राग झुमर सुन रहा हूँ
रचयिता—–रंगनाथ द्विवेदी मै उसके कान की बाली का राग झुमर सुन रहा हूं, कंगन,बिछुवे,चुड़ियां संगत कर रही, कोई घराना नही …
रचयिता—–रंगनाथ द्विवेदी मै उसके कान की बाली का राग झुमर सुन रहा हूं, कंगन,बिछुवे,चुड़ियां संगत कर रही, कोई घराना नही …
डॉ. मधु त्रिवेदी क्रिएटिव ऐश-ट्रे को वेबसाईट पर पेश कर नया तरीका सर्च किया महिलाओं की भावनाओं से …
पंकज“प्रखर” पिछले दिनों अमीरी को इज्जत का माध्यम माना जाता रहा है। इज्जत पाना हर मनुष्य की स्वाभाविक इच्छा है। इसलिये …
स्मिता शुक्ला एक आम घर का दृश्य देखिये | पूरा परिवार खाने की मेज पर बैठा है | सब्जी रायता , …
व्यंग्य –लेख अशोक परूथी “मतवाला“ मेरे युग में, {व्हट्सअप ओर सोशल मिडिया के जन्म से पहले), भी खबरें ‘वेरी फ़ास्ट‘ …
– रंगनाथ द्विवेदी। जज कालोनी,मियाँपुर जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)। जी हाँ! किसानो का पेट और सीना चाक करती वे पुलिसिया गोली,गुलाम हिन्दुस्तान की …
मेरा जन्म 12 नवंबर, 1961 को रोमानिया के एक छोटे से शहर ओनेस्टी में हुआ था। जल्द ही मेरे …
दिनांक ६ /६ /17 को स्त्री देह और बाजारवाद पर एक पोस्ट डाली थी | जिस पर लोगों ने अपने …
कल स्त्री देह और बाजारवाद पर एक पोस्ट डाली थी | जिस पर लोगों ने अपने अपने विचार रखे | …
“अँधेरी रात मे——- वे शहर की स्ट्रिट लाइट से टेक लगा, अपना आधे से अधिक वक्षस्थल खोले, किसी ग्राहक को …
बाजारवाद ने सदा से स्त्री को केवल देह ही समझा | पुरुषों के दाढ़ी बनाने के ब्लेड ,शेविंग क्रीम , …
ज्ञान वह क्षमता है जिससे हम अपने गहरे दर्द भरे घाव को भर सकें हाय फ्रेंड्स मैं मीरा | …
ये जिंदगी हमेशा नहीं रहने वाली है | वो क्षण जो अभी आपके हाथ में सितारे की तरह चमक रहा …
सबसे पीड़ादायक वो ” गुड बाय ” होते हैं जो कभी कहे नहीं जाते और न ही कभी उनकी व्याख्या …
हजारों किलोमीटर की यात्रा की शुरुआत बस एक कदम से होती है मुहल्ले के अंकल जी वॉकर ले कर ८० …
साधना सिंह कतरा कतरा पिघल रहा है दिल नही मेरा संभल रहा है || हवा भी ऐसे सुलग रही …
बचपन में एक गाना अक्सर सुनते थे “लिखे जो खत तुझे वो तेरी याद में हज़ारों रंग के सितारे बन …