– धीरे गुनगुना रहा था | यात्री आदमी भी निश्चित हो सड़क पर इधर – ऊधर देख रहा था | तभी एक मोड़ पर अचानक से तेजी से
गाड़ी आई | टैक्सी वाले ने जल्दी से ब्रेक लगाया | दोनों गाड़ियाँ बस टकराते –
टकराते बची | यात्री को तेज झटका लगा | उसे बहुत गुस्सा आया | नियम के अनुसार मोड़
पर गाड़ियां धीमी ही चलानी चाहिए | वर्ना एक्सीडेंट का खतरा रहता है | इन दो
गाड़ियों का एक्सीडेंट होते-होते ही बचा था |
ने देखा की उस गाडी वाले ने भी गाडी रोक ली है | और उतर कर इस तरफ आ रहा है |
क्योंकि सरासर उसकी गलती थी | इसलिए यात्री ने सोंचा कि लगता है वो माफ़ी मांगने आ
रहा है | अब टैक्सी ड्राइवर जरूर उसे खूब सुनाएगा | यह भी कोई तरीका है गाडी चलाने
का |
ड्राइवर को भला बुरा कहने लगा | अपनी गलती होते हुए भी वो दोष उस भले ड्राइवर पर
लगा रहा था | इससे पहले की यात्री उसके पक्ष में कुछ कहता टैक्सी ड्राइवर ने
मुस्कुरा कर हाथ हिलाते बाय – बाय की मुद्रा में आते हुए टैक्सी आगे बढ़ा दी |
कोई बात है की गलती उसकी थी , फिर भी वो आदमी
तुमको सुना कर चला गया | और तुमने एक शब्द भी कहने के स्थान पर मुस्कुरा कर
उसे बाय कर दिया |
वो अगर किसी से टकरा जाए तो अपना कूड़ा ही दूसरों पर डालेगी |अब ये आप की
जिम्मेदारी है की आप उससे बच कर चलें | नहीं तो कूड़ा आप पर ही गिरेगा | ऐसे ही अगर
कोई व्यक्ति कूड़ा यानी ज़माने भर की नकारात्मकता अपने ऊपर ले कर चलेगा तो वो उसे
दूसरों पर डालेगा |अगर आप उसे डालने देंगे तो आप भी कूड़ा गाडी बन जायेंगे और
दूसरों पर वही फेंकते हुए घूमेंगे | इसलिए बेहतर है उन्हें बाय – बाय कर दें और
कूड़े को आगे फैलने से रोकें |
टैक्सी ड्राइवर का उत्तर सुन कर यात्री उसकी समझदारी का कायल हो गया
और मंद – मंद मुस्कुराने लगा |
अगर कोई अपनी नकारात्मकता हमारे ऊपर फेंकने की कोशिश करे तो हम वहां न रुके रहे
बल्कि वहां से उठी के चल दे | इससे नकारात्मकता का चक्र रुक जाएगा | या यूँ कहे की
कम से कम हम तो अपने को नकारात्मकता से बचाए रखेंगे और सकारात्मक रहेंगे |
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