विविध
सूखी रोटियाँ
चैनल के लिए कहानियों की खोज में कोशी के कछार भटकते भटकते एक बुढिया को देखा जो रोटियां सुखा सुखाकर …
चालाक कबूतर
बहेलिये ने कबूतर पकड़ा तो कबूतर चिल्ला उठे ” हमें छोड़ दो , हमें भी जीने का अधिकार है संविधान …
मोहसिन की बेवा
मोहसिन सेना की वर्दी पहने लद्दाख के ग्लेशियर में कहीं दब गया ।सरकार उसे मरा हुआ नहीं मानती । वो …
आरोप –प्रत्यारोप : बेवजह के विवादों में न खोये रिश्तों की खुशबू
कहते हैं जहाँ प्यार है वहां तकरार भी है | दोनों का चोली –दामन का साथ है | ऐसे में …
कहीं आपको फेसबुक का नशा तो नहीं ?
ऍफ़ बी या फेस बुक विधाता कि बनाई दुनियाँ के अन्दर एक और दुनियाँ ……… जीती जागती सजीव …कहते …
स्कूलों में बच्चों को ‘यौन शिक्षा’ के स्थान पर दी जाए ‘योग’ एवं ‘आध्यात्म’ की शिक्षा
27 सितंबर, 2014 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा में प्रस्ताव पेश किया था कि संयुक्त …
सिया राम ( राम के आगे सीता )
प्रभु राम की पत्नी माता सीता को भक्त श्रद्धा के पूजते हैं | माता सीता एक आदर्श पुत्री , पत्नी , …
अनूठी है शिखा शाह की कारीगरी
सेंट्रल पाॅल्यूशन कंट्रोल बोर्ड आॅफ इंडिया के फरवरी 2015 के आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रतिदिन 1.4 लाख टन …
पिता को याद करते हुए
डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई ——————————– कल बहुत दिनों बाद सुबह मिली खिली खिली बोली उदास होकर तुम्हारे पिता मुझसे रोज़ …
अपने पापा की गुड़िया
फादर्स डे पर एक बेटी की अपने पापा की याद को समर्पित कविता। अपने पापा की गुड़िया दो चुटिया बांधे …
ममत्व की प्यास
अशोक परूथी शांति का मन आज बहुत अशांत था. रो-रोकर उसने अपनी आंखें सुजा ली थी! वह अपनी किस्मत को …
राग झुमर सुन रहा हूँ
रचयिता—–रंगनाथ द्विवेदी मै उसके कान की बाली का राग झुमर सुन रहा हूं, कंगन,बिछुवे,चुड़ियां संगत कर रही, कोई घराना नही …
स्त्री देह और बाजारवाद ( भाग – 4 ) -स्त्री देह को अंधाधुंध प्रदर्शित कर नये -नये “प्रोडक्ट” बनाने की मुहिम
डॉ. मधु त्रिवेदी क्रिएटिव ऐश-ट्रे को वेबसाईट पर पेश कर नया तरीका सर्च किया महिलाओं की भावनाओं से …
धन उपार्जन और आपका विवेक – सोंच समझ कर खर्च करें
पंकज“प्रखर” पिछले दिनों अमीरी को इज्जत का माध्यम माना जाता रहा है। इज्जत पाना हर मनुष्य की स्वाभाविक इच्छा है। इसलिये …
सेहत का जूनून – क्या आप भी न्यूट्रीशनल वैल्यू पढ़ कर खाद्य पदार्थ खरीदते हैं |
स्मिता शुक्ला एक आम घर का दृश्य देखिये | पूरा परिवार खाने की मेज पर बैठा है | सब्जी रायता , …
हाँ, उस युग का वासी हूँ मैं
व्यंग्य –लेख अशोक परूथी “मतवाला“ मेरे युग में, {व्हट्सअप ओर सोशल मिडिया के जन्म से पहले), भी खबरें ‘वेरी फ़ास्ट‘ …