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ध्यान की पाठशाला -mindful eating

ध्यान की पाठशाला -भाग -1

ध्यान या meditation आज के तनावपूर्ण समय की मांग है | ये हम कई जगह पढ़ते हैं | ध्यान के प्रति आकर्षित  हैं | लेकिन ध्यान करने बैठते हैं तो ध्यान नहीं  हो पाता | मन भटक जाता है | किसी को रोना बहुत आता है तो कोई उदास हो जाता है | अगर आपने आज सोचा की ध्यान करा जाए और आज से ध्यान पर बैठने लगे तो आपको अपना दिमाग सुस्त  महसूस होने लगेगा | याहन समझने की जरूरत है कि दिमाग का सुस्त होना और अवेयर होनादो अलग चीजे हैं | असली ध्यान दिमाग को सुस्त नहीं करता बल्कि कमल की तरह खिला देता है | व्यक्ति ज्यादा तरोताजा महसूस करता है |

ध्यान की पाठशाला -mindful eating

जिस तरफ से हम विज्ञान, कला या किसी अन्य विध्या को एक दिन में नहीं सीख जाते उसी तरह से ध्यान भी एक दिन में सीखना संभव नहीं | इसमें भी समय लगता है | अभी तक हमने जो कुछ भी सीखा होता है उसका संबंध बाह्य जगत से होता है पर ध्यान का संबंध अंत: जगत से होता है | पहली बार हम कुछ ऐसा सीख रहे होते हैं हैं जो हमने आज तक नहीं सीखा होता है | इसलिए समय लगना  स्वाभाविक है |

सबसे पहले तो ये समझना होगा की ध्यान है क्या ?

आम भाषा में कहें तो ध्यान का अर्थ है अपने विचारों को देखना , उन्हें अपनी इच्छानुसार बदल देना |

इतनी आसान सी लगनी वाली बात वास्तव में उतनी आसान नहीं है | ऐसा ही एक प्रश्न लेकर एक व्यक्ति अपने गुरु के पास गया | उसने अपने गुरु से पूछा , ” गुरुदेव ध्यान की कोई आसान विधि बताये ?”

गुरु ने कहा, “ये बहुत आसान है | बस तुम्हें इस बात का ध्यान रखना है कि तुम्हारे दिमाग में बन्दर ना आये | ”

उत्तर पा कर व्यक्ति बहुत खुश हो गया | वो घर आकर ध्यान लगाने के लिए आँखे बंद कर जैसे ही बैठा उसे सबसे पहले बन्दर दिखाई दिया | उसने बहुत कोशिश की कि उसे बन्दर ना दिखाई दे | पर हर बार आँख बंद करते ही बन्दर आकर खड़ा हो जाता | धीरे -धीरे उसकी स्थिति ये हो गयी कि उसे खाते -पीते उठते बैठते भी बन्दर का ही  विचार मन पर हावी रहता | वो फिर गुरु के पास गया और बोला ,  ” गुरुदेव ये तो संभव ही नहीं है | जितना मैं कोशिश करता हूँ कि बन्दर ना दिखे उतना ही बन्दर सामने आकर खड़ा हो जाता है |”

गुरुदेव मुस्कुराये, ” मन का स्वाभाव ही ऐसा है | जिस चीज से रोकोगे | यह वहीँ वहीँ दौड़ेगा | तो ध्यान का पहला नियम है रोकना नहीं हैं | आँख बंद कर ध्यान पर बैठने से पहले बहुत सारे छोटे -छोटे बेसिक स्टेप्स बार -बार करके अपने आप को ध्यान के  लिए तैयार करना है |

क्या हैं ध्यान के लिए ये बेसिक स्टेप्स ?

