मोटापा — खोने लगा है आपा ( भाग -2)

मोटापा --- खोने लगा है आपा   ( भाग -2)
              
          मोटापे से मुक्ति
के लिए आवश्यकता है जीवन पद्धति में आमूलचूल परिवर्तन सुधार की तथा  स्वयं से कुछ
निश्चित प्रण करने की
.
ये उपाय बेहद सरल हैं किन्तु इनका पालन करना उतना ही कठिन है
.
इसके लिए उच्च  स्तर की इच्छा
शक्ति
,
संकल्प सौंदर्य बोध की आवश्यकता होती है जो शरीर को मोटापे के साथ साथ इससे जनित अनेको बीमारियों से भी मुक्त करवाती है.
तो आइये एक शुरुआत करें हम आज से और अभी से और जाने कि किस प्रकार से हम आसानी से इसके खिलाफ लड़ सकते हैं

प्रथम भाग  के लिए ये लिंक क्लिक करें –


मोटापा — खोने लगा है आपा   ( भाग -2)


 

 I..भोजन का विज्ञान— 


मोटापा
नियंत्रण का यह पहला कदम है जिसमें हमें भोजन की मात्रा
,
क्वालिटी
/
गुणवत्ता उससे प्राप्त ऊर्जा पर ध्यान देना है . यथा——:
1. व्यक्ति को दोनों
समय का भोजन नियमित करना चाहिए अर्थात मोटापा कम करने के लिए व्यक्ति सबसे पहले ये करता है कि  वो एक समय
या दोनों समय का भोजन छोड़ देता है जिसे आम भाषा में डाइटिंग कहा जाता है जो बिलकुल गलत है क्योकि भोजन की मात्रा एकदम से कम कर देने से रक्त में भोजन  की कमी आती
है शरीर की कोशिकाओं में ऊर्जा की अतः शरीर की ऊर्जा नियंत्रण प्रणाली इस ऊर्जा असंतुलन से निपटने के लिए शरीर में ऊर्जा  की खपत एकदम
से घटा देती है और भूख को बढ़ा देती है ताकि शरीर का ऊर्जा स्तर सामान्य हो जाये किन्तु जब व्यक्ति बहुत देर तक भूखा
रह कर खाने बैठता है तो ऊर्जा प्रणाली की क्रियाशीलता के कारन आवश्यकता से अधिक भोजन कर लेता है और ये अतिरिक्त भोजन की मात्रा शरीर में वजन बढ़ने को प्रेरित करती है

 वहीँ
दूसरी ओर व्यक्ति में भोजन करने से एक मानसिक बैचैनी उत्पन्न  होती है जो उसे
अवसाद की तरफ ले जाने लगती है जिस से वो चाहते हुए भी ऐसे पदार्थों का सेवन करने लगता है जिसके बारे में वो सोचता है की इससे मोटापा थोड़े ही बढ़ेगा जैसे चाय या कॉफी की मात्रा बढ़ा देना या सलाद की मात्रा बढ़ा देना या फिर  या फिर फलों
के रस की और ऐसे में अनजाने में वो एक बार फिर मोटापे को आमंत्रित कर बैठता है
2. दूसरी बात
कि व्यक्ति एकदम से मीठा और घी तेल खाना छोड़ देता है क्योकि उसका यही देखा सुना होता है  कि मोटापा इन दोनों
चीजों से ही बढ़ता है इन्हे छोड़ कर सब कुछ खाओ जल्दी ही स्लिमट्रिम हो जायेंगे जबकि ऐसा करना गलत ही नही बल्कि शरीर के लिए घातक है क्योकि भोजन का मूल मंत्र है संतुलन कि त्याग
.
वस्तुतः भोजन रासायनिक रूप से  शर्करा ( मीठा ), प्रोटीन, वसा ( घी /तेल ), खनिज , विटामिन्स , पानी
रेशा का संतुलित सम मिश्रण है जो  शरीर के निर्माण
  इसकी समय समय
पर मरम्मत हेतु आवश्यक होता है और साथ ही शरीर को सुचारू रूप से कार्य करने के लिए ऊर्जा देता है
.
ऐसे में किसी भी एक पदार्थ की कमी या अधिकता ऊर्जा नियंत्रण प्रणाली के कार्यों में अवरोध पैदा करने लगती है शरीर में ऊर्जा का संतुलन बिगड़ने लगता है और ऊर्जा की खपत
,
संग्रहण उत्पादन तीनो ही कार्यों में परस्पर टकराहट होने लगती है , ऐसे में
शरीर के हार्मोन्स एंजाइम्स के कार्य करने का सारा गणित गड़बड़ा जाता है और मोटापा तो कम होगा या नही पर शरीर अन्य दूसरी परेशानियों से जूझने लगता है जैसे
….
वसा खाना एक दम छोड़ देने से वसा में घुलनशील विटामिन्स की शरीर में कमी हो जाती है और शरीर अनेक अभाव रोगों से ग्रस्त हो जाता है
,
शरीर में कई हार्मोन्स निर्माण बाधित होने लगता है क्योकि वे वसा से ही बनते हैं
इत्यादि

