पढ़िए मार्मिक लप्रेक – मतलब की समझ ?
अपना गुलाबी पर्स ले कर स्नेहा बड़बड़ाते हुए ऑफिस से निकल गयी | कितना गुस्सा भरा था स्नेहा के मन में वरुण के लिए | आखिर वरुण ने नमिता को उसके बराबर क्यों बता दिया |
नमिता , वरुण और स्नेहा ऑफिस के एक ही प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे | ये लव ट्राई एंगल था की नहीं ये तो किसी को पता नहीं था | अलबत्ता वरुण और स्नेहा की करीबी किसी से छुपी नहीं थी |
दोनों बहुत खुश थे | इतना साथ तो नसीब वालों को ही मिलता है ऑफिस में भी घर में भी
|
भविष्य के द्वार पर सुन्दर सपनों की बंदनवार सजने लगी थी |
तभी नमिता ने ऑफिस ज्वाइन किया | नमिता वरुण और स्नेहा तीनों अच्छे दोस्त बन गए | नमिता जब तब वरुण को अपनी आर्थिक दिक्कते बताती रहती |
कई बार कुछ पर्सनल बातें भी शेयर करती | स्नेहा ने शुरू में तो ध्यान नहीं दिया | पर उसे वरुण और नमिता का साथ अखरने लगा |
वो वरुण से शिकायती लहजे में कहती तो वरुण “बस अच्छे दोस्त हैं” कहकर टाल देता | वो कहता, “स्नेहा मेरे जीवन में
तुम्हारी जगह कोई नहीं ले सकता”| तुम कभी भी इस बात की चिंता मत करना |पर अक्सर दोनों के बीच इस बात को लेकर तनातनी हो जाती |
मामला तब से बिगड़ने लगा जब बॉस ने ऑफिस में एक प्रतियोगिता रख दी | पूर ऑफिस के चार ग्रुप बनाए | हर ग्रुप में चार लोग थे |सबको एक–एक प्रोजेक्ट दिया गया | जिस ग्रुप का प्रोजेक्ट सबसे अच्छा होता उसे ग्रुप को बेस्ट ग्रुप का अवार्ड और थाईलैंड की दो दिन तीन रात की ट्रिप इनाम में मिलनी थी |
अब इसे नसीब कहे या कुछ और ?स्नेहा के ग्रुप में वरुण , नमिता और सूर्यांश थे | तभी सूर्यांश को दूसरी कम्पनी से ऑफर मिल गया | वो कंपनी छोड़ कर चला गया | रह गए ये तीन | स्नेहा चाहती थी की अवार्ड उसके ग्रुप मिले तो उसे वरुण
के साथ थाईलैंड जाने का मौका मिलेगा | स्नेहा पूरी मेहनत से जुट गयी |
उसने पढना शुरू किया ,शुरू के धन्यवाद ज्ञापन के बाद वरुण ने लिखा था “इस अवार्ड को पाकर मैं बहुत खुश हूँ | आखिर इसमें मेरी मेरी लाइफ और मेरी बेस्ट फ्रेंड की मेहनत जो शामिल है”
जब आग अंदर धधक रही होती है तो छोटी सी चिंगारी ही काफी होती है | इतना पढ़ते ही स्नेहा का पारा गर्म हो गया | जोर से बोली तो ये स्पीच तुम दोगे | मैं तुम्हारे और नमिता के रिश्ते का मतलब समझ गयी | सबके सामने उसे और
मुझे बराबर कहोगे |क्या हम दोनों का काम और स्थान बराबर है |
अब वो बेस्ट फ्रेंड हो गयी | अरे, वाइफ बेस्ट फ्रेंड होती है | मैं वुड बी वाइफ हूँ |मेरे सामने उसको बेस्ट फ्रेंड कहोगे | बेस्ट फ्रेंड भी मैं ही हूँ | मेरे होते वो बेस्ट फ्रेंड हो गयी | अब मतलब समझ में आया | स्नेहा बिना रुके क्रोध के आवेश में बोले जा रही थी |
स्नेहा चली गयी, उसने वरुण से सारे संपर्क काट दिए
समय अपनी गति से चल पड़ा | करीब डेढ़ साल बाद उसे सूर्यांश दिखाई पड़ा | उसे देखते ही उसने हाथ हिलाया | प्रत्युत्तर में उसने भी हाथ हिलाया | सूर्यांश उसके पास आ गया | दो कप कॉफ़ी के साथ बाते शुरू हो गयीं |बातों ही बातों में उसने वरुण के लिए दुःख प्रकट किया |
स्नेहा के आँसू जैसे जम गए |वो वहाँ ज्यादा देर बैठ न सकी | डेढ़ साल पुराना अतीत आँखों के सामने नाचने लगा |मन रेल हो गया और अतीत वो पटरी , जिस पर अनायास ही दौड़ने लगा, बिना इंजन के बेलगाम |
कर वही दौड़ रहा है | क्यों एक बार… बस एक बार वरुण को पाना चाहता है, देखना चाहता है, मिलना चाहता है |
किसी तरह से खुद को संभाल कर घर आई | पर मन में विचारों का सैलाब उमड़ रहा था | माना की वरुण दुखी था , निराश था पर नमिता … नमिता को तो … पर उसने तो अपना मोबाइल नंबर तक बदल लिया था | अंत तक उसे वरुण का साथ मिला …. नहीं अंत तक उसने वरुण का साथ निभाया |
घंटों तकिया सर में छुपाये रोती रही स्नेहा | वरुण के सारे गिफ्ट्स भी तो फेंक दिए थे उसने |
खोला … अक्षर भले ही आँसुओं के कारण गायब हो रहे थे फिर भी वो हिम्मत कर के पढ़ती गयी |
इसके आगे के सारे अक्षर गायब हो गए | स्नेहा रुक गयी | एक एक शब्द वही था , सही तो लिखा था वरुण ने , मैं उसकी लाइफ जो उसे छोड़ कर गयी तो वो जी ना सका और …और नमिता बेस्ट फ्रेंड जिसने अंत तक साथ निभाया पर … लाइफ ..
स्नेहा जोर – जोर से रोने लगी .. सही तो लिखा था , सही तो लिखा था , वरुण ! तुमने सही तो लिखा था | पर .. पर …इसका मतलब तब क्यों नहीं समझ आया ?
यह भी पढ़ें
बाबा का घर भरा रहे
Comments are closed.