темп на довгому трейловому підйомі

जगत बा

neelam kulshreshth

दुर्गा को पूजने वाले इस देश में कब स्त्रियाँ कमजोर और कोमल मान लीं गयीं ठीक ठीक नहीं कहा जा …

Read more

Share on Social Media

दो पौधे

दो पौधे

बोध कथाओं में जीवन की जल्तिल बातों को सच्चे सरल ढंग से सुनाने का प्रचलन रहा है | अब जीवन …

Read more

Share on Social Media

बदल दें

किरण आचार्य

क्या इतिहास को बदला जा सकता है | हालांकि ये ये संभव नहीं है फिर भी कवी मन ऐतिहासिक पात्रों …

Read more

Share on Social Media

अधजली

सिनीवाली शर्मा

हिस्टीरिया तन से कहीं अधिक मन का रोग है | तनाव का वो कौन सा बिंदु है जिसमें मन अपना …

Read more

Share on Social Media

निगोड़ी

स्मृतियाँ हमें तोडती भी हैं हमें जोडती भी हैं | ये हमारी जीवन यात्रा की एक धरोहर है | हम …

Read more

Share on Social Media

स्लीप मोड

वंदना गुप्ता

“आज कल मुझे कुछ याद नहीं रहता” कितनी बार हम खुद ये शब्द कहते हैं और कितनी बार अपनों के …

Read more

Share on Social Media

सलीब

सलीब

सलीब पर  लटकना कितना  दर्दनाक होता है पर ये दर्द न जाने कौन कौन भोगता आया है चुपचाप |  सलीब …

Read more

Share on Social Media

सच्चा कलाकार

बात 2015 की है मुझे दिल्ली के लवली पब्लिक स्कूल के वार्षिकोत्सव में मुख्य अतिथि के तौर पर बच्चों और …

Read more

Share on Social Media

हौसला

यह लघुकथा एक आशा है उस दिन की जब कोरोना नहीं रहेगा | हम इस भय से निकल कर उन्मुक्त …

Read more

Share on Social Media

श्रीराम द्वारा सीता का त्याग : सत्य या इतिहास के साथ की गयी छेड़ छाड़

अभी कुछ दिन पहले इस लॉक डाउन काल में  दूरदर्शन में पूराने लोकप्रिय सीरियल रामायण और महाभारत का पुन: प्रसारण …

Read more

Share on Social Media
error:

जिस तरह एक स्वस्थ रिश्ते की नींव आपसी विश्वास और समझदारी पर टिकी होती है, उसी तरह परिवार की आर्थिक सेहत के लिए भी सूचित और सतर्क फ़ैसले ज़रूरी हैं। डिजिटल युग में नए-नए वित्तीय विकल्प लगातार उभर रहे हैं, और जो लोग इनकी बारीकियों को समझना चाहते हैं, वे अक्सर bitcoin sázení जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी पढ़ते हैं। हालाँकि, यह कभी न भूलें कि सट्टेबाज़ी में हमेशा जोखिम शामिल होता है और इसे कभी भी आय या पैसा कमाने के भरोसेमंद साधन के रूप में नहीं देखना चाहिए — बेहतर यही है कि ऐसे विकल्पों में केवल उतना ही शामिल हों, जितना आप खोने का खर्च उठा सकते हैं, और ज़रूरत पड़ने पर किसी जानकार से सलाह ज़रूर लें।