इसी प्रकार से एकदम मीठा छोड़ देने से भोजन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है इससे हमारे लीवर और किडनी का कार्य बढ़ जाता है और इस से शरीर के ऊर्जा स्तर में एकदम से कमी आती है
,
शरीर शिथिल पड़ने लगता है
,
व्यक्ति को सामान्य  कार्यों को करने
में भी अत्यधिक कमजोरी महसूस होने लगती है
,
मांसपेशियों में दर्द रहने लगता है
,
और वो चिंताग्रस्त रहने लगता है.

इसी प्रकार से व्यक्ति एकदम से आवश्यकता से बहुत अधिक पानी पीने लगता है और इससे शरीर की मूत्र उत्सर्जन प्रणाली बिगड़ जाती है और किडनी का कार्य बढ़  जाता है
अतः भोजन की किसी भी मात्रा में कमी या अधिकता से ज्यादा जरुरी है भोजन के सारे अवयव यथा शर्करा
,
प्रोटीन
,
वसा,रेशा , मिनरल्स
पानी के अनुपात में संतुलित परिवर्तन लाकर किया जाना चाहिए ताकि शरीर को सभी वांछित पदार्थी की प्राप्ति हो सके
.

 3. तीसरी जरुरी  बात है भोजन  की मात्रा अर्थात
एक बार में एक साथ बहुत ज़रा ही खाना चाहिए बल्कि थोड़ी थोड़ी मात्रा में दिन में चार बार खाना चाहिए जिसमे सुबह का नाश्ता
,
दोपहर का लंच
.
शाम का नाश्ता और रात का डिनर.
और इन सब खानो में लगभग तीन से चार घंटो का अंतर होना चाहिए और कोशिश होनी चाहिए की सुबह का नाश्ता ऊर्जा से भरपूर हो
,
दोपहर का लंच वसा प्रोटीन शर्करा का संतुलन हो शाम का नाश्ता रेशे से भरा हो और रात का डिनर तरल हो ताकि शरीर का मेटाबॉलिज्म सुचारू रूप से कार्य कर सके और इसकी किसी भी कार्य प्रणाली पे अतिरिक्त कार्य भार आये


 4. चौथी सबसे महत्वपूर्ण
बात है भोजन करने का समय
….
वर्तमान समय की जीवन शैली ने इस सारे ताने बाने को ही छिन्न भिन्न कर दिया है जबकि होता ये है कि हमारे मस्तिष्क
(
दिमाग
)
में एक घडी (पिनियल काय
)होती है जो  दिन और रात
के सापेक्ष शरीर में समय का हिसाब किताब रखती है और अपने समय के संदर्भ में ये सूर्य के प्रकाश पर निर्भर रहती है
.
इसी प्रकार से शरीर के प्रत्येक अंग में भी एक घडी होती है जो निश्चित समय के लिए उद्दीपनों पर निर्भर होती है
.
इस मुख्य घडी और अन्य घड़ियों के बीच शरीर की समस्त कार्य प्रणालियां सुचारू रूप से कार्य करती है किन्तु जब इन घड़ियों में परस्पर सामंजस्य नही बैठ पाता है तो शरीर की कार्य प्रणाली को अलग अलग निर्देश प्राप्त होते हैं इस से सम्पूर्ण ऊर्जा नियंत्रण प्रणाली भ्रमित हो जाती है और ऊर्जा की खपत ऊर्जा के संग्रहण सम्बन्धी निर्देश गड्ड मड्ड हो जाते हैं इससे मोटापे के बढ़ने के आसार बढ़ जाते हैं अतः व्यक्ति को निश्चित समयांतराल पे भोजन समय पे करना चाहिए
,
देर रात भोजन करने से बचना चाहिए भोजन का समय (जहाँ  तक सम्भव हो) सुनिश्चित
रखना चाहिए
.
5. अब हमे
क्या खाना चाहिए ओर क्या नही ये हर शरीर का की अलग डिमांड और आवश्यकता होती है
.
अतः कभी भी किसी अन्य की नक़ल ना करके अपने शरीर की आवश्यकताओं का आकलन स्वयं करें और भोजन को संतुलित बनाएं क्योकि किन्ही भी दो व्यक्तियों के शरीर का मेटाबॉलिज्म एक जैसा नही होता है
.
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य ये है कि जो भी खाएं केवल स्वाद के आधार पे नही बल्कि भूख के आधार पे खाएं
..
ऐसा नही की भूख तो कम थी पर स्वाद स्वाद में ज्यादा खा लिया
……..
हमेशा शरीर में भूख से थोड़ा कम खाने का प्रयास करें
.
ये थोड़े से एतियात की बात है बस……इसे
जीवन में शामिल करें 