सबसे महत्वपूर्ण स्टेप ये हैं कि जो आप कर रहे हैं उसे करने में अपना पूरा ध्यान दें |  मान लीजिये कि आप खाना -खा रहे हैं | तो एक -एक शब्द को स्वाद , रूप , रस , गंध का अनुभव करते हुए खाएं |इसे mindful eating भी कहते हैं |

आमतौर पर हमारी वैचारिक प्रक्रिया कैसी होती हैं | उदाहरण के लिए अगर आज आप ध्यान से खाना खाने जा रहे हैं | तो विचार कुछ इस तरह से आयेंगे …

टमाटर आलू की  सब्जी तो स्वादिष्ट बनी है |
थोडा तीखा और होता तो ..
वैसे मुझे मटर पनीर ज्यादा पसंद हैं |
फलानी चाची  कितना अच्छा मटर पनीर बनाती हैं |
पर रेसिपी नहीं बताती …पिछली बार तो पार्टी में सबके सामने कह दिया था , तुम नहीं बना पाओगी | पता नहीं क्या समझती हैं अपने आपको | हां , आजकल बेटे की पढाई का टेंशन हैं | पर किसको अपने बच्चों की पढाई का टेंशन नहीं है ? मेरे भी तो बच्चे हैं | बिट्टू की मैथ्स की टीचर अच्छी नहीं हैं …….

तो आपने देखा खाने से शुरू हुए विचार बिट्टू की मैथ्स तक पहुँच गए | श्रृंखला कुछ भी हो सकती है | पर हमारे सोचने की प्रक्रिया बेरोकटोक ऐसी ही है | कहते हैं कि एक घंटे में हमारा दिमाग करीब ५० से ६० हज़ार विचारों को डिकोड करता है | मन की सारी  भटकन इन्ही विचारों की वजह से है | इसलिए अवेयर होकर खाने के लिए जरूरी है की जब आप खाएं और दिमाग भटक कर इधर -उधर पहुंचे | उसे वापस खाने के रूप, रस गंध पर ले आये |

mindful eating के लिए आपको अपने खाने पर फोकस धीरे -धीरे इस तरह से बढ़ाते जाना है …

1) आपको यह देखना है आप के लिए क्या खाना बेहतर है | खाने की लिस्ट बनाते समय सेहत को स्वाद से या स्ट्रेस बर्नर फ़ूड से ऊपर रखें |
2) खाना हमेशा टेबल या खास स्थान पर खाएं | टी वी देखते समय या कहीं भी नहीं | हल्का म्यूजिक चला सकते हैं |
3) खाने की टेबल पर केवल भूख लगने पर ही जाएँ | अगर आप स्ट्रेस में खाते हैं तो आप बार -बार मेज की तरफ दौड़ेंगे | हर बार दौड़ने पर आप ठहर कर सोचें की क्या वास्तव में मुझे भूख लगी है |
4) थोड़ी मात्रा में छोटी प्लेट में खाना लें और धीमे धीमे स्वाद लेते हुए खाएं |
5) अपनी सारी इंदियों को भोजन पर केन्द्रित कर दें |

आप देखेंगे कि धीरे धीरे आप खाते समय सिर्फ खाने पर फोकस कर पायेंगे | आपको अपने विचारों पर थोडा सा नियंत्रण शुरू हो पायेगा | इससे दो फायदे और होंगे …

१- आप बहुत कम खाने में तृप्त हो जायेंगे | जो व्यक्ति वजन घटाना चाहते हैं उनके लिए ये बहुत कारगर तरीका है |
२…आपका पाचन तंत्र मजबूत होगा | अच्छे से एंजाइम निकलेंगे और आप शरीर पहले से ज्यादा स्वस्थ व् उर्जावान महसूस करने लगेगा |

सबसे पहले आप इस अवेयरनेस के साथ कम से कम दिन में एक बार खाना खाइए | फिर अन्य कामों में भी इसे अपनाइए |

आप देखेंगे कि आपके विचार कुछ थमने लगेंगे |

क्रमश :

वंदना बाजपेयी

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