ जाता है | कैसे ? जब
आप खुद को हर समय अपने अतीत के दर्द भरी कहानियाँ सुनाते रहते हैं तो वही दर्द आप
की जिंदगी में फिर से आता रहता है | कई
बार आपने देखा होगा की दुखी लोगों की जिंदगी में सामान दुःख बार – बार आते रहते
हैं | वो हैरान रहते हैं की समय और परिस्थिति बदलने के बाद भी हर बार उनके साथ ऐसा
क्यों होता है | अगर आप भी उनमें से एक हैं तो क्या आप की इच्छा नहीं करती इसका
कारण जानने की | इसका सीधा – सच्चा सा कारण है खुद को सुनायी जाने वाली कहानी |
रीता की जिन्दगी और उसकी खुद
को सुनाई जाने वाली कहानी
अपने पति व् बच्चों के साथ एक खुशहाल जिन्दगी जी रही है | पर शुरू से रीता की
जिन्दगी ऐसी नहीं थी | बचपन से प्यार को तरसती रीता को हमेशा यही लगता था की वो
प्यार के काबिल ही नहीं है | उसकी जिंदगी में खुशियाँ ही नहीं हैं और न आ सकती हैं
| उसकी जिंदगी तब बदली जब रीता ने खुद को
सुनाई जाने वाली कहानी बदल दी |
प्रेम विवाह किया था | परन्तु प्रेम विवाह में प्रेम शादी के एक साल बाद ही कपूर
के धुएं की तरह उड़ गया |रीता छोटी ही थी | जब वो अपने पिता को अपनी माँ को रोज बात
बेबात पीटते हुए देखती | उसके पिता उसका
भी ख्याल नहीं करते | गुस्से में चीखते माता – पिता और घंटों रोती माँ ये उसके बचपन का सबसे सामान्य दृश्य था | एक
दिन पिता की पिटाई से आजिज़ माँ ने उनसे अलग होने का फैसला कर लिया | पिता ने उन्हें तलाक और पैसे देने से मना कर दिया | माँ उसे लेकर घर से निकल आयीं | वो
दिन भयंकर असुरक्षा के थे | नाना ने उन्हें अपने घर घुसने नहीं दिया | क्योंकि माँ
ने उनकी मर्जी के खिलाफ शादी करी थी |
शुरू किया | वो डबल शिफ्ट करती | उन्होंने रीता का नाम स्कूल में लिखवा दिया |
रीता की पढाई तो शुरू हो गयी पर उसे माँ का प्यार नहीं मिलता | माँ जरूरत से जयादा
व्यस्त थी |वो उसके किसी स्कूल फंक्शन , पेरेंट – टीचर मीटिंग , अवार्ड सेरेमनी में
नहीं गयीं | मासूम रीता खुद ही अपनी पढाई
, होमवर्क स्कूल ड्रेस का ध्यान रखती
| कभी – कभी ही उसे माँ के साथ रहने का
मौका मिलता तब माँ इतनी निढाल होती की बात करने की इच्छा न जतातीं या अपने अतीत को
याद कर रोती रहती | जिससे रीता सहम जाती |पिता
तो उनसे मिलने भी नहीं आते | इन्हीं
हालातों में रीता एक निराश , हताश , कुंठित लड़की के रूप में बड़ी हो गयी |
अतीत की वो कहानी जो रीता खुद को सुनाती
चली जाती | जो भी उसके पास बैठा होता या अकेले होने पर अपने अतीत की कहानी सुनाती |कहीं
न कहीं हर समय अतीत के दर्द को याद करने से उसके मन में ये निष्कर्ष निकलता
…….
