वंदना बाजपेयी
मायके आई हुई बेटियाँ
मायके आई हुई बेटियाँ , फिर से अपने बचपन में लौट आती है , और जाते समय आँचल के छोर …
*मोह* ( साहित्यिक उदाहरणो सहित गहन मीमांसा )
वंदना बाजपेयी कोई इल्तजा कोई बंदगी न क़ज़ा से हाथ छुड़ा सकी किये आदमी ने कई जतन मगर उसके काम …
अब मॉफ भी कर दो
स्वीकारती हूँ सींच रही थी मैं अंदर ही अंदर एक वट वृक्ष क्रोध का कि चुभने लगे थे कांटे रक्तरंजित …
होली पर इंस्टेंट गुझियाँ मिक्स मुफ्त :स्टॉक सीमित
होली केवल रंगों का त्यौहार ही नहीं है , हंसने खिलखिलाने का भी त्यौहार है | हँसने –हँसाने का ये …
लो भैया ! हम भी बन गये साहित्यकार
कहते हैं की दिल की बात अगर बांटी न जाए तो दिल की बीमारी बन जाती है और हम दिल …
सिर्फ अहसास हूँ मैं…….. रूह से महसूस करो
फिर पद चाप सुनाई पड़ रहे वसंत ऋतु के आगमन के जब वसुंधरा बदलेगी स्वेत साडी करेगी श्रृंगार उल्लसित वातावरण में …
ये ख़ुशी आखिर छिपी है कहाँ
कौन है जो खुश नहीं रहना चाहता, पर हम जितना ख़ुशी के पास जाने की कोशिश करते हैं वो उतना …