अब मॉफ भी कर दो

स्वीकारती हूँ  सींच रही थी मैं  अंदर ही अंदर  एक वट वृक्ष  क्रोध का  कि चुभने लगे थे कांटे  रक्तरंजित  …

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पुरुस्कार

    पुरूस्कार  सुबह साढ़े ६ बजे का समय स्नेह रोज पक्षियों के उठने के साथ उठकर पहले बालकनी में जाकर …

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