बाल दिवस है

चाय की दुकान पे———- सुट-बूट वाले साहब के, अधरो पे सुलगते सिगरेट का कश है, उस फैले धुँऐ में तेरह …

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मैं नन्हीं – सी

मैं नन्हीं – सी प्यार की मूरत हूँ |मैं भविष्य की छिपी हुई सूरत हूँ || मेरे मुस्कराने से कलियां …

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