एक क्रूर व्यक्ति थे | पुरुष का असली चेहरा यही है | उसकी माँ ने उसे कभी प्यार
नहीं दिया | वो भी कुछ हद तक खुदगर्ज थी | बस अपने काम में लगीं रहीं | या फिर वो
शायद प्यार के काबिल ही नहीं है | क्योंकि
उसकी पिछली जिंदगी के अनुभव ख़राब है इसलिए
वो शायद कभी अच्छी माँ बन ही नहीं पाएगी | वो यूँ ही बिना प्यार दिए बिना प्यार
मिले तडपती तरसी ही दुनिया से जायेगी |
खुद को सुनाई इस कहानी का रीता के जीवन पर असर
उसके भविष्य पर हावी होने लगी | रीता पढ़ – लिख कर अच्छी खासी नौकरी कर रही थी |
यही समय था जब नीलेश रीता की जिन्दगी में आया | यूँ तो वोपुरुषों से दूर ही रहती
क्योंकि उसे लगता वो प्यार के काबिल नहीं है | पर नीलेश प्यार के दो शब्दों से रीता पिघल सी गयी | उसे
लगा नीलेश उस से प्यार करके उस पर अहसान कर रहा है क्योंकि वो तो प्यार के लायक ही
नहीं है | परन्तु ये प्यार ज्यादा दिन तक टिक न सका | नीलेश का ट्रांसफर हो गया | रीता
घबरा गयी | पहली बार तो उसे अपने बारे में कुछ अच्छा अहसास हुआ था | भले ही थोड़े
दिन का सही | रीता ने आनन् – फानन में नीलेश से शादी करने का फैसला कर लिया | रीता
नीलेश के साथ शादी करके अपना घर द्वार , नौकरी सब कुछ छोड़ कर चेन्नई चली गयी |उसने
भी अपनी माँ की ही तरह अपनी माँ से कंसल्ट करने की जरूरत नहीं समझी |
| नीलेश बात – बात पर उस पर गुस्सा करते ,
मारते , पीटते कभी – कभी घर से निकाल देते
| वो रात भर बाहर बैठी रहती | फिर सुबह बुला लेते | नीलेश घर के बाहर ताला लगा कर
ऑफिस जाते | एक साल के अन्दर रीता का दो
बार फैक्चर हो गया | सीवीयर ऐनीमिया हो
गया | पर क्योंकि वो अपनी नौकरी छोड़ कर
आई थी उसके पास पैसे नहीं थे की वो वापस
माँ के पास आ सके | इस आशा में की नीलेश सुधर जाएगा वो हर दिन पीटती रही | उसकी
कोख का पहला अंश भी इस मार – पीट की वजह से उसे दर्द में छोड़ कर चला गया | शायद इस दर्द ने उसे साहस
दिया | एक रात वो घर से भाग निकली | किसी से उधार ले कर फोन किया और जैसे – तैसे माँ के पास वापस
पहुँच पायी |
रीता गहरे अवसाद में चली गयी | उसकी खुद को सुनाई जाने वाली कहानी में
एक दुखद अध्याय और जुड़ गया | वो घंटों सोंचती | उसके साथ तो ये होना ही था |
इतिहास अपने आप को दोहराता है | वो प्यार के काबिल ही नहीं है |सही किया जो नीलेश
इतनी मार पीट करते थे | वो इसी लायक है |
जब मनोचिकित्सक ने रीता को उसकी अतीत की कहानी बदलने को कहा
कहानी सुनाती रही | उन्होंने ध्यान से सुना | करीब १० सेशन तक वो वाही कहानी
सुनाती रही और मनोचिकित्सक सुनते रहे |
हूँ | अब कहानी जरा बदलिए |सोंचिये ये सब
कुछ आप के साथ नहीं आपकी सहेली के साथ हुआ है | जो आप की तरह स्वीट व् मासूम है |
क्या वो डिजर्व करती है ऐसा जीवन | रीता आंसुओं को पोंछते हुए बोली ,” नहीं बिलकुल
नहीं , वो क्या कोई भी इंसान ऐसा जीवन
डिजर्व नहीं करता |
अपने पर रख कर मुझे आप ही बताइये ?मनोचिकित्सक ने रीता से कहा
उस समय उनकी उम्र कम थी और सहन शक्ति थी | एक इंसान होने के नाते उन्होंने गलती
करी | शायद इसके पीछे उनका भी खराब बचपन जिम्मेदार हो | फिर भी जो चीजे उन्होंने
बहुत भयानक करीं हैं वो उनका व्यक्तिगत स्वाभाव हो सकता है | जरूरी नहीं की हर
पुरुष ऐसा हो | जरूरी नहीं की हर किसी का बचपन असुरक्षा में बीता हो | दुसरे पुरुष
को देखने में मुझे अपने पिता की परछाई से
मुक्त होना पड़ेगा |
आत्मनिर्भर बन सकी | जब बच्चे घंटों माँ के कहने पर किताब उठाते हैं | मुझे पता था
