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सदन है! लेकिन अटल कोई नहीं

पूर्व प्रधानमत्री



अटल जी जैसा नेता जिसे पक्ष व् विपक्ष के सभी लोग सम्मान करते है आज के समय में दूसरा कोई नहीं है | इस समय उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है | आइये पढ़ें अटल बिहारी बाजपेयी जी की दीर्घायु की प्रार्थना करते हुए एक कविता …



सदन है! लेकिन अटल कोई नहीं


सदन है——-
लेकिन अटल कोई नही।

वे घंटो अपनी रौ मे बोलते,
कभी अपनी,कभी सब की गाँठ खोलते,
कहकहे,ठहाको के बीच वे उनका चुटिलापन,
कितना खाली हो गया है सदन——-
शायद!अब भी उनका हल कोई नही।
सदन है———
लेकिन अटल कोई नही।

ना झुका, ना रुका पोखरण तक,
शायद! राष्ट्रभक्ति थी उनके अंतःकरण तक,
लेकिन वे पड़ोस को चाहते भी थे,
तभी तो बस ले लाहौर तक गये थे,
लेकिन छल किया मुशर्रफ़ ने,
और अटल के मन मे था महज़ प्यार—-
एै “रंग” छल कोई नही।
सदन है—-
लेकिन अटल कोई नही।

वे जिये शतायु हो ये कामना है,
सच सियासत मे उनके बाद बस टाट ही आये,
उनके जैसा——
रेशमी मखमल कोई नही।
सदन है——
लेकिन अटल कोई नही।

@@@रचयिता—–रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)।

कवि





फोटो क्रेडिट –somethingtosay.in
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