темп на довгому трейловому підйомі

मुझे पत्नी पतंजलि की मिल गई

मुझे पत्नी पतंजलि की मिल गई


सुबह होते ही———–
कपाल भाति और अनुलोम-विलोम कर गई,
हाय!राम———
मुझे पत्नी पतंजलि की मिल गई।
एलोवेरा और आँवले के गुण बता रही,
मुझे तो अपने जवानी की चिंता सता रही,
हे! बाबा रामदेव———-
आपने मेरी खटिया खड़ी कर दी,
सारे रोमांस का नशा काफुर हो गया,
ससुरी पति के प्यार का आसन छोड़—–
आपके योगासन मे पिल गई।
हाय!राम———–
मुझे पत्नी पतंजलि की मिल गई।
रोज च्यवनप्राश और दूध का सेवन,
पचासो दंड बैठक,
मै निरुपाय तक रहा उसका रुप लावण्य,
तीन दिन हो गये हाथ न लगी,
डर है कि ये दिन कही तीस न हो जाये,
उफ!ये दूरी———–
यही सोच के मेरी बुद्धि हिल गई।
हाय!राम————
मुझे पत्नी पतंजलि की मिल गई।

@@@रचयिता—–रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)।



लेखक व् कवि





यह भी पढ़ें …




आपको  कविता  .मुझे पत्नी पतंजलि की मिल गई कैसी लगी   | अपनी राय अवश्य व्यक्त करें | हमारा फेसबुक पेज लाइक करें | अगर आपको “अटूट बंधन “ की रचनाएँ पसंद आती हैं तो कृपया हमारा  फ्री इ मेल लैटर सबस्क्राइब कराये ताकि हम “अटूट बंधन”की लेटेस्ट  पोस्ट सीधे आपके इ मेल पर भेज सकें 
Share on Social Media
error:

जिस तरह एक स्वस्थ रिश्ते की नींव आपसी विश्वास और समझदारी पर टिकी होती है, उसी तरह परिवार की आर्थिक सेहत के लिए भी सूचित और सतर्क फ़ैसले ज़रूरी हैं। डिजिटल युग में नए-नए वित्तीय विकल्प लगातार उभर रहे हैं, और जो लोग इनकी बारीकियों को समझना चाहते हैं, वे अक्सर bitcoin sázení जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी पढ़ते हैं। हालाँकि, यह कभी न भूलें कि सट्टेबाज़ी में हमेशा जोखिम शामिल होता है और इसे कभी भी आय या पैसा कमाने के भरोसेमंद साधन के रूप में नहीं देखना चाहिए — बेहतर यही है कि ऐसे विकल्पों में केवल उतना ही शामिल हों, जितना आप खोने का खर्च उठा सकते हैं, और ज़रूरत पड़ने पर किसी जानकार से सलाह ज़रूर लें।