झूठ की समझ

“आज अचानक तुझे क्या सूझ गया जो इन पुरानी किताबों को खंगाल रही हो | कुछ नहीं है इनमें  सब …

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बेगुनाह कर्ण

कर्ण और कुंती दो पात्रो पर लिखी ये महज़ कविता नही अपितु बेगुनाह कर्ण के वे आँसू है जो बिना …

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मास्टर जी

द्वारका प्रसाद जी पेशे से सरकारी विद्यालय में मास्टर थे । रायगढ़ नाम के छोटे से गाँव में उनकी पोस्टिंग …

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विशाखापट्टनम रेप -संवेदनाएं भी अब आभासी हो गयी हैं

विशाखापट्टनम का रेलवे स्टेशन साक्षी है एक ऐसे क्रूरतम कृत्य का जिसे पशुता कहना भी पशुओं का अपमान होगा |एक …

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