अभी तो में जवान हूँ

जब पचपन के घरघाट भयन,
तब देखुआ आये बड़े – बड़े।
हम सादी से इनकार कीन,
सबका लौटारा खड़े – खड़े॥

कविता का ये अंश अवधि के लोकप्रिय कवि रमई काका (1925-1982)की कविता “बुढ़ऊ का ब्याह” से लिया है | कविता भले ही पुरानी हो पर बुढ़ापे में जवान दिखने की खवाईश आज भी उतनी ही ताज़ा है | ऐसे ही है बिसन चाचा.. जिनके सर पर जवान दिखने का भूत कुछ इस तरह सवार हुआ कि .. आइए पढ़ें  आज के समय की बेहद  लोकप्रिय व्यंगकार अर्चना चतुर्वेदी जी की व्यंग रचना “अभी तो मैं जवान हूँ ” हो सकता है व्यंग पढ़ते -पढ़ते आपको भी कोई नुस्खा मिल जाए |

 

जवान दिखने के मामले में हमारे बिसन चच्चा ने लुगाइयों को भी पछाड़ रखा है ..उन्हें तो बस जवान दिखने का शौक ऐसा चर्राया है कि वो कुछ भी करने को तैयार हैं .. उम्र भले ही छप्पन की हो पर दिल फुल टू जवान है. देखने में कद काठी मजबूत है ..हाँ गाल थोड़े पिचक से गए हैं ..और आँखे भी थोड़ी गड्डे में धंस गयी हैं ..मुस्कान बड़ी मारक है सो बंदी पटाने में देर नहीं लगती ..पिछले दो चार साल से खोपड़ी के बाल उनका साथ छोड़ते जा रहे हैं जो काफी हिस्सा चिकना हो गया है ..उसकी वजह से बाकी बचे बालों को रंगने में भी मुश्किल होती है | अब बिसन चच्चा बाकी सब तो एडजस्ट कर लेते हैं ..आँखों पर ऐनक चढ़ा लेते हैं ..चेहरे का रेगुलर फेशियल भी हो जाता है पर इन ससुरे बालों का क्या जिनकी वजह से वे भरी जवानी में बूढ़े नजर आने लगे हैं ..और ये उन्हें कतई गवारा नहीं कि कोई जवान सुन्दरी उन्हें अंकल कहकर निकल ले ..
किसी ने कहा आंवला पाउडर लगाओ.. तो पूरे सर पर आवला पोत कर बैठ गए .किसी ने कहा दोनों हाथों के नाख़ून आपस में रगडो ..फिर तो चच्चा हर वक्त नाख़ून ही रगड़ते ..रगड़ रगड़ कर नाख़ून घिस गए पर चाँद गंजी की गंजी ही रही..पर चच्चा निराश नहीं हुए . ..कई देशी इलाज अपना डाले ..खूब बेस्वाद पुडिया भी खा डाली..हकीम जी के दिए बदबू दार तेल भी लगाये पर नतीजा जीरो. कहते हैं ना जो एक बार साथ छोड़ जाए ..वो आसानी से कहाँ वापिस आते हैं ..पर चच्चा हार मानने वालों में से नहीं …
अभी तरह तरह के उपाय इलाज ..चल ही रहे थे कि किसी ने चच्चा को बता डाला “ चच्चा बाजार में ऐसी तकनीकी आई है जिससे नए बाल उगाये जाते हैं”
अच्छा क्या सच में बाल ऊग सकते हैं, फिर से? “ चच्चा ने खुश होते हुए पूछा
हाँ चच्चा अरे आपने क्रिकेट खिलाडी सहवाग को नहीं देखा… अब ..कैसा जवान सा दीखे बाल उगवा के” भतीजे ने अपनी बात अब उदाहरण सहित समझाई
चच्चा तो ख़ुशी से ऊछल पड़े और बोले ..तू तो बस ऐसा कर ..पता करके आ जा कितने में हो जायेगा ये काम ..और कितने दिन लगेंगे बाल आने में ? मैं तो अब उगवा ही डालूँगा