मुझे कहने वाला कोई नहीं इसलिए खुद ही अपने होमवर्क का ध्यान रखना आ गया | नाश्ता , खाना समय पर खाना मैं सीख गयी | हां माँ मेरे
स्कूल कभी नहीं गयीं इस बात से मुझे ये समझ आया की मुझे अपने बच्चों के साथ उनकी
पेरेंट टीचर मीटिंग , अवार्ड फंक्शन , होमवर्क में जरूर साथ देना चाहिए |
उसे बिना ठीक से जाने समझे मैंने उससे शादी कर ली | और अपनी नौकरी ,
घर , बैंक बैलेंस सब छोड़ कर उसके साथ चल दी | दूसरा गलत डिसीजन मेरा ये था की मैं उसे समझने के बाद
भी उसके अत्याचार इस उम्मीद पर सहती रही कि शायद वो बदल जाए | ये एक दिवा स्वप्न
ही था | मुझे जल्दी से जल्दी अपनी आत्मा को ज्यादा नुक्सान पहुंचाए उस रिश्ते से
निकल जाना चाहिए |
रीता मनोचिक्तिस्क की ओर देख कर बोली , हम इतिहास से सीखते नहीं हैं
इस कारण वह बार – बार पलट – पलट कर हमारे सामने आता है |
अब आप सही नतीजे पर पहुंची हैं | जीवन की हर परिस्थिति चाहे वो अच्छी हो या बुरी ,
सकारातमक हो या नकारात्मक , हमे कुछ सीख सकते हैं और आगे का जीवन सुधार सकते हैं |
अब आप अपनी पुरानी दुःख भरी कहानी सुनाने
के साथं पर बार – बार रिपीट करें यह एक अनुभव
था जिससे आप ने बहुत कुछ सीखा है आपकी सोंच व् आपके निर्णय गलत थे आप नहीं | आप एक
खुशमिजाज , जिंदादिल प्यार के काबिल इंसान
हैं और ऐसा ही भविष्य में लिखा है |
जब रीता ने खुद को सुनाई जाने वाली कहानी बदली
से कहती जिंदगी के इस सफ़र ने उसे पहले से बेहतर मैच्योर व् खुशकिस्मत बना दिया है
| अब वो परिस्थितियों को अच्छे से संभाल सकती है | कोई कारण नहीं है की अब उसकी जिंदगी
में ख़ुशी के रंग न बिखरे |
में आये | शिरीष ने ही उसे प्रपोज किया था | आज वो उसके व् अपने बच्चों के साथ
खुशहाल शादीशुदा जिंदगी बिता रही है |
क्या करें अगर आप भी खुद को सुनाई जाने वाली कहानी बदलना चाहते हैं
- अगर आप सबको व् खुद को वही कहानी बार – बार सुनाते हैं
- आपका सारा ध्यान उस व्यक्ति की तरफ रहता है जिसने आप की जिन्दगी को
तकलीफ दी है - आप बार – बार महसूस करते हैं कि आप का जीवन “हिस्ट्री रीपीट्स इटसेल्फ”
पर चलता है |
अतीत को भूलने के लिए कैसे
बदले जिंदगी कहानी
बातों का ध्यान रखिये …..
- जब भी दिमाग में अतीत की कहानी शुरू हो पॉज बटन दबा दीजिये | थोड़ी
मेडिटेशं प्रैक्टिस से ये संभव है | - एक कॉपी पेन ले कर बैठ जाइए | अपनी वो कहानी लिखिए जो आप सबको और खुद
को सुनाते हैं | पूरे डिटेल में नहीं बस पॉइंट्स में लिखिए | - अब उससे जो जिस्ट निकल कर आये
लिखिए | यानि जो आप सोंचते है की आपके साथ
ऐसा बुरा क्यों हुआ | - अब सोंचिये इससे आपने क्या क्या सीखा |
- सारे इंटरप्रीटेशन बदल कर वो लिखिए जो इसके सुखद नतीजे रहे | मसलन आप
में क्या – क्या पॉजिटिव बदलाव आये या आपने क्या – क्या सीखा | - अब महसूस करिए की इन सुखद नतीजों के आने से आप कितनी ख़ुशी महसूस कर
रहे हैं या आपकी अपने बारे में धरणा कितनी
बदल गयी है | - आप अपने उन गुणों को लिखिए जिनके कारण आप पहले से बेहतर हो गए हैं |
उन्हें बार – बार पढ़िए फील करिए | - मान लीजिये अब आप क्योंकि पहले से बेहतर हो गए हैं इसलिए अब आप बेहतर
भाग्य और खुशियाँ डिजर्व करते हैं |
नहीं कर पा रहे हैं तो आप किसी मनो चिकत्सक की सहायता ले सकते हैं |लेकिन ऐसा करने
से निश्चित रूप से आप अतीत के दर्द से निकल जायेंगे | ये मत सोंचिये कि इससे आप का अतीत बदल नहीं जाएगा पर अपने को हर समय विक्टिम
न महसूस करके आप वर्तमान और भविष्य खिल
उठेगा |
जाने वाली कहानी |