बहुत सरे लोग चार्ट बना कर देते है कि सुबह ये खाएं और शाम को ये दिन में ये और इतना गिलास पानी का पियें
..
मेरा मानना है कि हमे इस सब से बचकर घर में बनाने वाले रोज़ के सामान्य भोजन को खाएं  बस प्रयास रखें
कि भोजन भूख में संतुलन रहे हमेशा
अतः
भोजन का एक ही विज्ञान है और वो है
**  पोषक तत्वों से भरपूर
भोजन समय पर लें,
**  एक साथ बहुत
ज्यादा भोजन लें,
**  अधिक समय तक भूखे
ना रहे,
**  देर रात भोजन
करने से बचें और
 ** 
कम से कम चार बार भोजन करें पर नियंत्रित मात्रा में

नींद का विज्ञान
—–


नींद का विज्ञान भोजन के विज्ञान से कम नही है .
पर्याप्त सोना
,
समय पे सोना और नींद की गुणवत्ता ये तीन ऐसे कारक हैं जो अप्रत्यक्ष रूप से मोटापे को प्रभावित करते हैं क्योकि नींद का सीधा सम्बन्ध शरीर की घड़ियों से है और उनका शरीर की ऊर्जा कार्य प्रणाली से
.
अतः प्रत्येक व्यक्ति को 6 से  8 घंटे रात्रिकालीन गहरी
नींद आवश्यक रूप से लेनी चाहिए ताकि शरीर की घड़ियाँ तालमेल के साथ कार्य कर सकें और शरीर का मेटाबॉलिज्म नियंत्रित नियमित बना रहे
.
बहुत सारे लोग इस तथ्य की सर्वाधिक अनदेखी करते हैं और इसे अपने अपने अनुसार समझने समझाने का प्रयास करते हैं जबकि तथ्यात्मक बात तो ये है कि शरीर भी एक मशीन की तरह ही है और इसे भी समयानुसार आराम की आवश्यकता होती है ताकि थके हुए अंगो मांसपेशियों को आराम मिले और उनमे ऊर्जा का संचार भली भांति हो सके
.
मानसिक शांति मिले ताकि अवसाद  उत्पन्न हो
एक बात और



देर रात तक जागने या लम्बे समय तक लगातार जागने की आदतों की वज़ह से  शरीर में थकान
का स्तर बढ़ता  है क्योकि  लगातार काम
करने से मांस पेशियों में लेक्टिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है   भोजन का आक्सीकरण
आधा ही हो पाता है .इसे एक तरह
से शरीर में भोजन का अपव्यय कह सकते है और उससे भूख का विज्ञान भी बदल जाता है जिसके तहत शरीर में भोजन की उपलब्धता के बावजूद भूख लगने लगती है और ऐसे में अनायास ही व्यक्ति अधिक खाने और पीने लगता है जो शरीर को मोटापे की ओर धकेलने लगता है.
साथ ही देर रात तक जागने से भोजन की पाचन प्रणाली भी धीमी हो जाती है  क्योकि रक्त का पूर्ण
संचार आँतों की ओर नही हो पाता ओर ऐसे में पाचन से जुडी हुई नई परेशानियां जन्म लेने लगती हैं  यथा एसिडिटी , अपच , कब्ज़, गैस
बनाना इत्यादि
.



 यहाँ  भी मैं एक बात
कहना चाहूंगी कि प्रत्येक व्यक्ति  का शरीर अपनेआप
में एक यूनिक मशीन है इसलिए किसी भी दूसरे व्यक्ति से स्वयं के शरीर सम्बन्धी आदतों की तुलना मत कीजिये
.
इसलिए
आइये इन बातो को जीवन में शामिल करें
**
पूरी नींद
**
गहरी नींद
            ** और समय
पर नींद

क्रमश : 

रजनी भरद्वाज 

लेखिका

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