चाचा रोज सुबह शाम भतीजे को फोन करके जानकारी लेते ..अब भतीजे जी आनाकानी कर रहे थे उन्हें पता ही नहीं था कि सच में ये तकनिकी कहाँ है और कौन करता है ईलाज ..पर चच्चा तो बैचैन हो उठे थे ..वो वक्त जाया नहीं करना चाहते थे ..सो और लोगों से भी पूछने लगे ..आखिरकार एक दिन अखबार में बड़ा सा विज्ञापन देख चच्चा उछल पड़े ..और सीधे पहुँच गए बताये हुए पते पर .और अपनी समस्या सुना डाली ..उन्हें जल्द से जल्द समाधान चाहिए था |
वहां जाकर जब उन्होंने फीस सुनी और पूरी प्रक्रिया सुनी ..तो थोड़े से सकपकाए क्योंकि इतने रूपये अभी उनके पास नहीं थे और यदि हों भी तो अपने बालों पर इतना खर्च कर दिया तो पत्नी जी जीना मुहाल कर देंगी. जो कई सालों से सोने की चूड़ियों की मांग कर रही हैं और चच्चा बहाने बना रहे हैं ..वैसे भी इतने खर्चे और इतने दर्द के बाद बाल जमेंगे ही इसकी कोई गारंटी नहीं थी .
चच्चा बेचारे निराश से हो लौट तो आये ..पर मिशन बाल उगाओ जारी था ..किसी भी जगह शादी ब्याह में या पार्टी में जाते तो खूब सजते ..अच्छे भी लगते ..दस लोगों से पूछते कैसा लग रहा हूँ? ..लेकिन जैसे ही अपने फोटो देखते फिर उदास हो जाते ..” यार बाल ऊग जाते तो मै भी जमता ..कैसा बूढ़ा सा दिख रहा हूँ “
सब समझाते “ अरे चाचा बहुत जमते हो तुम ,तुम्हे जरुरत ना है इन बालों की”
पर चाचा के दिल में तो काँटा सा लगा था ..
कुछ दिन बाद किसी भतीजे ने उन्हें विग लाकर दे दी ..विग देखकर चाचा खुश हुए ..फिर एक दो दिन खोपड़ी पर विग पहनी..शक्ल तो अच्छी दिख रही थी ..बिना मेहनत बालों की खेती भी हो गयी पर इस विग में इतनी गर्मी लगती कि चाचा का जी घबरा उठता और खोपड़ी पसीने से भीग उठती. सो ये इलाज भी फेल ही साबित हुआ |
चाचा फिर से तरह तरह के तेल साबुन लगा बाल उगाने का प्रयास करने लगे.. किसी ने कहा कड़ी पत्ता पीस कर लगाओ ..तो किसी ने कहा गुडहल का फूल तेल में डालकर कर लगाओ ..चाचा सारा दिन इन्ही नुस्खो में लगे रहते ,,पत्नी और बच्चे मजाक बनाते पर चाचा पर कोई असर नहीं होता . वो तो अर्जुन बन चुके थे जिनका निशाना सिर्फ मछली की आँख पर था |
फिर एक दिन किसी हकीम साहब ने बाल उगाने की गारंटी ली और उन्हें एक तेल दे दिया जिसे उन्हें रात को लगाकर सोना था ..सुबह बाल दिखेंगे खोपड़ी पर ..
चाचा ख़ुशी ख़ुशी लगभग उछलते हुए घर पहुंचे …बीबी को हुक्म दिया जल्दी से खाना लगा दे ..ताकि जल्दी सोने जा सके. आखिरकार तेल जो लगाना था ..पत्नी जी से खरी खोटी भी सुनी पर जबाब देने में कौन समय बर्बाद करे ..बाल उगायें या इसके मुहँ लगें सोचकर चच्चा चुप ही रहे .
