सच की राहों में देखे हैं कांटे बहुत,
सच की राहों में देखे हैं कांटे बहुत,पर,कदम अपने कभी डगमगाए नहीं।बदचलन है जमाने की चलती हवा,इसलिए दीप हमने जलाए …
सच की राहों में देखे हैं कांटे बहुत,पर,कदम अपने कभी डगमगाए नहीं।बदचलन है जमाने की चलती हवा,इसलिए दीप हमने जलाए …
जिन्दगी कुछ यूं तन्हा होने लगी है अंधेरों से भी दोस्ती होने लगी है चमकते उजालों से लगता है डर …
ओमकार मणि त्रिपाठी प्रधान संपादक – अटूट बंधन एवं सच का हौसला जिस हृदय में विवेक का, विचार का दीपक …
तुम्हारा क्या … दिन भर घर में रहती हो … कोई काम धंधा तो है नहीं … यहाँ बक बक …
अरे! तुमने ब्रा ऐसे ही खुले में सूखने को डाल दी?’ तौलिये से ढंको इसे। ऐसा एक मां अपनी 13-14 …
मेरे भैया मेरे चंदा मरे अनमोल रतन तेरे बदले मैं ज़माने की कोई चीज न लूँ रेडियो पर बहुत …
राधा आटा गूंधते गूंधते बडबडा रही थी ” पता नहीं क्या ज्योतिष पढ रखी है इस आदमी ने हर बात …
कभी पढ़ने आती थी हमारे स्कूल में, सपेरो की बस्ती से————— एक सपेरे की बिटिया। वे तमाम किस्से सुनाती थी …
चिंदी चिंदी दिन मिला , तन्हाँ तनहा रात मिली जितना जिसका आँचल था , उतनी उसको सौगात मिली मीना कुमारी …
लेख का शीर्षक देख कर ही आप हमरी सेहत और उससे उत्पन्न परेशानियों के बारे में अंदाजा लगा सकते हैं …
त्रिपाठी जी और वर्मा जी मंदिर के बाहर से निकल रहे थे । आज मंदिर में पं केदार नाथ जी …
संगत का साथी हो सकता है यह औखत पर औज़ार फकीर का मँजीरा सिपाही का तमंचा सबसे सलोना यह खिलौना …
कुमार गौरव मौलिक एवं अप्रकाशित एक छुट्टी के दिन कोई पत्रकार कुछ अलग करने के ख्याल से जुगाड़ लगाकर ताजमहल …
एक बार एक आदमी अपने छोटे से बालक के साथ एक घने जंगल से जा रहा था! तभी रास्ते …
माँ केवल एक भावनात्मक संबोधन ही नहीं है , ना सिर्फ बिना शर्त प्रेम करने की मशीन ….माँ के प्रति …