वंदना बाजपेयी
नकाब घूँघट और टैटू
घूँघट और टैटू |हालांकि आपको ये तीनों बेमेल दिख रहे होंगे | कुछ लोग इसे धर्म से जोड़ने का प्रयास …
सोनम , आयशा या एरिका – आखिर महिलाओं की सरेआम बेईज्ज़ती को कब तक मजाक समझते रहेंगे हम
वंदना बाजपेयी अभी कुछ दिन पहले जब सोशल मीडिया देश नोट बंदी जैसे गंभीर मुद्दे पर उलझा हुआ था | …
समीक्षा – “काहे करो विलाप” गुदगुदाते ‘पंचों’ और ‘पंजाबी तड़के’ का एक अनूठा संगम
हिंदी साहित्य की अनेकों विधाओं में से व्यंग्य लेखन “एक ऐसी विधा है जो सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं और सबसे …
फीलिंग लॉस्ट : जब लगे सब खत्म हो गया है
आज मैं लिखने जा रही हूँ उन तमाम निराश हताश लोगों के बारे में जो जीवन में किसी मोड़ पर …
हिंदी दिवस पर विशेष – हिंदी जब अंग्रेज हुई
वंदना बाजपेयी सबसे पहले तो आप सभी को आज हिंदी दिवस की बधाई |पर जैसा की हमारे यहाँ किसी के …
पति -पत्नी के बीच सात्विक प्रेम को बढाता है तीज
विवाह की बस एक गाँठ दो अनजान – अपरिचित लोगोंको एक बंधन में बांध देती है जिसमें तन ही नहीं …
लघुकथा – कला
तुम्हारा क्या … दिन भर घर में रहती हो … कोई काम धंधा तो है नहीं … यहाँ बक बक …
रक्षा बंधन -भाई बहन के प्यार पर हावी बाज़ार
मेरे भैया मेरे चंदा मरे अनमोल रतन तेरे बदले मैं ज़माने की कोई चीज न लूँ रेडियो पर बहुत …
मीना कुमारी -एक दर्द भरी ग़ज़ल
चिंदी चिंदी दिन मिला , तन्हाँ तनहा रात मिली जितना जिसका आँचल था , उतनी उसको सौगात मिली मीना कुमारी …
व्यंग – हमने भी करी डाई-ईटिंग
लेख का शीर्षक देख कर ही आप हमरी सेहत और उससे उत्पन्न परेशानियों के बारे में अंदाजा लगा सकते हैं …
रूपये की स्वर्ग यात्रा
त्रिपाठी जी और वर्मा जी मंदिर के बाहर से निकल रहे थे । आज मंदिर में पं केदार नाथ जी …
“माँ“ … कहीं बस संबोधन बन कर ही न रह जाए
माँ केवल एक भावनात्मक संबोधन ही नहीं है , ना सिर्फ बिना शर्त प्रेम करने की मशीन ….माँ के प्रति …
आज गंगा स्नान की नहीं गंगा को स्नान कराने की आवश्यकता है
गंगा एक शब्द नहीं जीवन है , माँ है , ममता है | गंगा शब्द से ही मन असीम …
लिखो की कलम अब तुम्हारे हाथ में भी है
लिखो की कलम अब तुम्हारे हाथ में भी है लिखो की कैसे छुपाती हो चूल्हे के धुए में आँसू लिखो …
अटूट बंधन वर्ष -२ , अंक -१ सम्पादकीय
तेरा शुक्रिया है … “ अटूट बंधन “ राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका अपने एक वर्ष का उत्साह व् उपलब्धियों से …
चूडियाँ ( कहानी -वंदना बाजपेयी )
न जाने क्यों आज उसका चेहरा आँखों के आगे से हट नहीं रहा है, चाहे कितना भी मन …
डायरियाँ – कविता ( वंदना बाजपेयी )
डायरियाँ जब -जब मैं दर्द और वेदना से भर उठी मेरी आह और कराह ढल गयी शब्दों में और किसी …
एक पाती भाई /बहन के नाम (वंदना बाजपेयी )
भैया ,कितना समय हो गया है तुमको देखे हुए | पर बचपन की सारी बातें सारी शरारतें अभी भी जेहन …