रात हुई तो चच्चा ने अपनी खुपड़िया की जम कर मालिश की और सो गए …आधी रात को चच्चा को फुफकारने की आवाज आई और खोपड़ी पर कुछ गिलगिला सा महसूस हुआ .जो हिल डूल भी रहा था. पहले तो चच्चा नींद में थे, समझ नहीं आया.. फिर ध्यान लगाया तो महसूस हुआ कि खोपड़ी पर सांप महाराज लिपटे फुफकार रहे हैं …चच्चा की घिघ्ही बंध गयी …मुहँ से गें गें करके आवाजें निकलने लगी …बिस्तर गीला हो चुका था ..चच्चा डरे हुए थे. हिलते तो सर्प देवता नाराज हो सकते थे . उनकी आवाज सुनकर दूसरे कमरे में सोई पत्नी जी बाहर आई और लाईट जलाई .. उन्हें देख चच्चा की जान में जान आई ..उन्हें लगा अब तो पत्नी जी उन्हें बचा ही लेंगी ..पर ये क्या पत्नी जी तो अपना मोबाइल ले आयीं ..और फिर दूर खड़े होकर विडिओ बनाने लगीं ..बाकायदा रिपोर्टिंग टाइप भी कर रही थी — लीजिये साक्षात् बिष्णु भगवान धरती पर उतर आये हैं.. आप लोग भी उनके दर्शनों का लाभ लीजिये ..उनके शेषनाग उनके सिर पर लिपटे हैं ..प्रभु आराम कर रहे हैं ..आदि आदि
चच्चा को गुस्सा तो बहुत जोर से आ रहा था .पर ना तो हिलने के हालात थे, ना बोलने के .कमबख्त कौन से जनम की दुश्मन है ..पति की जान पे बनी है और ये महारानी मजे ले रही है” चच्चा मन ही मन भिन्ना रहे थे…और सारे देवी देवताओं को याद कर रहे थे. पता नहीं उस वक्त कौन आस आस हो और उन्हें बचाने चला आये ….फिर कुछ देर बाद हिम्मत करके.. पत्नी जी ने डंडा फटकारना शुरू किया ..बालकनी का दरवाजा खोल कर तरह तरह के उपाय करने लगी ताकि सर्प महाराज चच्चा की खोपड़ी से हटें . ये ड्रामा कुछ घंटे यूँ ही चला.
आखिरकार सर्प देवता हिले और उनकी खोपड़ी से उतर बालकनी की तरफ बढ़ गए ..पत्नी जी भाग कर कमरे में घुस गयीं और दरवाजा बंद कर लिया ..जब चच्चा आस्वस्त हुए कि सांप चला गया है तो उठे और अपने कपडे बदले ..अब वे पत्नी को जोर जोर गालियाँ दे रहे थे और साथ ही हकीम साहब को भी ..तब तक पत्नी जी भी कमरे से निकल आयीं और तेल की शीशी उठाकर पढने लगी ..
अब के वे चिल्ल्लाई ..”पागल हो गए हो तुम ..पता नहीं क्या आग लगी है बाल उगाने की ..कम से कम पढ़ तो लेते ..नहीं पढ़ा तो सूंघ ही लेते ..पर नहीं तुम्हे तो सिर्फ बाल चाहिए खोपड़ी पर , चन्दन का तेल है ..इसकी खुसबू से सांप आकर्षित होता है ..यदि तुम्हे काट जाता तो ..मेरा और बच्चो का क्या होता ?” कहकर पत्नी जी छाती कूट कूट कर रोने लगी ..खुद पर उल्टा अटैक होते देख चच्चा शांत हो गए और पत्नी जी को भी मनाने लागे ..पत्नी जी मानी तो सही पर चच्चा से कसम ले ली गयी कि अब वे बाल उगाने का कोई उपाय नहीं करेंगे ..उन्हें वो ऐसे ही अच्छे लगते हैं |चच्चा ने भारी मन से कसम तो खा ली ..पर खोपड़ी पर बाल उगाने का सपना आज भी आँखों में लिए कसमसाते हैं| ..

अर्चना चतुर्वेदी

अर्चना चतुर्वेदी

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