सतरंगिनी – ओमकार मणि त्रिपाठी की सात कवितायें
1… आखिर कब तक….? डूबे रहोगे सिर्फ बौद्धिक व्यभिचार में वक्त पुकार रहा हैसमस्याओं के उपचारकी बाट जोह रहे हैं …
1… आखिर कब तक….? डूबे रहोगे सिर्फ बौद्धिक व्यभिचार में वक्त पुकार रहा हैसमस्याओं के उपचारकी बाट जोह रहे हैं …
कमल के फूल को योग और अध्यात्म में एक प्रतीक के रूप में देखा जाता है। योगिक शब्दावली में बोध …
उत्तर प्रदेश में सहायक शिक्षक के रूप में समायोजित किये गए शिक्षामित्रो को एक साथ कई समस्याओं का सामना करना …
भारतीय संस्कृति में अक्टूबर नवम्बर माह का विशेष महत्व् है,क्योंकि यह महीना प्रकाशपर्व दीपावली लेकर आता है.दीपावली अँधेरे पर प्रकाश …
संजय वर्मा ‘दृष्टि ‘ पुराने 500 व 1000 की करेंसी नोट लीगल टेंडर नहीं होने के बाद नए 500 व् 2000 …
वंदना बाजपेयी अभी कुछ दिन पहले जब सोशल मीडिया देश नोट बंदी जैसे गंभीर मुद्दे पर उलझा हुआ था | …
हिंदी साहित्य की अनेकों विधाओं में से व्यंग्य लेखन “एक ऐसी विधा है जो सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं और सबसे …
– डॉ. जगदीश गांधी, शिक्षाविद् एवं संस्थापक-प्रबन्धक, सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ (1) कितने भी संकट हो प्रभु कार्य समझकर विश्व …
आज मैं लिखने जा रही हूँ उन तमाम निराश हताश लोगों के बारे में जो जीवन में किसी मोड़ पर …
सही अर्थों में पूछा जाए तो स्वाभाविक लेखन अन्दर की एक बेचैनी है जो कब कहाँ कैसे एक धारा के …
” तिराहा “एक ऐसा शब्द जो रहस्यमयी तो है ही सहज ही आकर्षित भी करता है | हम सब अनेक …
“स्त्री विमर्श” एक ज्वलंत विषय के रूप में प्राचीन काल से ही किसी न किसी बहाने, प्रत्यक्ष या परोक्ष परिचर्चा …
वंदना बाजपेयी सबसे पहले तो आप सभी को आज हिंदी दिवस की बधाई |पर जैसा की हमारे यहाँ किसी के …
डॉ . भारती वर्मा ‘बौड़ाई ‘ ये तब की बात है जब मैं पांचवीं कक्षा में पढ़ती थी। …
बैठ कर हम गुरू चरण सीखे सभी मान दे कर गुरू को सदा पूजे सभी ज्ञान की नई विधा सीख …
विवाह की बस एक गाँठ दो अनजान – अपरिचित लोगोंको एक बंधन में बांध देती है जिसमें तन ही नहीं …
मेरा मशवरा है यही की तोड़ दो उसे जिस आईने में ऐब अपने दिखाई न दें कहती है मेरे साथ कब्र …